मन की बात सबके साथ Man ki baat sabke saath

भाईजीकहिन Bhaijikahin

37 Posts

840 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 1057 postid : 217

नव-प्रज्ञा – Valentine Contest

Posted On: 8 Feb, 2011 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

मैं हर सुबह

      शाम का इंतजार करता हूँ,

और हर शाम

अगली शाम का।

 

क्‍योंकि

      तुम्‍हारे अवगुंठित चेहरे की कहानी

      तभी प्रदीप्‍त होती है।

तुम्‍हारें जुड़े होंठों की कहानी

तभी गुंजित होती है।

      तुम्‍हारी बंद आँखों की कहानी

      तभी शोभित होती है।

 

और

      मैं

            चाहता हूँ,

कि तुम्‍हें गढ़ दूँ इसी रूप में,

किन्‍तु तुम

अनगढ़ ही अच्‍छी हो।

क्‍योंकि

      गढ़े जानें पर

      स्थिरता आ ही जाती है।

 

- अरविन्‍द पारीक 



Tags:           

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (10 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

32 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

KCNautiyal के द्वारा
16/02/2011

Dear Parikji Aapki kavita padi. Kavita mein bhi bahut achhi abhivyakti karte hein aap. Main to Vyastata ke karan kuch bhi nahin likh saka. Aapko to bataya hi tha . Likhte raho. Mera aashirwad hamesha aapke saath hai. KC Nautiyal

alkargupta1 के द्वारा
09/02/2011

श्री पारीक जी ,अभिवादन बहुत दिनों बाद आपकी कोई रचना पढी अति सुन्दर कृति ! कॉन्टेस्ट के लिए हार्दिक शुभकामनाएं !

    Arvind Pareek के द्वारा
    12/02/2011

    सुश्री अलका गुप्‍ता जी, घरेलु कार्यो तथा सामाजिक आवश्‍यकताओं के निर्वहन में ही इतना व्‍यस्‍त होना पड़ा कि इस मंच तक नहीं पहुँच पा रहा था। अभी भी समय निकाल पाना कठिन हो रहा है। ये तो आदरणीय खुराना जी का फोन से किया गया अनुरोध था कि कम से कम दो रचनाएं तो पोस्‍ट कर दीजिए। प्रतियोगिता में भाग तो लीजिए। फिर माननीय ओम प्रकाश पारीक जी ने भी फोन पर इसके लिए याद दिलाया तो लगा कि कुछ तो करना है बस जैसे तैसे यह प्रस्‍तुति दे पाया। लेकिन आपकी व अन्‍य साथियों की प्रशंसा ने उत्‍साह दुगुना कर दिया व कल ही एक दूसरी रचना भी प्रस्‍तुत की है। आपका आभारी हूँ । धन्‍यवाद। अरविन्‍द पारीक

HIMANSHU BHATT के द्वारा
09/02/2011

नमस्कार ARVIND JI……. सुंदर रचना….. प्रतियोगिता के लिए शुभ कामनाएं…..

    Arvind Pareek के द्वारा
    12/02/2011

    प्रिय श्री हरीश भट्ट जी, शुभकामनाओं के लिए आभार व रचना की प्रशंसा के लिए धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

nishamittal के द्वारा
09/02/2011

पारीक जी,प्रतियोगिता के लिए आपकी प्रथम प्रविष्ठी पढी बहुत पसंद आयी.विशेष रूप से अंतिम पंक्तियाँ.कभी कभी मुझे ईर्ष्या होती है इतनी अच्छी कविता लिखनी मुझे क्यों नहीं आती.बधाई.दूसरी रचना नियम के अनुसार कब आ रही है.आपकी दो प्रतिक्रियाएं मेरे लेखों पर एक स्थान पर थीं पर उत्तर मैं पृथक दे रही हूँ.

    nishamittal के द्वारा
    09/02/2011

    शुभकामनाएं देना भूल गयी,मेरी हार्दिक शुभकामनाएं.

