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भाईजीकहिन Bhaijikahin

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डेंचिकुस्वामलेटा वायरल बुखार

Posted On: 9 Nov, 2010 Others में

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‘भाईजी क्‍या बात है, कहां गायब थे? और यूँ लंगड़ा कर क्‍यों चल रहे हैं?’ मैंनें भाईजी से मिलते ही सवालों की झड़ी लगा दी । ‘कहीं चिकनगुनिया का शिकार तो नहीं हो गए थे? या किसी दुर्घटना का शिकार? अरे भाई कुछ तो बोलिए, क्‍या जबान पर भी ताला लगा कर आए हैं?’ भाईजी ने कुछ इस तरह मेरी ओर देखा, मानों कह रहे हों और कुछ? मैं भाईजी से लगातार प्रश्‍न पूछते-पूछते भूल गया था कि जब तक मैं चुप नहीं होता तब तक वे जबाव कैसे देंगें? मैंनें भी इशारों ही इशारों में उन्‍हें कहा, जी अब कुछ नहीं, कहिए?

 

‘क्‍या बताऊँ पारीक जी, एक दिन अचानक तेज बुखार चढ़ा, ऐसे जैसे किसी ने हीटर को बिजली से कनेक्‍ट कर ऑन कर दिया हो, शरीर दर्द करने लगा, प्रत्‍येक जोड़ इस तरह अकड़ रहा था कि चलना-फिरना कठिन हो गया, सिर दर्द व पेट दर्द साथ में सौगात में आ धमके, जबकि मैंनें इसकी मांग भी ना की थी । बुखार सौ से नीचे ही नहीं जाता था । जब चढ़ता था तो साथ में ठंड भी बहुत लगती थी । एक दिन के इंतजार के बाद डॉक्‍टर की शरण में जाना ही था । डॉक्‍टर साहब ने केवल बुखार की दवा लेने के लिए कहा और साथ ही तीन-चार टेस्‍ट लिख दिए । रिपोर्ट आई तो सब ठीक था, लेकिन मैं अभी भी बुखार से पीडि़त था । साथ ही सौगात में मिले दर्दो को भी झेल रहा था । डॉक्‍टर साहब ने कहा वायरल है, चार-पॉंच दिन तो लगाएगा ही । मरता क्‍या ना करता, दवा और पानी की पट्टी से काम चलाता रहा । डॉक्‍टर साहब की बात सच हो गई, बुखार पॉंचवें दिन उतर गया लेकिन सातवें दिन सारे शरीर पर लाल निशान आ गए । अब तो जान साँसत में थी । लगा, डेंगु ने दबोच लिया है । फिर दौड़ा डॉक्‍टर साहब की शरण में । डॉक्‍टर साहब ने फिर टेस्‍ट लिख दिए । रिपोर्ट फिर नार्मल । बस अब तो चिकनगुनिया, स्‍वाईन फ्लु, मलेरिया, टाइफाईड सभी की जांच करवा ली । सब नार्मल । लेकिन दर्द अपनी जगह पर कायम था । हॉं, इस दौड़-भाग में दस-ग्‍यारह दिनों में वे लाल निशान अवश्‍य गायब हो गए थे लेकिन सौगात में जी का मिचलाना और वमन् दे गए । अस्‍पताल जाना पड़ा सो अलग । लेकिन उसी दिन वहां से भी विदा कर दिया गया । अपने से ज्‍यादा बीमारों को देखकर तो मैं वैसे ही ठीक हो गया था । बस करते-कराते एक माह के बाद अब केवल दर्द से लड़ रहा हूँ और रोजाना सोचता हूँ कि यदि सारी रिपोर्ट नार्मल थी तो मुझे आखिर हुआ क्‍या था? शरीर में दर्द व सूजन किस कारण हैं?’

 

भाईजी के प्रश्‍न सुनते ही मैंनें झट उन्‍हें टोक दिया । ‘तो फिर आपनें किसी वैद्य को या हकीम को क्‍यों नहीं दिखाया?’

