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भाईजीकहिन Bhaijikahin

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आइये शोर मचायें

Posted On: 3 Nov, 2010 Others,न्यूज़ बर्थ में

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जागरण जंक्‍शन की मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी व संपादक मंडल एवं सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों, जागरण जंक्‍शन के सभी ब्‍लागर्स साथियों, व सभी पाठकों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं ।

अरविन्‍द पारीक

 

 आइये शोर मचायें

मुझे एक एसएमएस मिला । लिखा था – सभी को चेंज चाहिए, लेकिन कोई इसे लेकर नहीं आता …….. । कुछ अंतराल के बाद लिखा था – …. ये महान शब्‍द है ….. एक बस कंडक्‍टर के । लेकिन बात मजाक की नहीं है । वास्‍तव में हम सभी को चेंज चाहिए, परिवर्तन चाहिए ।

 

इसलिए भारत समेत दुनिया के 192 देशों ने वर्ष 2000 में संयुक्‍त राष्‍ट्र में वादा किया था कि वे 2015 तक 8 लक्ष्‍यों – भुखमरी और गरीबी को खत्‍म करना, सभी बच्‍चों को प्राइमरी शिक्षा उपलब्‍ध करवाना, महिला सशक्तिकरण और लिंग समानता को बढ़ावा देना, बाल मृत्‍यु दर, मातृत्‍व मृत्‍यु दर को काबू मे लाना, एचआईवी, मलेरिया जैसी बीमारियों से लड़ना, पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य करना और विकास के लिए एक विश्‍वव्‍यापी साझेदारी तैयार करना – को हासिल कर लेंगें ।  इन्‍हें संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ ने मिलेनियम डवेलपमैंट गोल (एमजीडी) या विकास लक्ष्‍य नाम दिया है । निस्‍:सन्‍देह यदि इन लक्ष्‍यों को हासिल किया जाता है तो देश में व्‍यापक परिवर्तन दिखाई देगा ।

 

लेकिन समस्‍या वही बस कंडक्‍टर वाली है कि इस परिवर्तन को लाएगा कौन ? बहुत सोचने विचारनें के बाद मुझे ख्‍याल आया कि हमारे देश में इस तरह का परिवर्तन दो ही वर्ग ला सकते हैं और वे हैं हमारे मंत्री-नुमा नेता और वरिष्‍ठ नौकरशाह । क्‍योंकि देश का सारा काम भले ही राष्‍ट्रपति के नाम से होता हो, क्‍या होना है व कैसे होना है ये सिर्फ और सिर्फ हमारे मंत्री-नुमा नेता और वरिष्‍ठ नौकरशाह ही निर्धारित करते हैं । इसलिए मेरे सौभाग्‍य या दुर्भाग्‍य से मैं ऐसे ही एक मंत्री-नुमा नेता और वरिष्‍ठ नौकरशाह से एक साथ मिला और पूछ बैठा – एमजीडी हासिल करने के लिए अब तो केवल पांच वर्ष ही बचे हैं और दस वर्ष बीत चुके हैं । क्‍या आप बताएंगें की हमारे देश की इस मामलें में क्‍या स्थिति हैं और क्‍या हम लक्ष्‍य पा लेंगें ?

 

दोनों ने एक-दूसरें के चेहरे की और देखा फिर मंत्री-नुमा नेता बोले देखिए हम जो भी कहेंगें वह हम दोनों का सम्मिलित जवाब है आप किसी एक का नाम ना लिखिएगा । क्‍योंकि देश की नैया को डुबोने व पार लगानें में हम साझेदार हैं । मैंनें हॉं में सिर हिला दिया । उन्‍होंनें जो कहा वह अक्षरश: एक साथ आपके सम्‍मुख है -

 

