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भाईजीकहिन Bhaijikahin

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जागरण जंक्शन ब्लॉग का पर्दाफॉश

Posted On: 3 May, 2010 लोकल टिकेट में

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आज ब्‍लॉग तैयार करने बैठा तो सोचने लगा किस विषय पर लिखुँ । जब भी कोई पोस्‍ट पब्लिश की तो मित्रों से पता चला कि इस विषय पर पहले भी लिखा जा चुका है । अर्थात ब्‍लॉग की दुनिया ऐसी है कि आप केवल सोचते भर है और ब्‍लॉगर्स लिख डालते हैं । दूसरे के दिमाग को पढ़नें की खासियत अधिकांशत: सभी ब्‍लॉगर्स में है । इसलिए मैं किसी अनोखे विषय की तलाश में बाहर निकल पड़ा हूँ । लेकिन बाहर मुझे क्‍या मिला, कुछ भी तो नहीं और जब जागरण जंक्‍शन को देखा तो -

 

 

विषय जो खोजन मैं चला, अनोखा विषय ना मिलया कोय,

जो ब्‍लॉग खोजा आपना, बस विषय ही विषय होय ।

 

 

जागरण जंक्‍शन को देखते ही लगा कि संभवत: रीडर्स अछूत वर्ग के है जिन्‍हें जागरण ने अलग स्‍थान दे रखा है और जागरण के अपने लेखकों को अलग स्‍थान । क्‍यों ? शायद इसलिए कि जागरण के सम्‍मानित व इलीट वर्ग के लेखकों के ब्‍लॉग के पाठक कहीं गलती से अछूत वर्ग अर्थात रीडर्स के ब्‍लॉग न पढ़ लें । यह इससे भी पता चलता है कि उन ब्‍लॉगों पर टिप्‍पणियां लिखने वाला वर्ग व रीडर्स ब्‍लॉग पर टिप्‍पणियां लिखने वाला वर्ग अलग-अलग है । क्‍योंकि पाठक जब यह पढ़ता है कि यह रीडर्स के ब्‍लॉग हैं तो वह उन्‍हें उस स्‍तर का नहीं समझता जो जागरण के वेतन भोगी लिक्‍खाड़ लिखते हैं । इसलिए वह उनके दर्शन भी संभवत: दूर से ही करता होगा । भले ही रीडर्स के ब्‍लॉग की सामग्री जागरण के वेतनभोगी लिक्‍खाड़ों से कितनी ही बेहतर हो ।

 

 

और या फिर दूसरा कारण यह हो सकता है कि जागरण के ब्‍लॉग लेखक रीडर अर्थात पाठक नहीं है । वे केवल लिक्‍खाड़ हैं जो केवल लिखना जानते हैं पढ़ना नहीं । और चुंकि वे पढ़ना नहीं जानते इसलिए जागरण समूह ने सोचा उन्‍हें रीडर्स ब्‍लॉग में जगह नहीं मिल सकती । इस तर्क पर हमारे रीडर्स ब्‍लॉग के लिक्‍खाड़ गर्व कर सकते हैं क्‍योंकि हम लिक्‍खाड़ भी हैं और पढ़ाकू भी । तभी तो क्‍या कभी आपने किसी जागरण के वेतन भोगी लिक्‍खाड़ की टिप्‍पणी रीडर्स ब्‍लॉग में देखी है ? हॉं रीडर्स ब्‍लॉग के लेखकों की टिप्‍पणियां जागरण ब्‍लॉग में अवश्‍य मिल जाएंगी ।

 

हो सकता है कि मेरे कुछ मित्र या पाठक यह कह सकते हैं कि कुछ रीडर्स के ब्‍लॉग भी तो जागरण जंक्‍शन के मुख पृष्‍ठ पर प्रदर्शित होते हैं । अरे मेरे भाई, इसमें कौन-सी बड़ी बात हैं जब क्रीमी लेयर आरक्षण से बाहर की जा सकती हैं तो फिर इस आरक्षण से कुछ रीडर्स ब्‍लॉग के लिक्‍खाड़ क्‍यों नहीं अलग हो सकते ? हो सकता हैं वे क्रीमी लेयर से हो । जी हॉं, मुझे ज्ञात है आप मेरी ओर इशारा क्‍यों कर रहे हैं ? हो सकता है मैं भी इस शेयर बाजार में आ रहे उतार-चढ़ाव की तरह कभी-कभी क्रीमी लेयर में आ जाता हूँ । जब-जब महंगाई का असर कम होता हैं व पैसा रूपये की कीमत में आ जाता है तो मैं क्रीमी लेयर में आ जाता हूँ । लेकिन फिर भी हूँ तो आपका ही साथी ।