 

‘अरे, मेरे भाई मैं बुखार उतरनें पर इनकी शरण में भी गया था, लेकिन यहां भी वही ढाक के तीन पात थे – अरिष्‍ट, गरिष्‍ट, क्‍वाथ और चूर्ण ना जानें क्‍या-क्‍या खाना पड़ा । लेकिन बीमारी फिर भी पता न चल पाई ।’ 

 

‘अरे तो आप भी उस नई बीमारी के शिकार हुए हैं – डेंचिकुस्‍वामलेटा वायरल बुखार ।’

 

‘ये कौन-सी बीमारी है, मैंनें तो इसका नाम कभी नहीं सुना?’ भाईजी ने आश्‍चर्य से पूछा ।

 

‘अरे भाईजी, आप इसका नाम कहॉं से सुनतें ये तो मेरी दस वर्षीय बेटी की खोज है । जिसे जब बुखार हुआ और आपकी तरह ही टेस्‍ट में सब नार्मल था तो उसने कहा कि जब मेरे सभी बीमारियों के टेस्‍ट नार्मल आए हैं, डॉक्‍टर साहब भी लक्षणों के आधार पर बीमारी के बारें में स्‍पष्‍ट नहीं बता पाएं हैं तो ऐसे मैं जान लीजिए की किसी ऐसे एडीज मच्‍छर ने मुझे काटा है जिसनें किसी मलेरिया रोगी का खुन पीने के बाद, टाईफाईड के रोगी का भोग लगाया था और आते-आते जानवरों के बाड़ें में भी घूम आया था और इस बदलते मौसम में एक इंजेक्‍शन में मुझे सभी का शिकार बना गया – डेंगू, चिकनगुनिया, स्‍वाइन फ्लु, मलेरिया, टाईफाईड और वायरल हो गया ना डेंचिकुस्‍वामलेटा वायरल ।’ 

 

‘वाह भई वाह । क्‍या दूर की कौड़ी लाए हैं आप – डेंचिकुस्‍वामलेटा वायरल?’ भाईजी ठठाहकर हँस पड़ें ।

 

और मैं सोचनें लगा कि कहीं वास्‍तव में यही सच तो नहीं कि कोई एडीज मच्‍छर …… । अन्‍यथा क्‍या कोई टेस्‍ट किसी बीमारी की ओर इशारा भी नहीं करता? क्‍या डॉक्‍टर हो या वैद्य या फिर हकीम साहब, बीमारी को पहचान नहीं पातें? लगता हैं पुरे विश्‍व में आधुनिकीकरण के बढ़तें कदमों ने भी बिमारियों को नए-नए रूप-रंग में ढाल दिया है । तो क्‍या हमें अपने रहन-सहन व खान-पान पर एक नजर डालनें की जरूरत हैं? या कहीं आजकल के डॉक्‍टर, वैद्य या फिर हकीम साहब सभी रोग को लक्षणों से कम और परीक्षणों से ज्‍यादा पहचाननें लगे हैं? आप ही बताइयें क्‍या कारण है कि रोग पहचाना ही नहीं जाता – पढ़ाई की कमी या पढ़नें में कमी, या कोई और कारण है ?

 

- अरविन्‍द पारीक



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26 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Mohammad.Khalid.Khan के द्वारा
12/11/2010

पारीक जी, मज़ा आ गया बहुत खूब लिखा है जनाब.

    Arvind Pareek के द्वारा
    13/11/2010

    प्रिय श्री मोहम्‍मद खालिद खान जी, आपकों मजा आया जानकार लगा कि लिखनें की मेहनत सफल हो गई हैं । आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार व शुक्रिया । अरविन्‍द पारीक

bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
12/11/2010

प्रिय श्री चातक जी, सादर नमस्‍कार, आज परिस्थिति ऐसी हो गई हैं कि उचित इलाज देने वालों की तलाश करना कठिन हो गया है ऊपर से शंका का कीड़ा सभी को एक ही तराजु में तौलनें को मजबूर कर देता है। आपकी सलाह उचित है अब अपनी ही कुण्डलिनी को जागृत रख कर व्‍याधियों से मुक्ति पानी होगी । प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत-बहुत आभारी हूँ । धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

chaatak के द्वारा
12/11/2010

स्नेही श्री अरविन्द जी सादर अभिवादन, आपकी पोस्ट पढ़कर मुझे हाल में ही हुए ज्वर का ज्वार फिर से याद आ गया, अच्छा हुआ जो आपने बिटिया का दिया नाम भी लिख दिया है नाम पढ़ते ही शरीर की सारी प्रतिरोधक क्षमता जाग्रत हो गई है क्योंकि डाक्टरों की पढ़ाई और वैद्यों के ज्ञान का रिस्क उठाने से अच्छा है अपनी ही कुण्डलिनी को जागृत रख कर मानसिक व् शारीरिक बीमारियों को दूर रखने की कोशिश की जाए| नए किस्म के ज्वर और उनके प्रति चिकित्सकों की अज्ञानता की जानकारी देने के लिए आपको धन्यवाद!

