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भाईजीकहिन Bhaijikahin

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अश्लील बिग बॉस-4 का श्लील चेहरा

Posted On: 30 Dec, 2010 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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भाईजी की आवाज मैं दूर से ही सुन रहा था । लग रहा था कि वो किसी से जोर जोर से बोल कर बतिया रहे हैं जबकि उनको न जानने वाले समझेंगें कि वे झगड़ रहे हैं। भीड़ उनके पास निरंतर बढ़ती ही जा रही है। मुझे लगता है कि अब हस्‍तक्षेप करना ही चाहिए। इसलिए चुपचाप अपने मोबाइल से भाईजी के मोबाइल का नंबर लगा देता हूँ। कान मैं आवाज गुँजती है ‘खोपड़ी के बेसमेंट में दिलों के स्‍टेटमेंट में ना प्रोफिट है ना लॉस…….’। मैं मोबाईल के स्‍क्रीन को घूरता हूँ, ‘कालिंग भाईजी’ ही लिखा नजर आ रहा है। लेकिन अचानक ‘ओSSS मंगल भवन अमंगल हारी…..’ के स्‍थान पर ‘खोपड़ी के बेसमेंट में दिलों के स्‍टेटमेंट में ना प्रोफिट है ना लॉस…….’ की कॉलर ट्यून। ये भाईजी को आखिर हुआ क्‍या है? अचानक इतना बड़ा परिवर्तन! ‘हेलो, पारीक जी, आप चले आइयें, मैं बुकस्‍टॉल के पास ही खड़ा हूँ । आप कहां है?’ भाईजी की भारी भरकम आवाज मेरी तन्‍द्रा भंग कर देती है।

 

‘जी भाईजी मैं…मैं…जूस वाले के पास हूँ, आप भी यहीं आ जाइयें।’ मैंनें जबाव दिया। ‘अरे तो मिमियाते काहे हैं, लीजिए अभी हाजिर होता हूँ।’ फोन कट जाता है। देखता हूँ भाईजी भीड़ से निकल कर मेरी ओर ही चले आ रहे हैं।

 

पास आते ही भाईजी शुरू हो जाते हैं, ‘यह बताइये आपने कभी कलर्स चैनल पर प्रसारित हो रहा बिग बॉस-4 धारावाहिक देखा है?’

 

‘मैं ऐसे फूहड़, बेसिरपैर के, अभद्र व अश्‍लील धारावाहिक नहीं देखता’। मैं प्रत्‍युत्तर देता हूँ।

 

‘अच्‍छा, तो आप भी उसी कैटेगरी के जीव है जिसके वो सज्‍जन थे, जिन्‍हें में अभी समझा रहा था।’

 

‘कौन-सी कैटेगरी?’ मैं झट पूछता हूँ। ‘अरे वही, मुँह में राम बगल में छूरी वाले’।

‘क्‍या?’ मैं समझ नहीं पाता हूँ। याद करने की कोशिश करता हूँ कि मैंनें ऐसा कौन-सा काम किया है जिससे भाईजी को कष्‍ट हुआ हो। लेकिन लाख कोशिश करनें के बाद भी कोई ऐसी बात याद नहीं आती।

 

‘अरे मेरे भाई, मेरा कहने का मतलब था कि आप कहते कुछ है और करते कुछ। अरे आपने यदि बिग बॉस नहीं देखा तो इसको इतने सुंदर विशेषण कैसे दे डाले।’ भाईजी ने पूछा।

 

‘मैंनें इस बारे में अखबारों में, ब्‍लॉग में, नेट पर सभी जगह पढ़ा या सुना है कि इस बार बिग बॉस फूहड़, बेसिरपैर का, अभद्र व अश्‍लील ज्‍यादा है।’

 

