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भाईजीकहिन Bhaijikahin

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तनाव की दवा है साफ–सफाई ? सफाई करें तनाव भगाएं !

Posted On: 9 Apr, 2010 मेट्रो लाइफ में

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भाई जी आज बिना जरूरत के डाक्‍टर बन कर आए थे । कैसे ? क्‍योंकि मुझे कोई तनाव नहीं था, बस गला कुछ खराब था । इसलिए मैं कुछ बोल नहीं रहा था । लेकिन वो मुझे तनाव कम करने के उपाय बता रहे थे । मैं गले से मजबूर उन्‍हें रोक भी नही पा रहा था । मुझे लग रहा था कि जाना तो था कान,नाक गले के डाक्‍टर के पास लेकिन पहूँच गया था मनोरोगों के डाक्‍टर के पास । जी हॉं,  जाना था जापान पहूँच गए चीन समझ गए ना । लेकिन भाई जी जो जानकारी दे रहे थे, वो थी बड़े काम की, इसलिए उसे आप के साथ बाँटनें का लोभ सँवरण नही कर पा रहा हूँ ।

 

‘देखो भाई ये ऐसी काम की बात है जिसे मेरे घनिष्‍ठ मित्र ने आजमाया है और लाभ भी उठाया है । वो जब भी किसी काम के कारण तनाव का अनुभव करता है तो तुरंत अपने कार्यालय में अपनी सीट व उसके आस-पास की सफाई पर विशेष ध्‍यान देता है । जहां तक संभव होता है, अपनी दराज,  टेबल, अलमारी आदि की सफाई का कार्य वह स्वयं करता है । इससे वह न केवल तनाव से मुक्त हो जाता है,  बल्कि उसका तो कहना है कि उसे शांति का अनुभव भी होता है । आपको पता है  मेरे ये मित्र एक कम्पनी में जनरल मैनेजर है ।‘ भाईजी का तनाव मुक्ति पुराण चालु है ।

 

‘ अच्‍छा आप मुझे बताइये क्‍या आप जानते हैं कि इस सम्बन्‍ध में मनो-रोग विशेषज्ञ क्‍या कहते हैं ? अरे भाई मेरे यही कि जब लोग ‘होर्डिंग सिंर्डोम’ से ग्रस्त हो जाते हैं,  तो कबाड़ या बेकार पड़ी चीजों को भी संभालकर रखने लगते हैं । यह एक मानसिक डिसऑर्डर है । इसके लिए मनो-रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए ।‘

 

‘तो क्‍या सफाई करने से तनाव उड़न-छू हो जाता हैं । क्‍या ये तनाव की दवा है ।‘ मैं अपने बैठे गले से किसी तरह ये चार शब्‍द निकालता हूँ ।

 

‘ लगता है आप मेरी बात ध्‍यान से नहीं सुन रहे थे । जहां तक साफ-सफाई को तनाव की दवा मानने की बात है,  मनो-रोग विशेषज्ञ मानते है कि आपके आस-पास साफ-सफाई है तो आप स्वस्‍थ तो रहेंगें ही । हमारे आस-पास का वातावरण हमारे व्‍यवहार व स्वभाव को प्रभावित करता है ।‘ मुझे लगता है या तो भाई जी किसी मनो-रोग विशेषज्ञ से टकरा गए थे या फिर भाई जी पर किसी मनो-रोग विशेषज्ञ का भूत सवार हो गया है । मैं मन ही मन हनुमान-चालीसा को दोहरानें का प्रयास करता हूँ, जय हनुमान ज्ञान गुन सागर….।

 