 

खैर आपको क्‍या लगता है – क्‍या यह वर्गीकरण उचित हैं ? मेरी राय में तो जागरण जंक्‍शन डॉट कॉम लिखने पर खुलनें वाले पेज पर सभी ब्‍लॉग लेखकों, चाहे वह जागरण के लिक्‍खाड़ है या रीडर्स ब्‍लॉग के साझेदार है, के ब्‍लॉग का संक्षिप्‍त व ताजा पोस्‍ट के शीर्षक के साथ विवरण होना चाहिए व यह वास्‍तविक पाठक पर छोड़ देना चाहिए की उसे क्‍या पढ़ना है ? उसे यह पता ही नहीं चलना चाहिए कि यह रीडर का ब्‍लॉग है या जागरण के वेतनभोगी लिक्‍खाड़ का । और यदि बताना अधिक महत्‍वपूर्ण है तो फिर सिगरेट की डब्‍बी पर छपी वैधानिक चेतावनी की तरह छोटे फॉन्‍ट में प्रत्‍येक ब्‍लॉग पोस्‍ट के अन्‍त में इसका उल्‍लेख किया जा सकता है । कुछ इस तरह :-

 

रीडर्स ब्‍लॉग की पोस्‍ट के नीचे दी जाने वाली चेतावनी- यह ब्‍लॉग रीडर्स ब्‍लॉग हैं इससे जागरण का कुछ लेना-देना नहीं है । इसे पढ़कर आपको होने वाली परेशानी के लिए जागरण समूह किसी भी प्रकार से जिम्‍मेदार नहीं है ना ही आपके समय की बर्बादी के लिए ही कोई हर्जाना दिया जाएगा । फिर भी इस पर आपकी टिप्‍पणियों का स्‍वागत है ।

            

जागरण के लिक्‍खाड़ों के ब्‍लॉग की पोस्‍ट के नीचे दी जाने वाली चेतावनी – यह ब्‍लॉग जागरण के लिक्‍खाड़ों का ब्‍लॉग हैं जो जागरण समूह के वेतन भोगी हैं । लेकिन इसे पढ़कर आपको होने वाली परेशानी के लिए जागरण समूह किसी भी प्रकार से जिम्‍मेदार नहीं है ना ही आपके समय की बर्बादी के लिए ही कोई हर्जाना दिया जाएगा । फिर भी इस पर आपकी टिप्‍पणियों का स्‍वागत है ।

 

ऐसी परिस्थिति में दोनों तरह के ब्‍लॉगों को पाठक अवश्‍य देखेंगें व पढे़गें ।

 

अरविन्‍द पारीक



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33 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Brigida Zulauf के द्वारा
23/03/2017

Wow dude this is cool but yet im not as satisfied as i was hoping to be but it was fun ^_^ thanks Truly!!!!

aajkal के द्वारा
19/05/2010

could not resist myself to comment on this, actually readers blog is a medium to bring readers like us to the site. main motive of jagaran is to promote the main blog. but then it’s a mutual benefit, there will be some readers of main blog also, like me, who will browse further and be attracted to an interesting reader blog like this.

shibbuaryamathura के द्वारा
17/05/2010

श्री अरविन्द पारीख जी, आपके लेख ने रीडर बिरादरी को अलग करने और पीड़ा बाटने का मंच दे दिया. धन्यवाद.