‘चलिए आप कहते हैं, तो मान लेता हूँ। लेकिन फिर भी यही कहूँगा कि आपको कलर्स चैनल पर प्रसारित हो रहा बिग बॉस-4 धारावाहिक देखना चाहिए। आप स्‍वयं समझ जाएंगें कि क्‍यों?’ समझ नहीं पा रहा हूँ कि भाईजी कलर्स चैनल का प्रचार कर रहे हैं या उस फूहड़ धारावाहिक का। क्‍या पता उन्‍हें यह नया धंधा मिल गया हो।

 

फिर भी प्रकट में यह कहता हूँ, ‘भाईजी यह आरोप लग रहे हैं कि कलर्स चैनल पर प्रसारित हो रहा बिग बॉस-4 धारावाहिक अश्‍लीलता की रियल्‍टी का निरंतर प्रसारण कर रहा है। उस घर में कैद प्रत्‍येक शख्‍स स्‍वयं को जितना अश्‍लील अथवा फूहड़ बना सकता है व दिखा सकता है, दिखा रहा है। वहां कैद शख्‍सयितें अब वे हस्‍ती नहीं हैं बल्कि आम व्‍यक्ति हैं।’

 

‘भई वाह बिना देखे इतना सटीक वर्णन। लगता है आप छुप-छुप कर इस सीरियल को देखते हैं। खैर मैं तो केवल इस सीरियल की तारीफ जिस कारण से कर रहा था वह है इस अश्‍लील सीरियल का श्‍लील चेहरा – सीमा परिहार।’ भाईजी ने कहा।

 

‘कौन, वो चंबल की डकैत? श्‍लील चेहरा! कैसे?’ मैनें पूछा।

 

‘अरे मेरे भाई इतने सारे गाली-गलौच करने वालों के बीच केवल एक वही हैं जो किसी को ना तो गाली देती हैं और ना ही असभ्‍य तरीके से बात करती हैं। उन्‍हें पश्‍चाताप हैं कि वे चंबल की घाटियों में रही। लेकिन गर्व है कि वे आज भी इन शहरी लोगों से सभ्‍य हैं। यदि आप यह सीरियल देखते तो पाते कि केवल एक यही चेहरा हैं जो कुछेक अच्‍छी आदतों को तेजी से अपना रहा है। लेकिन असभ्‍य, अश्‍लील व फूहड़ आचरण को अंगुठा दिखा रहा है। जबकि वे चाहे तो अनपढ़, गँवार होने का तमगा लगा होने के कारण सहज रूप से गाली-गलौच व असभ्‍यता और अश्‍लीलता का आचरण कर सकती है।’

 

‘अच्‍छा तो आप बिग-बॉस के नहीं सीमा परिहार के फैन हो गए हैं।’ मैंनें भाईजी को टोका।

 

‘आप मुझे फैन कहिए या एयरकंडीशनर, मैं तो उनके व्‍यवहार का कायल हो गया हूँ। मुझे तो लगता है कि शहरी और ज्‍यादा पढ़ी-लिखी शख्‍सयितें ही कहीं अधिक असभ्‍य, अश्‍लील व फूहड़ हो गई हैं या अपनी फैन-फालोइंग बढ़ानें के लिए बनती जा रही हैं।’

 

मैं भाईजी को फिर टोक देता हूँ, ‘अर्थात आप कहना चाहते हैं कि आम् आदमी बड़ी-बड़ी शख्‍सयितों को असभ्‍यता, अश्‍लीलता व फूहड़ता करते हुए देखना चाहता हैं अथवा उसकी पसंद ही अब यह रह गई हैं।’

 

‘आप जैसा चाहे वैसा समझ सकते हैं…..’ कहते-कहते भाईजी एक बार फिर वहां से खिसक लिए, कुछ नए प्रश्‍न छोड़कर।

 

आखिर क्‍यों? सार्वजनिक रूप से अथवा रियल्‍टी प्रोग्राम के नाम से कुछेक लोग अपना स्‍तर, अपना व्‍यवहार इतना अधिक गिरा क्‍यों देते हैं? क्‍या पैसे के लिए व्‍यक्ति वह सब कर सकता हैं जो वह किसी भी अन्‍य सूरत में नहीं करेगा? अथवा क्‍या बाहरी दुनिया से संपर्क कट जानें पर व्‍यक्ति का व्‍यवहार बदल जाता है? मनुष्‍य सामाजिक प्राणी है, तो क्‍या बिग-बॉस का सीमित लोगों का समाज उसे ऐसा करने के लिए प्रेरित करता है?

