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भाईजीकहिन Bhaijikahin

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क्या वास्तव में यही इसका समाधान है ?

Posted On: 3 Jun, 2010 Others में

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भाईजी आज एक लंबे समय के बाद नजर आए थे । कुछ चिंतित व परेशान । शायद किसी गहन विचार में डूबे हुए थे । मैं उनके पास जाता हूँ और पूछता हूँ – ‘भाईजी क्‍या बात है, कहां थे आप, बहुत दिनों बाद नजर आए?’

 

भाईजी ने जैसे मेरे प्रश्‍नों को सुना ही नहीं । बस बोलने लगे, ‘पारीक जी, ये बताइये हमारे देश में किसका शासन है ?’ मैं कुछ कहता उससे पहले ही बोले, ‘कानून का ना, हमारे देश का एक संविधान है जिसके अनुसार हमारे देश का सारा कामकाज चलता है । ठीक कह रहा हूँ ना मैं ?’ पता नहीं भाई जी क्‍या कहना चाहते हैं ! मैं असमंजस में हूँ फिर भी उनकी बात सही देख गर्दन हिलाकर स्‍वीकार करता हूँ । बिना समझे बोलने का तो प्रश्‍न ही नहीं उठता ।

 

‘क्‍या आपनें संविधान पढ़ा है ? क्‍या आप बता सकते हैं कि इसमें कहीं हमारे देश में समय-समय पर पैदा होने वाली समस्‍याओं का कोई हल लिखा है या नहीं ?’ मैं अपनी समझ व पढ़े-लिखे होने का दंभ लिए कहता हूँ – ‘क्‍यों नहीं? संविधान के दायरें में सभी समस्‍याओं का समाधान संभव है । आपको पता होना चाहिए हमारा संविधान विश्‍व का सबसे बड़ा व अनोखा लिखित संविधान है । जिसमें 22 भाग व दस अनुसूचियां हैं । जिनमें लगभग सभी परिस्थितियों में शासन कैसे चलेगा इसका उल्‍लेख है । इसीलिए हम कहते हैं कि हमारे देश में कानून का शासन है ।’

 

‘तब तो, झारखंड से लेकर मध्‍य-प्रदेश तक फैली इस लाल हिंसा का भी कोई हल लिखा होगा ? उसमें बताया गया होगा कि कैसे यह लाल हिंसा फैलेगी ? व उसे कैसे रोकना होगा । उसमें यह भी लिखा होगा कि कितने जीवन समाप्‍त होने के बाद इस समस्‍या को कानून रोकेगा । कितनी मांग उजड़नें, कितनें बच्‍चे अनाथ होनें व कितने घर फुकने के बाद इस पर लगाम लगाई जाएगी ?’ भाईजी को रोकना बेकार था । इसलिए मैं उन्‍हें बात पूरी करने का मौका देते हुए चुप ही रहता हूँ । ‘बताइयें, क्‍या संविधान में यह भी लिखा है कि कितनी सरकारी व कितनी निजी संपति का नुकसान होगा ? कितनें आदमी इस लाल हिंसा का समर्थन करेंगें और कितने इसका विरोध करेंगें ?’ अब मुझसे रहा नहीं जाता, मैं टोक ही देता हूँ – ‘देखिये भाईजी हमारे संविधान में ना तो यह लिखा है कि कोई समस्‍या कब पैदा होगी, कैसे पैदा होगी व ना ही यह लिखा है कि किसी समस्‍या का समाधान क्‍या होगा ? हमारा संविधान हमारे देश की महान व विद्वान आत्‍माओं द्वारा बनाया गया है और इसमें देश का शासन कैसे चलाना होगा? यह उल्‍लेख किया गया है ।’ 

 

