मन की बात सबके साथ Man ki baat sabke saath

भाईजीकहिन Bhaijikahin

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वह क्यूँ करता है ऐसा ?

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सर्वप्रथम तो मैं आप सभी से क्षमा चाहता हूँ कि मैं लगभग 20-22 दिन इस मंच से अनुपस्थित रहा । कारण माताजी की बीमारी और बाद में पत्‍नी व बच्‍चों सहित मेरा वायरल बुखार का शिकार होना रहा । अब सब ठीक हैं इसलिए मैं आपके समक्ष हाजिर हूँ । अरविन्‍द पारीक

 

 

वह क्‍यूँ करता है ऐसा ?

                                                   

अभी दो सप्‍ताह पहले जब अचानक मॉं को दिल का दौरा पड़ा और उन्‍हें अस्‍पताल ले जाना पड़ा तो जो अनुभव वहां हुआ, आज मैं उसे आपके साथ बॉंटना चाह रहा हूँ । केवल दो-तीन घंटे की अवधि में बहुत कुछ घट गया था । आईसीयू, कैथ-लैब, एंजियोग्राफी और बैलून एंजियोप्‍लास्‍टी व स्‍टेन्‍ट जैसे शब्‍द जो अपरिचित लगा करते थे आज परिचित बन कर सामनें आ गए थे । फिर मॉं का मुस्‍कराता चेहरा सामने था । लगा था जैसे कितना कुछ पल भर में घट गया ।

 

प्राईवेट अस्‍पताल के नाम से मन में एक ही बात थी कि ये अस्‍पताल वाले रोगी से केवल और केवल पैसे वसुलते हैं । इलाज जो करते हैं उससे कहीं ज्‍यादा लूटते हैं । गैर-जरूरी टेस्‍ट करवाते हैं । लेकिन अस्‍पताल में कदम रखनें से लेकर तीन घंटे के भीतर ही ये सब बातें कहीं हवा हो गई थी । उस समय अस्‍पताल में जैसा कहा जा रहा था परिवार वही सब करने में व्‍यस्‍त था । बिल सैक्‍शन में कुछ नकदी जमा करवानें से लेकर अन्‍य औपचारिकताएं पुरी करने तक ।

 

धर्मसंकट केवल तभी खड़ा हुआ जब डॉक्‍टर ने बैलून एंजियोप्‍लास्‍टी व बॉयपास सर्जरी में से एक के बारे में निर्णय लेने को कहा । दोनों दशाओं में बाद की अवस्‍था में डॉक्‍टर के अनुसार कुछ भी अच्‍छा नहीं होना था । उनका तो कहना था कि बचने की कोई गारंटी भी नहीं हैं । फिर भी हमें निर्णय लेना था कि हम क्‍या चाहते हैं ? डॉक्‍टर के अनुसार दौरा निरंतर जारी था । कुछ भी हो सकता था । बैलुन एंजियोप्‍लास्‍टी के बाद के परिणाम और भी बुरे हो सकते थे, किडनी खराब हो जाने के कारण डायलेसिस की आवश्‍यकता पड़ सकती थी और हो सकता है कि साथ ही साथ बॉयपास सर्जरी भी करवानी पड़ती । फिर भी डॉक्‍टर यह नहीं कह रहे थे कि उनकी राय में क्‍या उचित था – बैलून एंजियोप्‍लास्‍टी या बॉयपास सर्जरी ? इस समय ली गई सहमति में इन सभी बुरे परिणामों का वर्णन कर हस्‍ताक्षर करवाए गए थे । सत्तर की उम्र में बॉयपास सर्जरी उचित नहीं होगी परिवार ने निर्णय लिया था । डॉक्‍टर ने बिना किसी हुज्‍जत के इसे स्‍वीकार किया और बैलून एंजियोप्‍लास्‍टी को अंजाम दिया । लगभग आधे घंटे के समय के बाद डॉक्‍टर के चेहरे पर विजयी मुस्‍कान थी । सब कुछ सही रहा था । मॉं के चेहरे से झलक रहा दर्द अब गायब था ।

 