 

आशा है इन प्रश्‍नों के उत्तर आप अवश्‍य देंगें।

- अरविन्‍द पारीक



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39 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

JLSINGH के द्वारा
11/04/2011

भाई जी (अरविन्द जी), इस सीरियल मे बेचारा मनोज तिवारी बेआबरू होकर निकला और निकलने के बाद उसे माफी भी मॉगनी पड़ी. श्वेता तिवारी ने उसे खूब उल्लू बनाया. इस तरह के सीरियल बनाने वाले ही उसका उद्देश्य जानते हैं.

Ajay Tyagi के द्वारा
24/01/2011

Dear Arvind Pareek I always find your writes as thought provoking. In today’s world there is someone who wish to upkeep out ancient culture. Keep it up.

omprakash pareek के द्वारा
13/01/2011

भाईजी ( नहीं! अरविन्दजी ) बिग बॉस की जो सर्जरी आपने की वो वाकई काबिले तारीफ है. एक समय मैं भी देखता था और मैंने पत्नी के पूछने पर कहा क़ि सीमा परिहार जीतेगी क्योंकि वो ही इन में सबसे ज्यादा सभ्य है. आखिरकार श्वेता तिवारी जीतीं यह इस बात को दर्शाता है क़ि सहरी दर्शक आधुनिक अंग्रेजी में गाली देने वाली या एस. एम्. एस. करती, कान में इअरफोन ठूंसे बतियाने वाली बालाओं को पसंद करते हैं यह एक जनरल कमेन्ट है स्वेताजी के लिए नहीं सो गलत न समझे. पर बिग बॉस ४ का असली उद्देश्य क्या था मेरी समझ में नहीं आया. यह सिर्फ खेल था या मनोरंजन था या कुछ और ये बात तो सिर्फ भाईजी ही बता सकते हैं. keep up oppareek43

abodhbaalak के द्वारा
01/01/2011

अरविन्द जी मैंने इस सीरियल को देखा तो नहीं लेकिन अगर सच में सीमा परिहार, इन सारी पढले लिखे (?) लोगों की बीच अपनी शालीनता (?) को बचा कर रख रही हैं तो फिर वो ही इस सीरियल की हेरोइने हुई भाई जी आपनी बात को बड़े ही शक्तिशाली ढंग से रखते हैं. ध्यान से पढना पड़ता है उन्हें http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    03/01/2011

    प्रिय श्री अबोध जी, इस धारावाहिक को मैं भी नहीं देखता। लेकिन भाईजी से बातचीत कर काफी कुछ समझ पाया हूँ। भाईजी की प्रशंसा के लिए आभारी हूँ। भाईजी की नजरों में तो सीमा परिहार ही इस धारावाहिक की विजेता है। प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद।

Ramesh bajpai के द्वारा
31/12/2010

आदरणीय श्री अरविन्द जी नव वर्ष की हार्दिक मंगल कामनाये | प्रभु श्री कृष्ण सब मंगल करे , बधाई

    kmmishra के द्वारा
    31/12/2010

    अरविंद जी नया साल आ रहा है, मेरी तरफ से ढेरों शुभकामनाएं स्वीकार करें । आपकी टीआरपी में लगतार वृद्धि होती रहे और आप इसी तरह हम सब के प्रिय बने रहें । वैसे चंबल में रहने वाली सीमा परिहार बिगबॉस में जाकर आधुनिक समाज का यह चेहरा देख कर हतप्रभ होंगी और सोचती होंगी कि इनसे भले तो चंबल के डाकू ही थे । कम से कम वो पीठ में छूरा तो नहीं भोंकते थे । उस बिचारी का आत्मा पर इस कुसंग का बहुत बुरा प्रभाव पड़ा होगा ।