भाईजी मुझे बीच में ही टोक देते हैं-‘अच्‍छा, तो मैं अब समझा, इस लाल हिंसा की असली जड़ यह हमारा संविधान ही है । तभी इसमें देश का शासन कैसे चलाना होगा तो लिखा है लेकिन राज्‍य का शासन कैसे चलेगा यह उल्‍लेख नहीं हैं ? फिर तो बेचारी राज्‍य सरकारें क्‍या कर सकती हैं, जब कोई उपाय ही नहीं बताया गया तो हल कैसे निकलेगा।’

 

‘नहीं-नहीं, इसमें यह भी उल्‍लेख है कि राज्‍य का शासन कैसे चलेगा ? हमारे संविधान की प्रस्‍तावना में कहा गया है कि भारत को एक सम्‍पूर्ण प्रभूत्‍व सम्‍पन्‍न समाजवादी पंथ निरपेक्ष लोकतंत्रात्‍मक गणराज्‍य बनाने के लिए इसे अंगीकृत, अधिनियमित और आत्‍मापित किया गया हैं । इसीलिए इसमें भारत के नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक, न्‍याय, विचार, अभिव्‍यक्ति, विश्‍वास, धर्म और उपासना की स्‍वतंत्रता तथा प्रतिष्‍ठा और अवसर की समता प्रदान करनें की कामना की गई है तथा व्‍यक्ति की गरिमा और राष्‍ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने का संकल्‍प लिया गया हैं ।’

 

‘अच्‍छा तो ये माओवादी और नक्‍सलवादी लाल हिंसक संविधान द्वारा भारत के नागरिकों को प्रदान की गई सभी स्‍वतंत्रताओं का लाभ उठा कर निर्लज्‍ज हो गए हैं और प्रतिष्‍ठा तथा अवसर की समता प्रदान करने के लिए झारखंड से लेकर मध्‍य-प्रदेश तक के नागरिकों पर नए-नए प्रयोग कर उनके बीच बंधुता बढ़ा रहे हैं । ताकि हम सभी अपने-अपने राज्‍य का गुणगान करने व दूसरे राज्‍य को कोसने की आदत छोड़ कर देश को एकता के सूत्र में पिरों सकें । मैं तो व्‍यर्थ ही इन्‍हें गलत समझ रहा था ।’ भाईजी ने संतोष व्‍यक्‍त करते हुए कहा ।

 

‘आप जैसा सोच रहे हैं, वैसा है नहीं? ये नक्‍सली, ये माओवादी देश को एकता के सूत्र में नहीं पिरों रहे बल्कि खंड-खंड करने का ख्‍वाब पाल रहे है ? आप ही बताइयें क्‍या अपनी बातों को मनवानें का तरीका हिंसा ही है और किसी तरीके से ये अपनी बात सरकार तक     नहीं पहुँचा सकते ? क्‍यों आम नागरिकों की बलि चढ़ा रहे हैं ? साफ है, ये देश को अस्थिर करने व नुकसान पहुँचानें की नीयत से ही ऐसा कर रहे हैं । ये कुछ ऐसे लोग है जो समझते हैं कि किसी को मार देने या किसी सरकारी सम्‍पति को नष्‍ट कर देने से ही एक भय का वातावरण फैल जाएगा और उनकी सत्ता कायम हो जाएगी । जबकि हमारा देश एक लोकतंत्र हैं जहां जनता का, जनता के लिए, जनता के द्वारा शासन चलाया जाता है  ।’ अभी मैं इतना ही कह पाता हूँ कि भाई जी बोल पड़ते हैं, ‘अच्‍छा आप ये बताइये कि ये लोग जो इतना उत्‍पात मचा रहे हैं, वे क्‍या है ? क्‍या वे यही जनता नहीं हैं ?’