प्रश्‍न यही पैदा हुआ कि किसके निर्णय के कारण मॉं अब स्‍वस्‍थ थी ? डॉक्‍टर के जिसनें बैलून एंजियोप्‍लास्‍टी व बॉयपास सर्जरी में से एक के बारे में निर्णय लेने को कहा था या परिवार के निर्णय के कारण जिसनें उम्र को देख बॉयपास सर्जरी को उचित नहीं माना था। डॉक्‍टर ने दोनों विकल्‍प देते हुए केवल वे ही परिणाम बताए थे जिनका अर्थ था कि कुछ भी अच्‍छा न होगा । इस समय ली गई सहमति में इन सभी बुरे परिणामों का वर्णन कर हस्‍ताक्षर करवाए गए थे । अंतिम विकल्‍प तब भी बॉयपास सर्जरी ही था । लेकिन परिवार के निर्णय के बाद बैलुन एंजियोप्‍लास्‍टी को डॉक्‍टर ने ही अंजाम दिया था – जिसमें डॉक्‍टर सफल रहा ।

 

प्राईवेट अस्‍पताल का वह डॉक्‍टर कभी विलेन था जब वह केवल और केवल बुरे परिणामों की बात कर रहा था । जब उसनें परिवार को तत्‍काल निर्णय लेनें को कहा, सोचनें के लिए समय भी नहीं देना चाहता था, लग रहा था उसके हाथ में अब कुछ नहीं हैं वह कुछ नहीं कर सकता । वही डॉक्‍टर हीरो था, भगवान था जब वह विजयी मुस्‍कान लिए बाहर आया था व बैलुन एंजियोप्‍लास्‍टी को सफल बताया था । जब मॉं का मुस्‍कराता चेहरा सामनें आया था । सारे बुरे परिणाम रफूचक्‍कर हो चुके थे । मॉं अब स्‍वस्‍थ है, प्रसन्‍न है ।

 

लेकिन यह विचारक मन अभी भी बैचेन है । क्‍यों हम किसी विपदा के समय अशुभ की कल्‍पना करते हैं ? सदैव यही सुना है कि ‘थिंक पॉजिटिव’ । लेकिन प्राईवेट अस्‍पताल का डॉक्‍टर प्रत्‍यक्ष में आपकों सिर्फ और सिर्फ ‘नेगेटिव’ बाते ही क्‍यों बताता है ? वह नेगेटिव सोच के साथ पॉजिटिव काम कैसे कर पाता है ? हम कुछ भी निराश मन के साथ करते हैं तो सफल नहीं होते हैं वही डॉक्‍टर इलाज से पहले सिर्फ और सिर्फ निराशा की बातें करता है, फिर भी सफल हो जाता है ।

 

ना जानें कितनी बार सुना है कि मन के हारे हार है मन के जीते जीत । तो क्‍या किसी प्राईवेट अस्‍पताल का डॉक्‍टर हाथी के दाँत खानें के और दिखानें के और वाली बात करता है ? अर्थात वह ऊपरी मन से तो रोगी के परिचितों को निराशा का उपहार देता हैं, भगवान से सहायता की पुकार की सलाह देता है, लेकिन अंदर ही अंदर मन में सफलता का दृढ़ विश्‍वास लिए इलाज के लिए अपना हाथ बढ़ाता हैं । तभी तो वह सफल हो जाता है ।

 

लेकिन वह ऐसा करता ही क्‍यों हैं ? क्‍यों नहीं निराशा भरी बातों के साथ आस-भरी बातें दोहराता है । शायद उपभोक्‍ता कानून का भय उसे ऐसा करने पर मजबूर करता है या फिर अस्‍पताल के लिए भारी-भरकम बिल की अपेक्षा की पूर्ति के लिए वह पहले ही रास्‍ता तैयार कर लेना चाहता है ताकि आपातकालीन अवस्‍था में आए रोगी के रिश्‍तेदारों की माली हालत का जायजा लेने के बाद अपेक्षित बिल की वसुली की जा सके या वास्‍तव में उसके हाथ में कुछ भी नहीं होता और वह अपनें कर्म का परिणाम भी नहीं जानता,  क्‍योंकि वह केवल यह जानता है कि जीवन के संबंध में निर्णय लेनें का अधिकार केवल उस परम प्रिय परमात्‍मा के हाथ में है, जिसनें उसे इस कर्मक्षेत्र में पहुँचाया है ।

 

- अरविन्‍द पारीक



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24 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
04/11/2010