    Arvind Pareek के द्वारा
    12/02/2011

    आदरणीय निशा मित्तल जी, इस प्रविष्‍टी को पसंद करने के लिए धन्‍यवाद। मेरे विचार से तो आपके लेख जिस तरह के आप लिखती है उनमें में भी एक कविता होती है। इस कारण मुझे लगता है आप कविताएं लिखती तो जरूर है लेकिन मन में अविश्‍वास के कारण उसे प्रकट नहीं करना चाहतीं। दूसरी रचना पोस्‍ट कर चुका हूँ। बस समयाभाव के कारण न तो समय पर प्रत्‍युतर दे पा रहा हूँ और ना ही अधिक टिप्‍पणियां लिख पा रहा हूँ। कारण बिना पढ़ें टिप्‍पणियां देनें की आदत नहीं हैं और पढ़नें में समय लगानें पर टिप्‍पणी का समय नहीं मिल पाता है। आप प्रतिक्रियाओं के उत्‍तर भी समय पर देती हैं। उसके लिए आपका आभारी हूँ। शुभकामनाओं के लिए धन्‍यवाद। बस इसी तरह उत्‍साह बढ़ाते रहिए। अरविन्‍द पारीक

Bhagwan Babu के द्वारा
08/02/2011

पारीक जी नमस्कार आपकी अंतिम लाईन बहुत मूल्यवान है बहुत-बहुत शुभकामनाएँ http://bhagwanbabu.jagranjunction.com/2011/02/07/%e0%a4%b8%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e2%80%93-valentine-contest/

    Arvind Pareek के द्वारा
    12/02/2011

    प्रिय श्री भगवान बाबु शुभकामनाओं के लिए आभारी हूँ। प्रशंसा के लिए धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
08/02/2011

खूबसूरत रचना पारिक जी…….. इस कॉन्टेस्ट के लिए हार्दिक शुभकामनाये ………….

    Arvind Pareek के द्वारा
    12/02/2011

    प्रिय श्री पियुष पंत जी, रचना को खूबसूरत बतानें का शुक्रिया धन्‍यवाद। अरविन्‍द पारीक

rajkamal के द्वारा
08/02/2011

आदरणीय श्री अरविन्द पारिक जी …सादर अभिवादन ! जब उनको पसंद किया था , ब्याह कर लाये थे , भरम तो तब भी था …… उस एक भूल को सुधारने के लिए क्या सारी जिंदगी शाम का ही इंतज़ार करते रह जायेंगे … ***************************************************************************************************************** आपको इस रूप में पहली बार देखा है , और आठो पहर इसी रूप में ही देखना चाहेंगे …. इतनी अच्छी रचना के लिए आभार सहित कांटेस्ट के लिए मंगलकामनाए

    Arvind Pareek के द्वारा
    11/02/2011

    प्रिय श्री राजकमल जी, परिवार की मर्यादाएं ही इंतजार करवाती है। ऐसा आप भी भोगेंगें और लिखेंगें। ************************ चलिए आपकों यह नया रूप पसंद आया तो सही। मैं इसके लिए आपको तहे दिल से धन्‍यवाद देता हूँ। रचना की प्रशंसा के लिए आभारी हूँ। मंगल- कामनाओं के लिए धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

आर.एन. शाही के द्वारा
08/02/2011

श्रद्धेय पारीक जी, आपकी इतनी सुन्दर काव्य रचना शायद पहली बार देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है । संत वेलेंटाइन होते तो वह भी दाद दिये बिना नहीं रह सकते थे । बधाई ।

    Arvind Pareek के द्वारा
    11/02/2011

    आदरणीय श्री शाही जी, मेरे लिए तो संत वेलेंटाइन आप ही हैं क्‍योंकि आप से दाद मिल ही गई है। बधाई के लिए धन्‍यवाद। अरविन्‍द पारीक

chaatak के द्वारा
08/02/2011

“तुम अनगढ़ ही अच्‍छी हो।” अनुपम अभिव्यक्ति ! इन पंक्तियों में कवि का सौंदर्यबोध और आत्म व् आत्मा का साक्षात्कार पूर्णतयः प्रकट हो रहा है| शुभकामनाएं एवं बधाईयाँ!