आपकों पता ही है संयुक्‍त राष्‍ट्र हमें जगाने के लिए ‘स्‍टेंड अप, टेक एक्‍शन, मेक नाइज’ इवेंटस के अंतर्गत यूएन मिलेनियम कैंपेन के कार्यक्रम हमारे देश में कर रहा है । एक कार्यक्रम पुराने किले में कर चुका है । देश के कई हिस्‍सों में कार्यक्रम किए जा रहे हैं । हमनें भी कमर कस ली है । देख रहे हैं कि युएन कितनी राशि देता है व उसमें से कितनी राशि ‘हमारी’ भुखमरी और गरीबी मिटा सकती है । बच्‍चों को प्राइमरी तक क्‍या हमनें तो पूरी स्‍कूली शिक्षा के प्रबंध कर दिए हैं । कोई बच्‍चा अब फेल नहीं किया जा सकता । हो सका तो बच्‍चों को घर बैठे ही स्‍कूली शिक्षा पा लेने के प्रमाणपत्र दे दिए जाएंगें । चाइनीज सीख कर बच्‍चें चीं-चीं चाओं करेंगें तो विश्‍व को हमारी प्रगति का पता चलेगा भले ही वे ढंग से हिन्‍दी लिख-बोल ना पाएं । महिलाओं को सशक्‍त बनानें के लिए और लिंग समानता को बढ़ावा देने के लिए हम लिंग जांच अनिवार्य करने जा रहे हैं डाक्‍टरों को निर्देश दे दिए जाएंगें कि पुरूष भ्रुण होने पर उसे तत्‍काल खत्‍म कर दे । किसी प्रकार की अनुमति की आवश्‍यकता नहीं होगी । जब तक की स्‍त्री-पुरूष की संख्‍या बराबर न हो जाए । भले ही महिला आरक्षण ना कर पा रहे हों । बाल मृत्‍यु दर, मातृत्‍व मृत्‍यु दर को काबू मे लाने के लिए आंकड़ों की दोबारा जांच की जा रही है । हो सकता है उनमें त्रुटि हो । आप देखेंगें कि ये दर शीघ्र काबु में आ जाएंगी । एचआईवी, मलेरिया जैसी बीमारियों से लड़नें के लिए हम अमेरिका, युरोप व पाकिस्‍तान और बांग्‍लादेश जैसे देशों से पर्यटकों व मच्‍छरों के आवागमन पर पाबंदी लगा देंगें । पर्यावरण संरक्षण के लिए हम प्रत्‍येक घर में जापानी बोनसाई पद्धति से जंगल या पेड़-पौधे लगाना अनिवार्य बनानें संबंधी कानून ला रहे हैं और विकास के लिए एक विश्‍वव्‍यापी साझेदारी का कार्य तो यूएन के सहयोग के बिना हो ही नहीं सकता । फिर भी हमें विश्‍वास है कि हम 2015 तक एमजीडी को पानें के लिए तैयार हैं ।

 

यह जानकार मुझे भी लगा कि शायद संयुक्‍त राष्‍ट्र के ‘स्‍टेंड अप, टेक एक्‍शन, मेक नाइज’ इवेंटस के अंतर्गत यूएन मिलेनियम कैंपेन के कार्यक्रमों से हमारी नींद खुल चुकी है और हम परिवर्तन ले ही आएंगें । तभी तो यूएन भी शोर मचानें के लिए संगीत के कार्यक्रम आयोजित कर रहा है ।

 

 

- अरविन्‍द पारीक



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24 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

alkargupta1 के द्वारा
05/11/2010

बहुत अच्छा लेख है पारीक जी,  शोर मचाने से ही शायद आँखें खुल जाएं  और फिर कुछ तो होगा ही …..।  

    Arvind Pareek के द्वारा
    06/11/2010

    सुश्री अलका गुप्‍ता जी, प्रशंसा के लिए आभारी हूँ । आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद । कुछ होने की उम्‍मीद तो मुझे भी हैं बाकि रब जानें । अरविन्‍द पारीक

atharvavedamanoj के द्वारा
04/11/2010

नंदा दीप जलाना होगा| अंध तमस फिर से मंडराया, मेधा पर संकट है छाया| फटी जेब और हाँथ है खाली, बोलो कैसे मने दिवाली ? कोई देव नहीं आएगा, अब खुद ही तुल जाना होगा| नंदा दीप जलाना होगा|| केहरी के गह्वर में गर्जन, अरि-ललकार सुनी कितने जन? भेंड, भेड़िया बनकर आया, जिसका खाया,उसका गाया| मात्स्य-न्याय फिर से प्रचलन में, यह दुश्चक्र मिटाना होगा| नंदा-दीप जलाना होगा| नयनों से भी नहीं दीखता, जो हँसता था आज चीखता| घरियालों के नेत्र ताकते, कई शतक हम रहे झांकते| रक्त हुआ ठंडा या बंजर भूमि, नहीं, गरमाना होगा| नंदा दीप जलाना होगा ||…………………………….मनोज कुमार सिंह ”मयंक” आदरणीय पारिक जी, आपको और आपके सारे परिवार को ज्योति पर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं || वन्देमातरम

    Arvind Pareek के द्वारा
    06/11/2010

    प्रिय श्री मनोज कुमार सिंह जी, कविता के रूप में आपके भावनाएं मुझ तक पहुँच गई हैं । सत्‍यता को बयान करती आपकी कविता लाजबाव है । दीपावली पर आपकों और आपके सारे परिवार को मेरी भी हार्दिक शुभकामनाएं । अरविन्‍द पारीक

kmmishra के द्वारा
04/11/2010

\"लेकिन समस्‍या वही बस कंडक्‍टर वाली है कि इस परिवर्तन को लाएगा कौन ?\" . मैं तो लाने से रहा. . अरविन्द जी नमस्कार ! आपको व सभी ब्लोगर्स को धनतेरस और दीपावली की शुभ कामनाएं । मिठाईयों से दूर रहियेगा और पटाखे थोड़ी दूरी से फोड़ियेगा । आभार ।