 

मैं भाईजी की बात का अर्थ समझने की कोशिश करते हुए कहता हूँ, ‘आप कहना क्‍या चाहते हैं ? इस देश का प्रत्‍येक नागरिक जनता ही कहलाएगा ।’

 

‘तो फिर इसका मतलब यह हुआ कि जनता ही जनता से लड़ रही है । क्‍या संविधान में इसके बारे में कुछ लिखा है ? नहीं ना, बस फर्क केवल इतना है कि ये लोग आपको सीधे नुकसान पहूँचाते नजर आ रहे हैं और जो संविधान की आड़ से जनता को नुकसान पहूँचा रहे हैं, उनका क्‍या ?’ भाईजी कहते हैं ।

 

मैं भी तत्‍काल जबाव देता हूँ, ‘भाई जी इस देश में परदें की बड़ी कीमत है । जब तक सब कुछ ढका-छिपा हैं, तब तक सब कुछ जायज है और यदि कुछ भी उघड़ गया तो वह नाजायज या निर्लज्‍जता हैं । इसलिए आप केवल यह सोचिए कि निर्दोषों को काल का ग्रास बनाना कहां तक उचित हैं ? हमारे संविधान में अब तक संशोधनों का सैंकड़ा पूरा होने को है, क्‍यों ? क्‍योंकि हम समय के अनुसार अपने को बदलना जानते हैं ।’

 

‘आप ऐसा क्‍यों नहीं कहते कि हम मूल को मिटाकर अपने मन के मुताबिक ढ़ालने की कुव्‍वत रखते हैं । भलें ही इससे किसी का भला हो या न हो । नहीं तो, अभी तक देश से इस तरह की समस्‍याओं को जड़ से मिटानें के लिए क्‍या कोई संशोधन लाकर देश की जनता, पुलिस, प्रशासन व सेना को इतना मजबूत नहीं बनाया जा सकता था कि देश में ये समस्‍याएं मुँह ही ना उठा सकें ।’

 

मैं सोचने लगा था कि क्‍या वास्‍तव में यही इसका समाधान है ? आप क्‍या सोचते हैं ? बताइएगा जरूर ।

अरविन्‍द पारीक



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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Diwakar के द्वारा
08/06/2010

The strict and hard action is required to be taken against the Naxalites. This is the only solution available. Otherwise it will become a problem as big as Punjab and Assam as well as J&K. The Top twenty blogs list is available on home page of jagranjunction.com in General Dabba category dated 2nd June 2010. Your blog is appear at No.1 in the random list. congratulations.

    Arvind Pareek के द्वारा
    09/06/2010

    Dear Diwakarji, Thankyou very much for your comments as well as for information about top 20 blogs. Arvind Pareek

kailash के द्वारा
07/06/2010

sir, i feel at the moment, naxalites are killing innocents, derailing train of progress and damaging property and schools. it indicates that they are not interested in the welfare of people but on hell bebt to create chaos and mayhem.hence should be tackled with a firm hand and no leniency in the garb of human rights-yours

    Arvind Pareek के द्वारा
    07/06/2010

    Dear Shri Kailashji, Thanks for your comments. I am agree with you. They should be treated as Desh-Drohi & Attankvaadis and not as human. arvind pareek

rajkamal के द्वारा
05/06/2010

tap 20-20 me aa ne ke liye badhai

    Arvind Pareek के द्वारा
    07/06/2010

    प्रिय श्री राजकमल जी, आपकी बधाई सर-माथे पर. लेकिन मैंने तो कोई ऐसी लिस्ट नहीं देखी. कहाँ बनी है यह लिस्ट. यदि कोई ऐसी लिस्ट बनी है तो उसमे शामिल सभी साथियों को बधाई. जो उस लिस्ट में नहीं हैं उन्हें शुभकामनाये की वे अगली बार बनने वाली लिस्ट में इस बार आने वाले नामों को पीछे कर सके. क्या आप भी उस लिस्ट में है ? यदि हाँ तो मेरी बधाई स्वीकारे. अरविंद पारीक

yogendrayadav के द्वारा
03/06/2010

आपका ब्लॉग पड़कर अच्छा लगा परिक जी आपसे निवेदन है की मओवादियो और माओत्सेतुंग के बारे में भी कुछ लिखे.

    Arvind Pareek के द्वारा
    04/06/2010

    आपकी प्रतिक्रिया के बारे में धन्‍यवाद ।


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