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    31/12/2010

    आदरणीय श्री वाजपेई जी, मंगल कामनाओं के लिए आभारी हूँ। आपका धन्‍यवाद। नव वर्ष अपने आगमन् के साथ आपके जीवन में खुशियों की बहार लाएं और सम्‍पूर्ण वर्ष आप व आपके परिवार के लिए मंगलकारी हो। यही कामना है। अरविन्‍द पारीक

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    31/12/2010

    प्रिय श्री मिश्र जी, आपने सही कहा कि इनसे भले तो चंबल के डाकू थे। जिनके कुछ उसुल तो थे। जहां तक इस कुसंग के प्रभाव की बात है इसके लिए सीमा परिहार जी से मुलाकात करनी होगी। सोचता हूँ भाईजी को ही मिलने के लिए उकसाऊँ। क्‍योंकि उनका डील-डौल ऐसा है कि किसी तरह का डर नहीं हैं। शुभकामनाओं के लिए धन्‍यवाद। नव वर्ष अपने आगमन् के साथ आपके जीवन में खुशियों की बहार लाएं और सम्‍पूर्ण वर्ष आप व आपके परिवार के लिए मंगलकारी हो। अरविन्‍द पारीक

Amit Dehati के द्वारा
31/12/2010

मैंने भी एक दिन लिख डाला राखी का इन्शाफ़ तो राजकमल जी को बुरा लगा था. वैसे बहुत ही बढ़िया और अच्छा विषय ! हार्दिक बधाई ! http://amitdehati.jagranjunction.com

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    31/12/2010

    प्रिय श्री अमित देहाती जी, बधाई व विषय की प्रशंसा के लिए आभारी हूँ । प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद । नव वर्ष की शुभकामनाएं । आगामी वर्ष अपने आगमन् के साथ आपके जीवन में खुशियों की बहार लाएं और सम्‍पूर्ण वर्ष आप व आपके परिवार के लिए मंगलकारी हो। अरविन्‍द पारीक

Syeds के द्वारा
31/12/2010

अरविन्द जी , अच्छा लेख, वास्तव में इस तरह के प्रोग्राम रुपी ज़हर को समाज में डाला जा रहा है…आज के सिनेमा,धारावाहिक अश्लीलता की हदें पार कर रहे हैं… हमारी ज़िम्मेदारी है की ऐसे प्रोग्राम जो टी आर पी के लिए ऐसी हरकतें करते हैं उन्हें न देखें.. http://syeds.jagranjunction.com

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    31/12/2010

    प्रिय सैय्यद भाई, लेख की प्रशंसा के लिए आभारी हूँ। टीवी पर जो भी गलत हो रहा है उसकी जिम्‍मेदारी केवल और केवल दर्शकों व उस चैनल की है जो यह परोस रहा है। इसलिए इन्‍हें ही रोक लगानी होगी। मैं आपकी इस बात से सहमत हूँ। प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद। नव वर्ष की शुभकामनाएं । आगामी वर्ष अपने आगमन् के साथ आपके जीवन में खुशियों की बहार लाएं और सम्‍पूर्ण वर्ष आप व आपके परिवार के लिए मंगलकारी हो। अरविन्‍द पारीक अरविन्‍द पारीक

    Ajay Tyagi के द्वारा
    24/01/2011

    Civilization is a mask people wear on their face but indeed we are all brutes and our brute feelings surfaces whenever they get a chance. We should welcome change that is coming in cultural standards of our present society as it came in the western countries. But sooner we will recognise that our older culture was better than the present one. So do not be disheartened, things will settle in right direction