    Arvind Pareek के द्वारा
    13/11/2010

    प्रिय श्री चातक जी, सादर नमस्‍कार,  तकनीकी ने चमत्‍कार दिखा दिया है । रिप्‍लाई बटन पर क्लिक करने के बावजूद उत्तर ऊपर चला गया है । अरविन्‍द पारीक

priyasingh के द्वारा
09/11/2010

शीर्षक पढ़ कर मुझे यही लगा की ये किसी नयी बीमारी के बारे में जानकारी है …………. सही नाम दिया है आपकी बेटी ने …..बहुत अच्छा लेख……..

    Arvind Pareek के द्वारा
    10/11/2010

    सुश्री प्रिया सिंह जी, जानकारी तो नई बीमारी के बारे में ही है तभी तो बीमार इलाज के बाद भी स्‍वस्‍थ नहीं हो पा रहे हैं। ….. बीमारी के नाम की तारीफ का शुक्रिया ………….. लेख की प्रशंसा के लिए आभार । प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद । कृपया इसी तरह उत्‍साह बढ़ाते रहें । अरविन्‍द पारीक

kmmishra के द्वारा
09/11/2010

डेंगू, चिकनगुनिया, स्‍वाइन फ्लु, मलेरिया, टाईफाईड और वायरल हो गया ना डेंचिकुस्‍वामलेटा वायरल बड़ा भयानक वायरल फीवर दूंढ कर लाये हैं. कही ओबमा मंदी की मार से बचने के लिए इसका पटेंट न करा ले. आभार.

    Arvind Pareek के द्वारा
    10/11/2010

    प्रिय श्री मिश्रा जी, इस बार का ओबामा विजिट था ही इसके लिए कि यदि इस बीमारी का पैटेंट लेना है तो केवल अमेरिकी डाक्‍टरों के नाम से । लेकिन बीमारी केवल तीसरी दूनिया के देशों के लिए ही हों बस इसी बात पर उनसे समझौता टूट गया । आपका प्रतिक्रिया के लिए आभार व धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

R K KHURANA के द्वारा
09/11/2010

प्रिय अरविन्द जी, तारीफ़ करनी पड़ेगी ! आजकल के बच्चे ज्यादा समझदार हैं और ऐसी बातें जानते हैं जिनके बारे में हमलोग सोच भी नहीं पाते ! बहुत सुंदर लेख ! इससे डाक्टरों को भी शिक्षा लेनी चाहिए ! राम कृष्ण खुराना

    R K KHURANA के द्वारा
    09/11/2010

    प्रिय अरविन्द जी, तारीफ़ करनी पड़ेगी आपकी बेटी की ! (लाइन अधूरी रह गयी थी कृपया ठीक करके पढ़ें ) खुराना

    Arvind Pareek के द्वारा
    10/11/2010

    आदरणीय श्री खुराना जी, आपनें बिलकुल सही कहा है कि आजकल के बच्‍चे ज्‍यादा समझदार हो गए हैं। लेकिन आजकल के ये झोलाछाप डॉक्‍टर जो लैब से कट लेते हैं वे किससे शिक्षा लेंगें । प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ आपका धन्‍यवाद ।

sdvajpayee के द्वारा
09/11/2010

  भाई श्री पारिक जी,  रहन सहन और खानपान पर नजर डालने की जरूरत है। रहना-सोना बढते प्रदूषण के बीच है। खानापीना मिलावट वाला। डाक्‍टर सफेद पोश लुटेरे होते जा रहे हैं।

    Arvind Pareek के द्वारा
    10/11/2010

    आदरणीय श्री एस.डी. वाजपेयी जी, बीमारियां आनें की वजह तो हमारा रहन-सहन व खान-पान ही है, लेकिन डॉक्‍टर क्‍या वास्‍तव में सफेदपोश लुटेरे बन गए है । मेरे विचार से तो ऐसे डाक्‍टर पॉंच-दस प्रतिशत ही होंगें। हॉं जो डॉक्‍टर के भेष में डॉक्‍टर बने बैठे है उनका कुछ कहा नहीं जा सकता । प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

