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भाईजीकहिन Bhaijikahin

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छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी...

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भाईजी जिस तेजी से मेरी ओर चले आ रहे थे । उसे देखकर लग रहा था कि आज शायद मेरी किसी गलती की सजा मुझे देकर ही रहेंगें । सोचा उनके आते ही माफी माँग लुँगा । मैं जल्‍दी-जल्‍दी याद करने लगा कि ऐसी कौन सी गलती है जिसके लिए मुझे माफी माँगनी है । भाईजी का डीलडौल ऐसा है कि गलती न भी की हो तो भी अपनी गलती मानने में हर्ज नहीं है । लेकिन लाख याद करने पर भी मेरी गलती याद ही नहीं आ रही थी । भाई जी सिर पर आ पहुँचे थे ।

 

‘ये देखिये हमारे देश के कॉलेजों का हाल !’ हाथ में पकड़े किसी अखबार के कागज को लहराते हुए भाईजी बोले । ‘जिस देश में कदम-कदम पर नेता मिलते हैं, और ना जाने कितने टाटा, बिड़ला, अम्‍बानी, भरतिया, नारायण मुर्ति आदि जैसे उद्योगपति है, हर जिले में आईएएस अधिकारी बैठे है, हजारों गॉंवों में हजारों पंचायतें और हजारों प्रधान है, क्‍या उस देश में किसी कॉलेज में मुख्‍य अतिथि किसी ऐसे व्‍यक्ति को बनाना चाहिए जिसे कोई जानता भी ना हो ? क्‍या सीखेंगें बच्‍चे, क्‍या प्रेरणा मिलेगी उन्‍हें ?’

 

कुछ जबाव देने से पहले मैं भाई जी के हाथ से वह अखबार का कागज लगभग छीन ही लेता हूँ और जल्‍दी-जल्‍दी उस पर नजर डालता हूँ । फिर ना चाहते हुए भी हँस पड़ता हूँ, जानता हूँ भाई जी अब पक्‍का नाराज हो जाऐंगें । लेकिन मैं बोलना शुरू कर देता हूँ ।

 

‘भाई जी, मुझे तो लगता है आपको मुख्‍य अतिथि नहीं बनाया इसलिए नाराज हैं । वर्ना मुझे तो इसमें कुछ भी गलत नहीं लग रहा है ।’ भाई जी भौंचक से मेरा चेहरा देखने लगते हैं । मैं पास से गुजरते एक सज्‍जन को बुलाता हूँ और उस अखबारी कागज में छपी खबर पढ़ने के लिए देता हूँ और पुछता हूँ – ‘क्‍या आपको इस खबर में कुछ गलत लग रहा है?’ वे सज्‍जन आश्‍चर्य से मुझे देखते हुए खबर पढ़ते हैं और ना में गर्दन हिलाते व कंधे उचकाते हुए चले जाते हैं । भाईजी अभी भी मुझे घुर रहे हैं, कुछ कहना चाहते हैं मैं उन्‍हें रोकते हुए एक अन्‍य सज्‍जन को बुलाता हूँ । फिर वहीं प्रश्‍न दोहराता हूँ और वही जबाव पाता हूँ । इस तरह एक-एक कर लगभग 15-20 लोगों से वही प्रश्‍न पूछता हूँ और वही जबाव पाता हूँ ।

 

भाईजी के सब्र का अंत हो जाता है । वे बोल उठते है – ‘आखिर आप साबित करना क्‍या चाहते हैं, अमां ऐसे तो आप कभी कुछ बोलते नहीं है और आज हद ही करे जा रहे हैं ।’ मैं पुन: भाईजी की बातो पर विराम लगा देता हूँ क्‍योंकि आज बोलने का ठेका मैंनें ले लिया है ।

 

‘देखिये भाईजी आप खामाखां परेशान हो रहे थे । मैं आपको बताना चाहता था कि आप गलत है । आपने खबर को ठीक से पढ़ा होता तो आप कभी भी नाराज नहीं होते बल्कि बंगलौर के इस ‘क्रिस्‍तु जंयती कॉलेज’ के प्रिंसिपल को दाद ही देते कि उन्‍होनें चालीस से ज्‍यादा एमबीए कॉलेज के छात्रों के इस राष्‍ट्रीय स्‍तर के समारोह ‘सायनेटिक्‍स 2010’ में एक ऐसे व्‍यक्ति को मुख्‍य अतिथि बनाया । जो बिना किसी सहारे के स्‍वयं के बुते पर आज एक कम्‍पनी यूडांडा टेक्‍नोलॉजी का प्रबन्‍ध निदेशक है और जिसने अपने वक्‍तव्‍य में अपने मनोभावों को पहचान कर अपने काम से प्‍यार करते हुए अपने सपनों को साकार करने का आह्वान’ किया है । भविष्‍य के प्रबंधकों के लिए इससे बेहतर ओर क्‍या हो सकता था ? आप ही बताइये ।’ भाईजी अवाक थे ।

 

लेकिन मैं आप से जानना चाहता हूँ कि आप इस बारे में क्‍या सोचते है ? क्‍या आपको नहीं लगता कि हमें ऐसे युवाओं का उदाहरण ही हमारी भविष्‍य की युवा पीढ़ी के सामने रखना चाहिए ताकि अपने जैसे आम् युवा से प्रेरणा प्राप्‍त कर आज के युवा कुछ नया कर दिखाएं । इस अंग्रेजी अखबार का वह हिस्‍सा आपकी जानकारी के लिए प्रस्‍तुत हैं :-