Dr. M. S. Prasad के द्वारा
30/12/2010

अरविन्द जी, आपकी आपबीती प्रासंगिक है और मैं सहमत हूँ कि यह सब टी. आर. पी. का खेल है। बिग बास को छोड़िए, क्या कोई भी सिरियल देखने लायक है? मेरे प्रश्न पर विचार किजीए। मैंने जब भी कोई सिरीयल देखा, एक ही चीज दिखायी दी जो सभी सिरीयल में आम है। भयंकर म्यूज़िक के साथ कैमरे का बार-बार अभिनेता/ अभिनेत्री के चेहरे पर जूम इन और जूम आउट होना। इसी जूम आउट और इन को देखने के लिए सब सिरीयल देखने की क्या आवश्यकता है? फिर भी आप बधाई के पात्र हैं। मेरी तरफ से नव-वर्ष की शुभ-कामना के साथ। डा. एम. एस. प्रसाद्

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    31/12/2010

    आदरणीय डा. एम.एस. प्रसाद जी, आपने सही कहा चैनलों पर अधिकांश सीरियल ऐसे ही आते हैं। लेकिन कौन बनेगा करोड़पति जैसे कुछेगा सीरियल ऐसे है जो इनका अपवाद है। बधाई के लिए आभारी हूँ। आपको भी इस मंच पर देखनें की अपेक्षा थी। तो फिर कब आ रहे हैं आप। नव वर्ष की शुभकामनाएं । आगामी वर्ष अपने आगमन् के साथ आपके जीवन में खुशियों की बहार लाएं और सम्‍पूर्ण वर्ष आप व आपके परिवार के लिए मंगलकारी हो। अरविन्‍द पारीक

R K KHURANA के द्वारा
30/12/2010

प्रिय अरविन्द जी, आजकल के टी वी प्रोग्राम केवल अपने टी आर पी के लिए ही कार्यक्रम देते हैं ! बाप बड़ा न भैया सबसे बड़ा रूपया ! इसके लिए चाहे मुन्नी को बदनाम करना पड़े या शीला की जवानी की प्रदर्शनी लगनी पड़े ! वे सब कुछ करने के लिए तैयार है ! अच्छा लेख राम कृष्ण खुराना

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    31/12/2010

    आदरणीय श्री खुराना जी, लेख की सराहना के लिए आभारी हूँ। प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद। वास्‍तव में रूपया ही सबको नचा रहा है। नव वर्ष की शुभकामनाएं । आगामी वर्ष अपने आगमन् के साथ आपके जीवन में खुशियों की बहार लाएं और सम्‍पूर्ण वर्ष आप व आपके परिवार के लिए मंगलकारी हो। अरविन्‍द पारीक

div81 के द्वारा
30/12/2010

उसका उतना नाम हुआ है जो जितना बदनाम हुआ है | सब टी.आर.पी का खेल है |

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    31/12/2010

    प्रिय श्री राजकमल जी, आपने बिलकुल सही कहा है टीआरपी जो नाच नचाए वो क्‍यों ना नाचे लोग। बदनाम में ही तो नाम रखा है। नव वर्ष की शुभकामनाएं । आगामी वर्ष अपने आगमन् के साथ आपके जीवन में खुशियों की बहार लाएं और सम्‍पूर्ण वर्ष आप व आपके परिवार के लिए मंगलकारी हो। अरविन्‍द पारीक