प्रिय अरविन्‍द जी, देर से प्रतिक्रिया देने के लिए मांफी चाहता हूं। अब लगता है आप शरिरिक एंव मानसिक रूप से स्‍वस्‍थ्‍य है। भई परिवार का कोई एक भी सदस्‍य यदि बिमार पड़ जाता है तो सभी उस की तिमारदारी में लग जाते है सभी को चिंता हो जाती है। अब आपकी माताजी का स्‍वास्‍थ ठीक है यह खुशी कि बात है। माता जी कि बिमारी के विषय में जो वाक्‍या आप ने बताया उस का निशकर्श मेरी नजर में तो यही है – मन के हारे हार है मन के जीते जीत, आलवेज थिंक पाजेटिव, भली करेंगें राम।

    Arvind Pareek के द्वारा
    05/11/2010

    प्रिय श्री दीपक जोशी जी, देर आयद दुरस्‍त आयद । आप देर से नहीं आए, मैं ही कुछ लेट हो गया था । आपनें जो लिखा वह बिलकुल ठीक है । सकारात्‍मक सोच के साथ काम अवश्‍य बन जाता है । प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ, धन्‍यवाद । दीपावली पर आपको व आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं । अरविन्‍द पारीक

Alka Gupta के द्वारा
29/10/2010

 पारीक जी , जागरण मंच पर कुछ दिन पहले ही आई हूँ आज आपकी पोस्ट पढ़ी  आपकी माताजी का स्वास्थ्य अब ठीक है जानकर अच्छा लगा माता-पिता की कोई तुलना ही नहीं ।उनके लिए जो भी अच्छा कर सकते हैं करते हैं उनकी व आपके परिवार के स्वास्थ्य लाभ के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती हूँ। आपने इस लेख में इन  डॉक्टर्स की वास्तविकता बता दी है।

    Arvind Pareek के द्वारा
    01/11/2010

    सुश्री अलका गुप्‍ता जी, जागरण के इस मंच पर आपका स्‍वागत है । शुभकामनाओं के लिए आभारी हूँ । आपनें इसे डाक्‍टरों की वास्‍तविकता समझा धन्‍यवाद । लेकिन मैं सकारात्‍मक व नकारात्‍मक सोच की बात भी कर रहा था । आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

kmmishra के द्वारा
28/10/2010

आदरणीय अरविंद जी सादर प्रणाम । बहुत दिनों से भईयाजी से मुलाकात नहीं हुयी तो सोचा कि शायद अरविंद जी कहीं व्यस्त हो गये । बुरा समय बता कर नहीं आता लेकिन अंत भला तो सब भला । माता जी का ख्याल रखियेगा । मां बाप का साया जब तक अपने ऊपर रहता है तब तक लगता है ईश्वर इनके रूप में साथ है । परमात्मा आपके परिवार को रोगों और दुखों से दूर रखे । आपका के एम मिश्र

    Arvind Pareek के द्वारा
    01/11/2010

    प्रिय श्री के.एम. मिश्रा जी, यह आप सभी की शुभकामनाओं का परिणाम ही है कि मॉं व मेरा पुरा परिवार अब स्‍वस्‍थ व प्रसन्‍न है । बस अस्‍वस्‍थता ने ही व्‍यस्‍त कर रखा था अब इन्‍टरनेट की कनेक्‍शन की त्रुटियों ने टिप्‍पणियों पर रोक लगानी शुरू कर दी है । बार-बार प्रयास करनें व करवानें के पश्‍चात ही टिप्‍पणियां डाल पा रहा हूँ । आपका धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

roshni के द्वारा
28/10/2010

आदरनिये अरविन्द परिक जी शायद doctors को पता होता है की अगर वोह मरीज़ के बचने के ज्यदा चांस बताता है और मरीज़ नहीं बच पता तो परिवार वाले doctors को ही गलत साबित करने के कोशिश करते है की शयद इसने कुछ गलत किया होगा.. इसलिए वोह सच बता देता है हाँ बस मरीज़ को ही आशा भरी बातें की जाती है की वोह बच जायेगा चिंता की कोई बात नहीं मगर परिवार वालों को सच पता होना चहिये…

    Arvind Pareek के द्वारा
    01/11/2010

    सुश्री रोशनी जी, आपका कहना भी सही है । प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