    Arvind Pareek के द्वारा
    04/11/2010

    प्रिय श्री के.एम. मिश्रा जी, नमस्‍कार । आप नहीं लाएं यह तो हो नहीं सकता । क्‍योंकि एडवोकेट ही न्‍यायालय के माध्‍यम से इस देश में बहुत कुछ करवा रहे हैं । धनतेरस और दीपावली की शुभ कामनाओं के लिए धन्‍यवाद । मिठाई से तो दूर रहना पड़ेगा ही पटाखों से दूरी का पाठ बच्‍चों को पढ़ा दूँगा । आभार । दीपावली आपके व आपके परिवार के लिए मंगलमय हो और स्‍वास्‍थ्‍य, धन-धान्‍य व समृद्धि के साथ क्‍लाइंटों की बाढ़ भी आ जाए । शुभ कामनाएं । अरविन्‍द पारीक

बहरों के शहर में शोर मचानें से कुछ नहीं होता अलवत्ता शोर मचाने वाला चिल्ला चिल्ला कर गुणगा अवस्य हो सकता. चेंज की समस्या तो बहुत पुरानी है, वो चाहे परिवर्तन (चेंज) की हो या फिर रेजगारी (चेंज) की. एक अच्छे व्यंग लेखन की बधाइयाँ प्राप्त करें.

    Arvind Pareek के द्वारा
    04/11/2010

    प्रिय श्री दीपक जी, बधाई के लिए आभारी हूँ । यह नींद में सोए हुओं का देश है इसलिए यहां शोर तो कामयाब है । लेकिन डर केवल इतना है जागे हुए भी आलस्‍य को अपनाएंगें तो क्‍या होगा । बस इसी तरह उत्साह बढ़ाते रहिए । आपकों व आपके पूरे परिवार के लिए दीपावली खुशियों का खजाना लेकर आए । अरविन्‍द पारीक

roshni के द्वारा
03/11/2010

अरविन्द पारीक जी , वैसे शोर मचाना ही चहिये शायद नीदं में सोने वाले जाग जाये और कुछ अच्छा हो जाये दिवाली की शुभ कामनाये

    Arvind Pareek के द्वारा
    04/11/2010

    सुश्री रोशनी जी, कुछ क्‍यों ज्‍यादा ही अच्‍छा होगा । यदि नींद से जागनें के बाद वास्‍तव में काम किया जाए । दीपावली की शुभकामनाओं और प्रतिक्रिया के लिए धन्यकवाद । आपकों व आपके पूरे परिवार के लिए दीपावली का यह त्यौहार मंगलमय हो और धन-धान्य व समृद्धि का भंडार लेकर आए । अरविन्द पारीक

rajkamal के द्वारा
03/11/2010

आदरणीय भाई जी ..अभिवादन ! आपको दिवाली पे चातक जी की तरह सफाई अभियान चलाना चाहिए था ना की चेंजिंग अभियान … कहाँ तो मैं यही समझा बैठा था की आप सिर्फ मुझको ही चेंज करने की सलाह दे रहे है …. लेकिन यहाँ पे आकर देखा तो पाया की आप तो पूरे समाज और इसके सिस्टम को ही बदलने पे तुले हुए है …. खैर आपके इस भागीरथी प्रयास पे मेरी तरफ से तीन -२ मुबारकबाद …( दीपावली + धनतरेस )

    Arvind Pareek के द्वारा
    04/11/2010

    प्रिय श्री राजकमल जी, 3-3 मुबारकबाद के लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद । यदि पूरा समाज और इसके सारे सिस्‍टम बदल जाएं तो क्‍या बेहतर ना होगा । प्रयास भगीरथी जरूर है लेकिन संयुक्‍त राष्‍ट्र ने इसका बीड़ा उठाया है उम्‍मीद करिए की मंत्री-नुमा नेता और नौकरशाह उसे कामयाब होनें दें । दीपावली की शुभकामनाओं और प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद । आपकों व आपके पूरे परिवार के लिए दीपावली खुशियों का खजाना लेकर आए । अरविन्‍द पारीक

nishamittal के द्वारा
03/11/2010

काश!दीपावली के पटाखों की तरह आपकी पुकार सरकार के कानों में गूंजे और कुम्भ्करनी निद्रा से जगा दे.