Alka Gupta के द्वारा
09/11/2010

श्री अरविन्द जी ,बेटी द्वारा एक नई बीमारी की खोज की गई सर्वप्रथम तो वही बधाई की पात्र है और आपने हम सबको इस बीमारी से अवगत कराया , धन्यवाद

    Arvind Pareek के द्वारा
    10/11/2010

    सुश्री अलका गुप्‍ता जी, बिटिया की ओर से मैं आपकों बधाई के लिए धन्‍यवाद देता हूँ साथ ही प्रतिक्रिया देने के लिए आभारी भी हूँ, धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
09/11/2010

आदरणीयअरविंद पारिक जी …एक रोचक बीमारी के नाम से परिचय करने के लिए शुक्रिया ……. वास्तव में इस बीमारी का नाम इतना मजेदार है की शायद मरीज सुनकर ही खुश हो जाये और ख़ुशी हर बीमारी को दूर कर देती है…………..तो वो ठीक हो ही जायेगा……………

    Arvind Pareek के द्वारा
    10/11/2010

    प्रिय श्री पियुष पंत जी, रोगी बीमारी का नाम सुनकर ही खुश हो गए तो डाक्‍टरों का क्‍या होगा । अब तो कोई किसी बीमारी का नाम ऐसा नहीं रखना चाहेगा । अरविन्‍द पारीक

    Arvind Pareek के द्वारा
    10/11/2010

    प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद ।

nishamittal के द्वारा
09/11/2010

अपनी बिटिया को धन्यवाद दीजिये हमारा ज्ञानवर्धन करने के लिए.

    Arvind Pareek के द्वारा
    10/11/2010

    सुश्री निशा मित्तल जी, आपका भी धन्‍यवाद आपकी प्रतिक्रिया के लिए । अरविन्‍द पारीक

    Arvind Pareek के द्वारा
    10/11/2010

    प्रिय डैनियल जी, आपकी पोस्‍ट इसी मंच पर मौजुद है । जहां तक आपकी शंका का सवाल है कि यह बैन है तो वह सरासर निराधार है । क्‍योंकि आपनें अपनी पोस्‍ट में एकतरफा पक्ष रखा है । अब तक आप सभी धर्मो को समान बताते आए थे । और इस एक पोस्‍ट से आप केवल एक धर्म का ही पक्ष ले रहे हैं। ऐसा कीजिए की इस पोस्‍ट की एक प्रति बना कर चातक जी के विष्‍ठा उत्‍सर्जन केन्‍द्र के कमेंटस के हवाले कर दीजिए ताकि सभी उसे पढ़े व कमेंटस दे सकें। यह सलाह देने का कारण यह है कि मुझे लगने लगा है कि कमेंटस पानें के लिए कुछ भी अनाप-शनाप लिखा जा रहा है । अरविन्‍द पारीक

rajkamal के द्वारा
09/11/2010

आदरणीय श्री अरविंद पारिक जी …अभिवादन ! आपकी बिटिया तो आप से भी चार कदम आगे बढ़कर जीनिअस है … क्या मजेदार नया नाम दिया है उस अनजानी बिमारी को …. बहुत अरसे बाद भाई जी पेडो की एलर्जी से निजात मिलने के बाद उनसे यूँ मुलाकात करना अच्छा लगता अगर उनको यह एक नयी नामुराद बीमारी ने ना जकड़ा होता …. बहुत अच्छी पोस्ट निम् हकीमो पे करार वयंग्य करती हुई और बेकार के गैर जरूरी टैस्ट करवाने वाले डाक्टरों के मुहं पे तमाचा मारती हुई

    Arvind Pareek के द्वारा
    10/11/2010

    प्रिय श्री राजकमल जी, सादर अभिवादन, आखिर बेटी किसकी है । भाई जी को पेड़ों से एलर्जी हो ही नहीं सकती हॉं यह नामुराद बीमारी जरूर होने हिला गई । जब नीम हकीमों के पास जाएंगें तो और क्‍या पाएंगें । प्रतिक्रिया के लिए आभार व धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

    Arvind Pareek के द्वारा
    10/11/2010

    हॉं यह नामुराद बीमारी जरूर XहोनेX हिला गई ।                                              उन्‍हें


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