‘ अच्‍छा आपको कहीं ये तो नहीं लग रहा कि मैं मनोरोग का शिकार तो नहीं हो गया हूँ । अरे मेरे भाई, आज सुबह-सुबह दो लोगों को सड़क पर झगड़ते देखा हैं । अब आप ही बताइये सुबह-सुबह जो सरे आम् लड़ रहे है वो तनाव ग्रस्‍त नहीं तो क्‍या हैं ? मेरी गर्दन सहमति दर्शाती है । लेकिन भाईजी अपने तनाव पुराण को विराम देने के मुड में नही थे । बोले – ‘अच्‍छा यह बताइये कि क्‍या वास्‍तु व फेंग्‍शुई विशेषज्ञ भी किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर सबसे पहले घर में एकत्रित कबाड़ एवं खराब फालतू सामान को ही घर से बाहर का रास्ता दिखाने की सलाह नहीं  देते हैं । वे तो घर में जमा कबाड़ एवं खराब फालतू सामान को ही व्यक्ति के मानसिक रूप से अस्वस्‍थ तथा अव्यवस्थित होने का कारण मानते हैं । ‘

 

मैं भाईजी रूपी वेताल के चुप होते ही सोचने लगता हूँ कि कहीं क्‍या वास्‍तव में अपने आस-पास का वातावरण स्वच्छ होते ही हमें लगेगा कि हमने अपना तनाव का कारण भी कबाड़ के साथ बाहर निकाल दिया है ? लेकिन फिर सोचता हूँ कि साफ – सफाई की शुरूआत करना ही कठिन लगता है । लेकिन यदि हम इसे अपने साप्ताहिक या मासिक  कार्य में शामिल कर लें तो यह इतना कठिन भी नहीं लगेगा । प्रतिदिन अपनी दिनचर्या मे से 10 मिनट निकाल कर हम चीजों को व्यवस्थित तरीके से रखते हैं तो भी हम कामयाब हो सकते हैं ।  जब भी हम नया कुछ खरीदें तो पुराने को दान करने या किसी के साथ बाँटने से न हिचकिचाएं ।

 

मुझे भी याद आने लगता है कि वास्तु व फेंग्‍शुई विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी घर में कबाड़ अथवा फालतू सामान रखनें के लिए कोई कोना या कमरा नहीं होना चाहिए । यदि कुछ गंदा या  कबाड़ अथवा फालतू सामान रखना जरूरी हो तो उसे इस तरह रखें कि वह सीधे आपकी नजरों मे न आए जैसे गंदे कपड़ें किसी साफ-सुथरे बैग में रखें तो कबाड़ भी ढका होना चाहिए। फिर भी ऐसे सामान को घर में इकठ्ठा ना ही करें तो अच्छा है । सीढि.यों पर अथवा उनके नीचे, घर की गैलरी या कॉरिडोर में भी कबाड़ जमा नहीं होने देना चाहिए क्योंकि आपके लिए आवश्यक पॉजिटिव एनर्जी एक कमरे से दूसरे कमरे में निर्बाध रूप में आ जा सकती है ।

लेकिन अब मैं कबाड़ अथवा फालतू सामान को साफ करने के तनाव में रहने लगा हूँ । शायद बिन माँगी सलाह का यही परिणाम होता है । मुझे तो लगता है कि किसी भी चीज की अति से तनाव होता है । आप क्‍या सोचते है ?

अरविन्‍द पारीक

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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shanu के द्वारा
15/06/2010

Kya khoob kahi apne pratik ji.

R K KHURANA के द्वारा
14/04/2010

पारीक जी, आपके अन्य लेखों की भांति यह “तनाव ग्रस्त” लेख भी बहुत अच्छा है ! बहुत पसंद आया !

    Arvind Pareek के द्वारा
    15/04/2010

    प्रिय श्री खुराना जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद । मुझे लगा इस बार शायद कोई टिप्पणी प्राप्त ही नहीं होगी । संभवत: कोई तनाव की बात सोचना ही ना चाहता हो । तथापि आप नहीं चुके अत: पुन: धन्यवाद । पारीक

Urmil के द्वारा
12/04/2010

The Tension is really a big problem. But the remedy suggested is also very useful. I am agreed with Mr. Parik that excess of everything is bed.

    Arvind Pareek के द्वारा
    12/04/2010

    आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद ।


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