    Arvind Pareek के द्वारा
    04/11/2010

    सुश्री निशा मित्तल जी, यह पुकार सरकार के कानों तक तो जरूर पहूँचेगी लेकिन एमजीडी के 8 लक्ष्‍य प्राप्‍त करनें के लिए कितनें का घोटाला होगा कहना मुश्किल है । आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ । धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

R K KHURANA के द्वारा
03/11/2010

प्रिय अरिविंद जी, मेरी और से आपको और आपके परिवार को दीपावली की लाख लाख बधाई ! बहुत ही सुंदर लेख ! बहुत अच्छा विषय चुना है आपने ! आपके एनी लेखो की ही तरह ज्ञानवर्धक लेख ! मेरी बधाई ! आपकी माता जी को नमस्कार ! राम कृष्ण खुराना

    Arvind Pareek के द्वारा
    04/11/2010

    आदरणीय श्री खुराना जी, दीपावली की शुभकामनाओं और प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद । प्रशंसा के लिए आभारी हूँ । बस इसी तरह उत्‍साह बढ़ाते रहिए । आपकों व आपके पूरे परिवार के लिए दीपावली का यह त्‍यौहार प्रसन्‍नता की बौछार के साथ स्‍वास्‍थ्‍य, धन-धान्‍य व समृद्धि का भंडार लेकर आए । अरविन्‍द पारीक

sd vajpayee के द्वारा
03/11/2010

Ek achchhe issue paj achchhi post. very very happy Diwali.

    Arvind Pareek के द्वारा
    04/11/2010

    आदरणीय श्री एस.डी. वाजपेयी जी, सराहना के लिए आभारी हूँ । बस इसी तरह उत्‍साह बढ़ाते रहिए । दीपावली की शुभकामनाओं और प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद । आपकों व आपके पूरे परिवार के लिए दीपावली खुशियों का खजाना लेकर आए । अरविन्‍द पारीक

bharatswabhiman के द्वारा
03/11/2010

अरविन्‍द पारीक जी आपने जो कहा और कहने का अंदाज़ दोनों ही लाज़वाब है | मुझे पूरा भरोसा है की आप के लेख को पड़कर कोई तो जागेगा | आपको दिवाली की हार्दिक शुभकामनाये

    Arvind Pareek के द्वारा
    04/11/2010

    आदरणीय श्री अरूण अग्रवाल जी, चलिए जब जागे तब सवेरा । प्रशंसा के लिए आभारी हूँ । बस इसी तरह उत्‍साह बढ़ाते रहिए । दीपावली की शुभकामनाओं और प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद । आपकों व आपके पूरे परिवार के लिए दीपावली खुशियों का खजाना लेकर आए । अरविन्‍द पारीक

abodhbaalak के द्वारा
03/11/2010

पारीक जी जी, सर्वप्रथम आपको और आपके परिवार को दीपावली की शुभकामनाये, आपके इस लेख को पढ़ कर यही कह सकता हूँ की आपकी लेखनी में कोई चेंज नहीं है, वो कल भी शानदार थी , और आज भी शानदार है ऐसे ही हम सब का ज्ञान वर्धन करते रहें http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    Arvind Pareek के द्वारा
    04/11/2010

    प्रिय श्री अबोध बालक जी, लेखनी की प्रशंसा के लिए आभारी हूँ । प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद । दीपावली आपके व आपके परिवार के लिए मंगलमय हो । अरविन्‍द पारीक

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
03/11/2010

हो सका तो बच्‍चों को घर बैठे ही स्‍कूली शिक्षा पा लेने के प्रमाणपत्र दे दिए जाएंगें । डाक्‍टरों को निर्देश दे दिए जाएंगें कि पुरूष भ्रुण होने पर उसे तत्‍काल खत्‍म कर दे । किसी प्रकार की अनुमति की आवश्‍यकता नहीं होगी । जब तक की स्‍त्री-पुरूष की संख्‍या बराबर न हो जाए । भले ही महिला आरक्षण ना कर पा रहे हों । बाल मृत्‍यु दर, मातृत्‍व मृत्‍यु दर को काबू मे लाने के लिए आंकड़ों की दोबारा जांच की जा रही है । हो सकता है उनमें त्रुटि हो । आप देखेंगें कि ये दर शीघ्र काबु में आ जाएंगी । सुन्दर पंक्तियों से सजे इस लेख के लिए हरिदिक बधाई……… दीपावली की आपको और आपके पुरे परिवार को हार्दिक बधाई…………… ये दीपावली आपके जीवन को खुशियों से भर दे………..

    Arvind Pareek के द्वारा
    04/11/2010

    प्रिय श्री पियुष पन्‍त जी, प्रशंसा के लिए आभारी हूँ । प्रतिक्रिया के लिए व दीपावली की शुभकामनाओं के लिए भी धन्‍यवाद । दीपावली आपके व आपके परिवार के लिए मंगलमय हो । अरविन्‍द पारीक


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