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    31/12/2010

    सुश्री दिव्‍या जी, क्षमा चाहता हूँ राजकमल जी और आपके नाम को टिप्‍पणी में ऊपर नीचे कर बैठा। राजकमल जी के टिप्‍पणी के जबाव में आपको सम्‍बोधित टिप्‍पणी और आपके जबाव में राजकमल जी को सम्‍बोधित टिप्‍पणी। लेकिन जबाव सही हैं। इसलिए सुधार कर पढ़ें। अरविन्‍द पारीक

rajkamal के द्वारा
30/12/2010

sir जी …. नमसकार + सादर अभिवादन ! जल में रह कर मगर से बैर लेने की किसकी मजाल हो सकती है …. वहां पर तो जो बिग बास चाहेंगे , वोही होगा …. शो की गिरती टी.आर.पी. कों बढ़ाने के लिए यह सब हथकण्डे अपनाए जाते है … अब यहाँ पर ही देख लीजिए …. यहाँ पर हम कों क्या मिल रहा है …झुनझुना … फिर भी लोगबाग कैसे चमचागिरी किया करते है …. और वहां पर तो भारीभरकम राशि मिलती है … अगर आप और हम भी वहां पर होते तो मुहं में मोटी सारी हड्डी डाल कर चूसते रहते और कठपुतली की तरह नाच नाचते रहते …. धन्यवाद

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    31/12/2010

    सुश्री दिव्‍या जी, प्रतिक्रिया के लिए आभार। यहां पर हम कों क्या मिल रहा है …झुनझुना …। आपकी बात से ऐसा लगता है कि आप कुछ मिलनें की उम्‍मीद में यहां आई हैं। क्‍या आपको नहीं लगता कि आपको अभिव्‍यक्ति के लिए इतना बड़ा मंच मिल गया है। भले ही …झुनझुना …मिलें। खैर इसे छोडि़यें बाकी बात आपनें सही लिखी है पैसा देखकर तो अच्‍छे अच्‍छे लोग नाच उठते हैं इन छूटभैये सेलिब्रिटियों की बात ही क्‍या है। लेकिन क्‍या आपको नहीं लगता कि अनपढ़ गंवार व डकैत सीमा परिहार जिसे सबसे ज्‍यादा पब्लिसिटी की जरूरत थी वहां क्‍यों नहीं बदली या कहें कि वह भी बदल गई हैं। नव वर्ष की शुभकामनाएं । आगामी वर्ष अपने आगमन् के साथ आपके जीवन में खुशियों की बहार लाएं और सम्‍पूर्ण वर्ष आप व आपके परिवार के लिए मंगलकारी हो। अरविन्‍द पारीक

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    31/12/2010

    प्रिय राजकमल जी, इसे कहते है आपका असर। देखिये कितनी बड़ी गलती की है। जबाव आपको आपकी बात का लेकिन नाम लिख दिया सुश्री दिव्‍या। तो बस इतना कीजिएगा की सुश्री दिव्‍या के स्‍थान पर प्रिय राजकमल जी पढ़ लीजिएगा। शेष सब आपके लिए ही है। अरविन्‍द पारीक

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
30/12/2010

यहाँ लोग समझ चुके हैं की शीला ओर मुन्नी बदनाम होकर रातों रात स्टार बन जाती हैं……….. लोग नाम की जगह बदनाम होने को ही तैयार हैं……………. बढ़िया लेख ………….. बधाई…..

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    31/12/2010

    प्रिय पियुष पंत जी, आज सोच ही यह रह गई है कि बदनाम हुए तो क्‍या नाम तो होगा। यह सोच सभी को असभ्‍य बना रही है। नव वर्ष की शुभकामनाएं । आगामी वर्ष अपने आगमन् के साथ आपके जीवन में खुशियों की बहार लाएं और सम्‍पूर्ण वर्ष आप व आपके परिवार के लिए मंगलकारी हो। अरविन्‍द पारीक

ashutoshda के द्वारा
30/12/2010

पारीक जी नमस्कार पारीक जी मुझे लगता है की इन सबको चम्बल में छोड़ आना चहिये थोड़े दिन बाद ये भी सभ्य होना सीख जायेगे जब इन्हें पता चलेगा की सभ्यता की हमारे समाज में क्या अहमियत है खाने पीने के साथ साथ सभ्य होना भी हमारे जीवन में जरूरी है आशुतोष दा