    ARVIND PAREEK के द्वारा
    18/05/2010

    धन्‍यवाद शिबु नारायण जी । पीड़ा बांटने से ही कम होती है । इस मरहम के लिए पुन: धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

Soni garg के द्वारा
13/05/2010

वाह सर क्या तबियत से लिखा है पद कर एक आत्मिक शांति मिली ! खुद मुझे कई बार जागरण का criteria समझ नहीं आता की ये किस कसोटी पर रख कर किसी का ब्लॉग फीचर कर रहे है क्युकी कई बार मेरे साथ ऐसा हुआ है की मेरे जिस ब्लॉग ने जागरण पर पानी भी नहीं माँगा वही उसी ब्लॉग ने दूसरे हिंदी दैनिक के होम पेज पर डायरेक्ट क्लिक किया है जिस पर अच्छा खासा रिस्पोंस भी मिला ! अब यहाँ ऐसा क्यों नहीं हुआ समझ नहीं आया ! अब मैं कमेन्ट की बात नहीं कर रही मैं चयन की बात कर रही हूँ ! जिस ब्लॉग को जागरण के वरिष्ठ अधिकारियो ने नाकारा उसी को किसी अन्य अखबार ने हातो हाथ क्यों लिया ??

    Arvind Pareek के द्वारा
    14/05/2010

    सुश्री सोनी जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद । मैंनें जिस उद्देश्‍य से ब्‍लॉग लिखा था वह था जागरण के वेतनभोगी लिक्‍खाड़ों को रीडर्स के ब्‍लॉग पढ़ने के लिए उत्‍सुक करना तथा रीडर्स के ब्‍लॉग पर टिप्‍पणी करना । लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हो पाया है । जहां तक किसी ब्‍लॉग रचना की बात है । कहीं क्‍यों क्लिक हो जाती है और कहीं क्‍यों नहीं तो इसका कारण जागरण ब्‍लॉग पर जागरण के वेतनभोगी लिक्‍खाड़ तथा रीडर्स जो ब्‍लॉग लिख रहे हैं वे ही अधिक विजिट करते हैं । या फिर ब्‍लॉग लेखक के परिचित ही अपने परिचित के ब्‍लॉग पर विजिट कर रहे हैं । यदा कदा आने वाले विजिटर्स व अपरिचित विजिटर्स न के बराबर है । इसलिए ब्‍लॉग का क्लिक होना या न होना भी इस पर निर्भर करता है । इसी तरह जागरण भी केवल परिचित लेखकों को ही पहले प्रश्रय देता है । यह तो पत्रकारिता जगत का दस्‍तुर ही है । अरविन्‍द पारीक

Rajesh Kashyap के द्वारा
12/05/2010

भाई जी क्यों इतनी चिंता करते हो. खुदी को कर बुलंद इतना की हर तक़दीर से पहले. खुदा बन्दे से खुद पूछे कि बता तेरी राजा क्या है. हम इतना अच्छा लिखेंगे कि हर कोई हमारे विचारों का कायल हो जाये. वैसे कीचड़ में गिरे हीरे की कभी भी कम कीमत नहीं होती. दस साल पहले जब में संपादकों के पास अपने लेख भेजा करता था तो सभी खेद सहित लौट आते थे और आज वो ही संपादक लेख भेजने का आग्रह करते हैं. यह मेरा निजी अनुभव है, अपने मुंह मियां मिट्टू वाली बात नहीं है. मेरे हिसाब से सभी भाई बहुत अच्छा एवं विचारणीय लिखते हैं. आप भी बहुत ख्हूब एवं सराहनीय लिखते हो.

    Arvind Pareek के द्वारा
    14/05/2010

    प्रिय श्री कश्‍यप जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ व प्रशंसा के लिए धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

nikhilbs09 के द्वारा
07/05/2010

मेरे विचार से तो जागरण party वाले ब्लोग्गरओं को टिप्पड़ी की जरुरत नहीं है… लेकिन प्रतिभागी ब्लागरों को टिप्पड़ी की जरुरत है, आखिर पोपुलारिटी का मामला है, शायद यही सोचकर जागरण समूह ने हम लोगो को विभाजित कर दिया है|

    अरविन्‍द पारीक के द्वारा
    08/05/2010

    आपकी टिप्‍पड़ी के लिए धन्‍यवाद । साझेदार ब्‍लॉगर यदि टिप्‍पड़ी करते हैं तो निस्‍संदेह अच्‍छा लगता है । लेकिन जिनका काम ही खबरो से खबरे निकालना व बातों पर टिप्‍पणी करना हैं, यदि वे कुछ नहीं लिखते हैं तो इस विभाजन का दर्द तो होता ही है । पुनश्‍च आपका धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

saday pareek के द्वारा
06/05/2010

very nice …..