    Arvind Pareek के द्वारा
    11/02/2011

    प्रिय श्री चातक जी, आपसे प्राप्‍त इस प्रशंसा से लगा कि अब मुझे किसी और पुरस्‍कार की आवश्‍यकता ही नहीं हैं। आपकी प्रशंसा ही मेरे लिए सबसे बड़ा पुरस्‍कार है। आखिर आप कविता के पारखी जो हैं। शुभकामनाओं और बधाई के लिए धन्‍यवाद। अरविन्‍द पारीक

वाहिद काशीवासी के द्वारा
08/02/2011

सत्य कहा आपने प्राकृतिक अवस्था की सुंदरता कृत्रिमता में कहाँ प्राप्य है|

    Arvind Pareek के द्वारा
    11/02/2011

    प्रिय श्री वाहिद जी, सत्‍य वचन बंधु। धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

Aakash Tiwaari के द्वारा
08/02/2011

आदरणीय श्री पारीख जी, एक बात बिलकुल सही कही आपने की \"तुम अनगढ़ ही अच्‍छी हो\"। शुभकामनाओं सहित आकाश तिवारी http://aakashtiwaary.jagranjunction.com

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    10/02/2011

    प्रिय श्री आकाश तिवारी जी, कथ्‍य का समर्थन करने के लिए आभार व शुभकामनाओं के लिए धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

roshni के द्वारा
08/02/2011

परिक जी नमस्कार किन्‍तु तुम अनगढ़ ही अच्‍छी हो। क्‍योंकि गढ़े जानें पर स्थिरता आ ही जाती है अति सुंदर best wishes

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    10/02/2011

    सुश्री रोशनी जी, सराहना के लिए आभार शुभकामनाओं के लिए धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

NIKHIL PANDEY के द्वारा
08/02/2011

परिक जी प्रणाम …………….. भाई जी की कमी इस मंच पर तबसे ही थी जबसे कंटेस्ट शुरू हुआ था… मगर क्या शुभागमन हुआ है आपका .. आपने सारी कमी पूरी कर दी… स्वर्ण जडित ये पंक्तिया बना स्वर्ण श्रृंगार , जागरण की मंच को भाई जी का उपहार ……. और हमारी तरफ से शुभकामनाओ सहित आभार .. देर लगी आने में उनको शुक्र है फिर भी आये तो … बेहतरीन कविता

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    10/02/2011

    प्रिय श्री निखिल पांडेय जी, प्रशंसा के ये चार शब्‍द मन में लाते नई उमंग, बस इसी तरह उत्‍साह बढ़ाए और बना रहे संग । प्रशंसा इतनी अधिक लगने लगी है भार, इस मंच पर मुझसे कवि पा रहे सत्‍कार शुभकामनाएं आपकी सिर- माथे व्‍यक्‍त करता आभार बस इसी तरह बरसाते रहे सब आपकी तरह प्‍यार। धन्‍यवाद अरविन्‍द पारीक

R K KHURANA के द्वारा
08/02/2011

प्रिय अरविन्द जी , बहुत सुंदर उदगार ! कि तुम्‍हें गढ़ दूँ इसी रूप में, किन्‍तु तुम अनगढ़ ही अच्‍छी हो। बहुत सुंदर अभिवक्ति शुभकामनायों सहित खुराना

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    10/02/2011

    आदरणीय श्री खुराना जी, आपको मेरे उदगार सुंदर लगें, प्रशंसा के लिए आभारी हूँ, प्रतिक्रिया व शुभकामनाओं के लिए धन्‍यवाद । बस इसी तरह स्‍नेह बनाए रखिएगा। अरविन्‍द पारीक

abodhbaalak के द्वारा
08/02/2011

अति सुन्दर, अपने आप में अपनी पहचान… और वो है हमारे भाईजान… :) अरे मैंने तो कविता कह डाली :) कांटेस्ट के लिए मेरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    10/02/2011

    प्रिय श्री अबोध जी, काव्‍यात्‍मक प्रशंसा के लिए आभारी हूँ शुभकामनाओं के लिए धन्‍यवाद। बस इसी तरह प्‍यार बनाए रखें। अरविन्‍द पारीक

vinitashukla के द्वारा
08/02/2011

सुन्दर अभिव्यक्ति. अच्छी पोस्ट के लिए बधाई.

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    10/02/2011

    धन्‍यवाद विनिता जी। बस इसी तरह उत्‍साह बढ़ाती रहिए ।


topic of the week



अन्य ब्लॉग

  • No Posts Found

latest from jagran