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    31/12/2010

    प्रिय आशुतोष दा, वास्‍तव में इन लोगों के सुधार के लिए चंबल से बेहतर जगह कोई और हो भी नहीं सकती। आपनें सही कहा। क्‍या पता सीमा परिहार जी की तरह सभ्‍य हो जाएं। प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ। धन्‍यवाद। नव वर्ष की शुभकामनाएं । आगामी वर्ष अपने आगमन् के साथ आपके जीवन में खुशियों की बहार लाएं और सम्‍पूर्ण वर्ष आप व आपके परिवार के लिए मंगलकारी हो। अरविन्‍द पारीक

आर.एन. शाही के द्वारा
30/12/2010

श्रद्धेय पारीक जी, क्षमा करेंगे, मैं वास्तव में ऐसे सीरियलों को नहीं देख पाता, क्योंकि दो-चार मिनट बाद ही मुझे नक़ली रीयलिटी से ऊब और वितृष्णा होने लगती है । अब क्या कमेंट दूं? इनपर चर्चा से भी कोफ़्त होती है । मुझे लगता है मीडिया द्वारा इन चैनलों पर उठाए गए न्यायालयों के कदमों का ज़ोर-शोर से प्रचार भी टीआरपी का ही खेल होता है । साधुवाद ।

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    31/12/2010

    आदरणीय शाही जी, चलिए कोई तो मिला मेरे जैसा। सीरियल तो मैं भी नहीं देख पाता लेकिन मेरे आस-पड़ोस के भाईजी जब इस सीरियल और सीमा परिहार के बारे में बोलनें लगे तो लगा कि इस पर कुछ लिखना चाहिए। चर्चा के बाद ही यह लेख परोस पाया हूँ। इस लेख को तैयार भी आज से लगभग एक महीना पूर्व ही कर चुका था लेकिन कुछेक व्‍यस्‍तताओं के कारण ही इसे अब पोस्‍ट कर पाया। वैसे आपकी बात उचित ही लगती है। टीआरपी ही सब काम करवाती है। सैकड़ों की भीड़ में अपनी पहचान बनानें का यह खेल कुछ भी करवा सकता है। आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ। नव वर्ष की शुभकामनाएं । आगामी वर्ष अपने आगमन् के साथ आपके जीवन में खुशियों की बहार लाएं और सम्‍पूर्ण वर्ष आप व आपके परिवार के लिए मंगलकारी हो। अरविन्‍द पारीक

वाहिद के द्वारा
30/12/2010

सर जी| सत्य वचन|सीमा परिहार की तारीफ़ बेवजह नहीं| तथाकथित सभ्य समाज के चेहरे से नकाब तो ख़ुद ही उतर गया है मगर उस कीचड़ के बीच सीमा की उपस्थिति कमल जैसी है|टेलिविज़न के परिदृश्य पर हावी बाज़ारवाद और टीआरपी की सनक समाज का अत्यधिक ह्रास कर रही है| आपको कोटिशः साधुवाद| वाहिद

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    31/12/2010

    प्रिय श्री वाहिद जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया। आपनें बहुत ठीक लिखा है। बाजारवाद और टीआरपी की सनक का परिणाम ही है कि सभी सीरियल्‍स का बेड़ा गर्क हो रहा है। नव वर्ष की शुभकामनाएं । आगामी वर्ष अपने आगमन् के साथ आपके जीवन में खुशियों की बहार लाएं और सम्‍पूर्ण वर्ष आप व आपके परिवार के लिए मंगलकारी हो। अरविन्‍द पारीक