    Arvind Pareek के द्वारा
    07/05/2010

    प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद ।

SUNEEL PATHAK के द्वारा
06/05/2010

भाई वेतनभोगियों को तो ढूंढा जा सकता है और उन पर कार्रवाई भी की जा सकती है। आप यह क्‍यों नहीं समझते हैं कि ऐसा भी तो हो सकता है कि यह लिस्‍ट कार्रवाई की गुरेज से बनाई गई हो। लिखते रहिए ऐसा कैसे है कि कमेंट नहीं मिलेगा। जागरण के लिख्‍खाड आप जैसे पाठकों की वजह से ही हैं और यकीन मानिये पाठकों की पोस्‍ट हमेशा देखी जाती है और उन पर टिप्‍पणियां भी की जाती हैं।

    Arvind Pareek के द्वारा
    07/05/2010

    प्रिय श्री पाठक जी, इतना छेड़ने के बाद भी किसी जागरण के लिक्‍खाड़ की टिप्‍पणी के दर्शन नहीं हुए है । सरसरी तौर पर नजर डालनें पर किसी भी रीडर के ब्‍लॉग पर जागरण वालों की जागृत टिप्‍पणी नहीं देख पाया हूँ । खैर आपने प्रतिक्रिया दी धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

kmmishra के द्वारा
06/05/2010

टिप्पणी खेंचू पोस्ट के लिये बधाई ।

Shivendra Mohan Singh के द्वारा
05/05/2010

लिखास की अद्भुत विधा ,,,, साधुवाद

    Arvind Pareek के द्वारा
    07/05/2010

    प्रिय श्री मिश्रा जी, विशेषण के लिए शुक्रिया व आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

Arvind Pareek के द्वारा
05/05/2010

प्रिय श्री निखिल पाण्डेय जी, मैं आपसे सहमत हूँ । उत्सा्हवर्धन व प्रतिक्रिया के लिए धन्य‍वाद । अरविन्द पारीक

rajatraj के द्वारा
04/05/2010

timepass recreation good act

Manoj के द्वारा
04/05/2010

अरविंद जी , ऐसा नही है कि मेरा ब्लोग जागरण ब्लोग में आता है या मेरा कोई परिचित जागरण में कार्यरत है, मेरा ब्लोग भी साधारण रीडर ब्लोग में आता है लेकिन गुणवत्ता और कंटॆट के आधार पर जागरण के ब्लोग दिखाए जाते है.आप अच्छा लिखों टिपपणी अपने आप आ जाएंगी, और रही बात कि कोई  भी लेखक मात्र टिपपणियों के लिए नही लिखता आप कभी मेरे ब्लोग पढकर देखे शुरु शुरु मॆं तो कोई इन्हें पढता भी नही था लेकिन जैसे जैसे अच्छा लिखने लगा लोग पढने लगे. और मैंने यह कभी नही कहा कि आपने गलत लिखा हैं. मेरे ब्लोग पढने के लिए यहा क्लिक करें http://manojkumarsah.jagranjunction.com/….

    Arvind Pareek के द्वारा
    05/05/2010

    प्रिय श्री मनोज जी, कम शब्दों में लिखी टिप्पणी की समस्या यह है कि कहा कुछ जाए और समझा कुछ जाए । मैंनें आप पर कोई आरोप या आपके ब्लॉग पर कोई टिप्प‍णी नहीं की थी । केवल इतना ही कहा था कि ‘’आपसे यदि जागरण के सहयोगी परिचित है तभी आपके ब्लॉग पर टिप्पणी करते हैं अन्यथा मुझे तो कोई टिप्पणी नजर नहीं आई ।‘’ यहां मेरा आपसे से अभिप्राय यह था कि किसी रीडर्स के ब्लॉग पर अपवाद स्वपरूप यदि जागरण के लिक्खाड़ टिप्पणी करते हैं तो वे अवश्य उनके परिचित होंगें । क्योंकि मैं केवल सर्फ करने पर यह समझ पाया हूँ कि मैंनें किसी जागरण वाले की टिप्प‍णी रीडर्स ब्लॉंग में नहीं देखी । जहां तक कोई भी लेखक टिप्पणियों के लिए नहीं लिखता की बात है तो मेरे भाई यदि आत्मसंतुष्टि के लिए ही लिखते हैं तो फिर बेव पर समय क्यों बर्बाद करते हैं । मेरा तो मानना है कि यदि हम कुछ सार्वजनिक कर रहे हैं तो केवल इस अपेक्षा के साथ कि सभी देखे व टिप्पणी दें । अरविन्द पारीक