Udandanews 

इस पर आपकी बेबाक टिप्‍पणियां आमंत्रित हैं, क्‍योंकि मुझे तो बस यही कहना है कि ‘छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी…’

 

अरविन्‍द पारीक



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11 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

http://jarjspjava.jagranjunction.com के द्वारा
20/07/2010

it is absolutely right that what a youth can do; youth himself don\’t know. Today youths are like Hanuman jj of Ramayana; when he had to cross the vast sea in search of Sita maiya on beach of Sri lanka. Somehow, He was forget his power but reminded by a saint (bhaisahab sorry, that i could not recall the name of saint…)… Similarly youth needs to be reminded his abundant power. according to me for this job; it doesn\’t matter who one demystifying and stimulating one self to do something worthy, however. i guess one doesn\’t get old until he feel himself young and works with same feeling. Best example is our khurana jee :) -so many thanks for such a inspiring blog Nikhil Singh

Raj Kumar Virmani के द्वारा
10/05/2010

आज बेब सर्फ करते हुए भाईजी कहिन को देखा और साथ ही इस लेख को भी । आपने सही लिखा है लेकिन कुछ क्षेत्रों में छोड़ो कल की बातें तो ठीक है परंतु कहीं कहीं कल की बातें ही ज्‍यादा कामयाब है । फिर भी युवाओं के बीच युवा ही प्रेरणा के स्‍त्रोत हो सकते हैं । मैं तो यही मानता हूँ । राजकुमार

    Arvind Pareek के द्वारा
    14/05/2010

    प्रिय श्री राजकुमार जी, प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद । केवल वेब सर्फ करते हुए ही नहीं अब सीघे ही इस जागरण जंक्‍शन के ब्‍लॉग को विजिट करिए व प्रतिक्रियाएं देते रहिए ।

T.R. Kumaran के द्वारा
10/05/2010

I was there in the function organised by Krishtu Jayanti College, Bangluru. The tone and the address of Mr. Ram Purohit of Udanda Technologies has certainly promoted and touched many of them present their. You rightly said that example of person like Mr. Ram Purohit must be kept before the today’s budding youth. So that they may realise that nothing is impossible. Good article, i recommend every youth may read it.

    Arvind Pareek के द्वारा
    14/05/2010

    Dear Shri Kumaranji, Thank you very much for your comments. Thanks for recommending this page to every youth. pareek

Dr. Ramesh Govind के द्वारा
01/05/2010

It is a nice article. Youth is VVIP now a days. keep it up

    Arvind Pareek के द्वारा
    14/05/2010

    Dear Dr. Ramesh Govidji, Thanks for your comments. pareek

Krishan Nigam के द्वारा
01/05/2010

नेताओं और वीआईपी से भरे देश में कोई कॉलेज किसी अनजान किंतु संघर्ष कर बुलंदियों पर पहूँचे यूवा को मुख्य अतिथ्रि बनाएगा । इसकी तो मैं कल्पना भी नहीं कर सकता था । क्योंकि हमारे देश का चलन तो यह हैं कि राजा का बेटा राजा होता है जैसे नेहरू/गांधी परिवार के बच्चे । जिनमें कोई विशेष योग्यंता नहीं हैं फिर भी वे किसी भी समारोह में वीवीवीवीवीआईपी होते है । यदि जैड प्लस सुरक्षा ही वीआईपी होने का पैमाना है व योग्यता की कोई कीमत नहीं है तो इस देश का भगवान ही मालिक है । क्रिस्तु जंयती कॉलेज, बंगलौर के प्राचार्य महोदय को मेरी बहुत-बहुत बधाई । आपको भी एक अच्छे विषय पर सुंदर अभिव्यक्ति के लिए बधाई ।

    Arvind Pareek के द्वारा
    14/05/2010

    प्रिय श्री निगम जी, टिप्‍पणी के लिए धन्‍यवाद । राजा का बेटा राजा की कहावत अब पुरानी हो चुकी है । इसीलिए मैंनें लिखा है कि – छोड़ो कल की बातें कल की बात पुरानी… । क्रिस्तु जंयती कॉलेज, बंगलौर के प्राचार्य महोदय को तो मैं भी बहुत-बहुत बधाई देता हूँ कि उन्‍होंनें एक कदम तो बढ़ाया । पारीक

sday के द्वारा
29/04/2010

बात लिखी है खरी-खरी, युवा ही है सबसे बली चाहे जो कर सकता है, असंभव को संभव कर सकता है भाई जी लिखिये इसी तरह, पर बुजूर्गो की भी करिये परवाह बुजूर्गो बिना ज्ञान नहीं हैं, संसार में सम्मारन नहीं हैं । युवाओं पर इतने सूंदर विचार लेकिन टिप्पूणी नदारद हा धिक्काहर । लगता है युवा अब इंटरनेट नहीं देखते, बुजूर्ग्‍ भी है अब ताश खेलते भाई जी लिखना करिये बंद क्योंीकि पढ़ने वाले रह गए है कम ।

    Arvind Pareek के द्वारा
    29/04/2010

    आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद ।


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