Aakash Tiwaari के द्वारा
30/12/2010

श्री अरविन्द जी, अगर समाज में कुछ गलत हो रहा है तो ये जिम्मेदारी हमारे सामजिक कार्यकर्ताओं,सरकार,न्यायपालिका की है की वो इस गंदगी को कैसे खत्म करते हैं…. मगर जहाँ लोग पैसे के लिए अपना सबकुछ बेच रहे हो वहा कुछ भी उम्मीद करना बेमानी होगी…. आकाश तिवारी

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    31/12/2010

    प्रिय आकाश तिवारी जी, टीवी पर यदि कुछ गलत हो रहा है तो यह जिम्‍मेदारी केवल और केवल दर्शकों व उस चैनल की है जो यह परोस रहा है। सरकार व न्‍यायपालिका तो तब सक्रिय होती है जब दर्शकों की प्रतिक्रिया आती है। प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद। अरविन्‍द पारीक

Rashid के द्वारा
30/12/2010

अरविन्द भाई ,, मेरे अनुसार बिग बॉस , राखी का स्वयंवर और उस जैसे प्रोग्राम भारत पर सांस्कृतिक आक्रमण के सामान है यह सब पश्चिम देशो से होते हुए और हमारे देश में आये है और हमारी संस्कृति को भ्रष्ट कर रहे है ! कुछ दिनों पहले मैंने एक सेमिनार में एक व्याख्यान सुना था जिसमे था की विदेशी पहले टीवी और समाचार के माध्यम से समाज को दिमाग़ी तौर पर तैयार करते है, शुरू में तो इसका विरोध होता है फिर धीरे धीरे यह नारी स्वतंत्रा और अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर समाज के अपनी जगह बना लेते है ! बिग बॉस , राखी का स्वयंवर इसके सटीक उदाहरण है !! राशिद http://rashid.jagranjunction.com

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    31/12/2010

    प्रिय राशिद भाई, आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ। यह सांस्कृतिक हमला तो है ही लेकिन यदि स्क्रिप्‍ट लिख कर रियल्‍टी प्रोग्राम बनाए जाते हैं तो फिर ये रियल्‍टी कहां से हुए। दूसरे स्‍वयं को सेलिब्रिटी समझने वाले लोगों का व्‍यवहार क्‍या वास्‍तविक जिंदगी में भी यही रहता है। तीसरी बात विदेशों से अनेक प्रोग्राम आयातित किए गए हैं लेकिन उनका भारतीयकरण भी हुआ है तो क्‍या इस कार्यक्रम का यही भारतीयकरण है। मुझे तो ऐसा लगता है कि यह सब पैसे का खेल है और कुछ नहीं जैसे कुछ अभिनेत्रियां पैसे के लिए कपड़े उतारनें को तैयार रहती है वैसे ही कुछ लोग पैसे के लिए नीच से नीच हरकत को तैयार हो जाते हैं। अरविन्‍द पारीक

renu के द्वारा
30/12/2010

बिलकुल सटीक है वर्णन आपका. मैंनें भी इस बारे में अखबारों में, नेट पर, टीवी चंनेल्स पर, सभी जगह पढ़ा या सुना है कि इस बार बिग बॉस अभद्र व अश्‍लील ज्‍यादा है। कुछ आम आदमियों को सेलेब्रिटी बना कर टीवी पर वाकई सेलेब्रिटी बनानये का प्रोग्राम है. बच्चो पर इसका कितना बुरा प्रभाव पड़ेगा किसी की कोई जिमेदारी नहीं है. समाज को क्या प्रेरना देना चाहते है….. इनको सिर्फ TRP से मतलब है और किसी से नहीं…

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    30/12/2010

    सुश्री रेणु जी, वास्‍तव में आज के टीवी प्रोग्राम टीआरपी के चक्‍कर में बेसिरपैर के हो गए हैं। समाज को प्रेरणा देने के नाम पर इन कार्यक्रमों में अभद्रता, असभ्‍यता व अश्‍लीलता ही है। प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ। बहुत बहुत धन्‍यवाद। अरविन्‍द पारीक


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