Arunesh Mishra के द्वारा
03/05/2010

बहुत सही बात उठाई अरविन्द जी :) , यह सवाल तो बहुतो के मन में होगा लेकिन आप ने बहुत ही मस्त अंदाज़ में कह के बताई है…

    Arvind Pareek के द्वारा
    04/05/2010

    धन्यवाद आपने टिप्पणी तो दी लेकिन अभी भी जागरण ब्लॉग के लिख्खाड़ो की टिप्पणी का इंतज़ार है.

    NIKHIL PANDEY के द्वारा
    04/05/2010

    अरविन्द जी आपने एकदम सही बात उठाई है .. मुझे लगता है की जागरण ब्लोग्स को इसलिए रखा गया है ताकि जागरण के लोग को इससे अलग रखा जाये……….. वैसे ये गलत ही है …मै आपसे सहमत हु ….और मैंने कई बार देखा है की जागरण ब्लोग्स में जिन कुछ ऐसे स्तरहीन ब्लोग्स आ जाते है जिन्हें नहीं होना चाहिए उस जहग पे…ये एक सुझाव भी है .जागरण को इसपे सोचना चाहिए….. ये जागरण के लिए बेहतर होगा…….. सभी को सामान मौका…. ये विभाजन कुछ उचित नहीं लगता ……. या हो सकता है जागरण की टीम के लोगो का मन रखने के लिए उन्हें अलग कर दिया गया हो ताकि वे भी अपनी फोटो फीचर्ड करसके क्योकि जागरण टीम के कुछ ब्लोग्स को हटा दे तो उनसे बहुत ज्यादा बेहतर ब्लोग्स रीडर्स द्वारा पोस्ट किये जाते है … अगर दोनों बराबर हो गए तो जागरण के लिक्खाडो का क्या होगा …………………

manoj के द्वारा
03/05/2010

चाहे कुछ भी हो जागरण जंक्शन ने ब्लागिंग का जो मंच पेश कर रखा है वह काबिलेतारीफ है और केटगरीज अलग अलग होने से हमे ं पता चलता है कि किस तरह से अच्छे लेखक लिखते हैं.

    Arvind Pareek के द्वारा
    04/05/2010

    प्रिय मनोज जी, मैं इस मंच की बुराई नहीं कर रहा हूँ बस वर्गीकरण से आपकी तरह पीडि़त हूँ । आपसे यदि जागरण के सहयोगी परिचित है तभी आपके ब्लॉग पर टिप्पणी करते हैं अन्यथा मुझे तो कोई टिप्पणी नजर नहीं आई । तथापि सुझाव पर आपकी राय से मैं इसलिए सहमत नहीं हूँ क्योंकि जब आपका ब्लॉग जागरण के लिक्खड़ों के साथ होगा तो ज्यादा फर्क पता चलेगा । अभी तो अधिकांश टिप्पणियां परिचितों व मित्रों से ही प्राप्त हो रही हैं । मेरे जैसे पार्ट टाइम लेखक साइबर कैफे से टिप्पणियों के लिए वक्त ही नहीं निकाल पाते । तथापि आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद । अरविन्द पारीक

shishusharma के द्वारा
03/05/2010

भाइ जी, कुछ अन्‍तर हमेशा बरकरार रहना चाहिये। अपने पराये में भेद करने की मानसिकता ही हमें इलीट छॉंटने में मददगार हो सकती है। कुछ जन हमसे नीचे पायदान पर रहें,तभी हम श्रेष्‍ठ कहला सकते हैं।

    Arvind Pareek के द्वारा
    04/05/2010

    प्रिय श्री शिशु कुमार जी, बात आपकी सही हैं जब मनु ने ही वर्गीकरण कर दिया था तो यहां क्यों नहीं? लेकिन हम भेदभाव मिटाकर कुछ अन्तर रखना चाहते हैं तभी तो वैधानिक चेतावनी वाला सुझाव परोसा है ताकि सॉंप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे । अरविन्द पारीक


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