आर.एन. शाही के द्वारा
28/10/2010

श्रद्धेय पारीक जी आपकी माता जी के साथ गुजरे कष्ट के क्षणों और उस दौरान आप तथा अन्य परिजनों की मनोदशा के बारे में सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं । मैं अपने एक मित्र की ऐसी ही स्थिति के समय होने वाले अनुभव से परिचित हूं । आपकी माता जी के पूर्व पुण्य कर्म एवं आपलोगों की अनवरत सेवा तथा उचित निर्णय लिये जाने के कारण आपकी खुशियां लौट आईं, यही सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाय । डाक्टर्स शायद भय खाते होंगे कि यदि पहले सकारात्मक बताया, और परिणाम नकारात्मक आया, तो प्रतिक्रिया उग्र हो सकती है । इसलिये निराश करो, ताकि सकारात्मक होने पर उत्साहजनक प्रतिक्रिया प्राप्त हो, और नकारात्मक पर कहा जा सके कि मैंने तो पहले ही बता दिया था । साधुवाद ।

    Arvind Pareek के द्वारा
    01/11/2010

    आदरणीय शाही जी, नमस्‍कार, आपनें बहुत सही आकलन किया है । शायद डाक्‍टर के नकारात्‍मक प्रदर्शन का कारण यही होगा । आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ, धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

28/10/2010

आदरणीय अरविन्द जी………….. आपकी माता जी अब स्वस्थ हैं ये जान कर अच्छा लगा……… बड़ा मुश्किल काम है ये की जब आपको किसी ऐसे कागज़ पर हस्ताक्षर करने हों जिसमे आप अपने किसी प्रिय के साथ किसी दुर्घटना के लिए जिम्मेदारी ले रहे हों………….. और जैसा की आपने कहा की क्‍यों हम किसी विपदा के समय अशुभ की कल्‍पना करते हैं ? तो इस का एक मात्र कारण मुझे ये लगा की ये उस व्यक्ति के प्रति हमारे प्रेम के ही कारण है………. की हम उसको हर हाल में सुरक्षित देखना चाहते हैं…………….

    Arvind Pareek के द्वारा
    01/11/2010

    प्रिय श्री पियुष पंत जी, अपने प्रियजन के लिए डाक्‍टर के कहे उस कागज पर हस्‍ताक्षर जिसमे आप अपने किसी प्रिय के साथ किसी दुर्घटना के लिए जिम्मेदारी ले रहे हों, मन को विचलित कर देता हैं । लेकिन जब वही प्रियजन स्‍वस्‍थ हो जाता है तो ऐसा लगता है कि मानों सब कुछ मिल गया । आपनें यह भी सही कहा है कि प्रेम के कारण ही हम विपदा के समय अशुभ की कल्‍पना करते हैं । प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ, धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

Aakash Tiwaari के द्वारा
28/10/2010

आदरणीय अरविन्द जी, सबसे पहले तो मै आपकी माता जी के तथा आपके पूरे परिवार के स्वास्थ्य और खुशहाली की प्रार्थना भगवान् से करता हूँ…… ज़िन्दगी न तो हमारे हांथो में है न तो डॉक्‍टर के हांथों में…डॉक्‍टर तो केवल और केवल प्रयास करता है परिणाम तो भगवान् को देना होता है……आज का वक्त ऐसा चल रहा है की अगर वो डॉक्‍टर ये कह दे की फला ऑपरेशन से सब कुछ ठीक हो जाएगा और अगर ठीक न हुआ तो परिजन क्या करते है ये आज कल आप देख रहे है….क्या एक डॉक्‍टर को एक सफल ऑपरेशन कर के खुसी नहीं मिलती…शायद ये हम और आप नहीं समझ सकते.. खैर आपका लेख बहुत ही अच्छा था…..बधाई कबूल करें…. आकाश तिवारी

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    29/10/2010

    प्रिय श्री आकाश तिवारी जी, आपकी प्रार्थना भगवान ने सुन ली है व सभी अब स्‍वस्‍थ एवं प्रसन्‍न हैं । मैं इसके लिए आपका आभारी हूँ । बात आपकी सही हैं लेकिन डाक्‍टर को अच्‍छे व बुरे दोनों परिणाम बतानें चाहिए । यह भी स्‍पष्‍ट करना चाहिए की चिकित्‍सा या उपचार की अपनी सीमाएं हैं । दहशत बना देने से रोगी के परिजन तो परेशान होते ही हैं कुछेक मामलों में उग्रता का कारण भी यह दहशतगर्दी ही है । प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद ।

R K KHURANA के द्वारा
28/10/2010

प्रिय अरविन्द जी, आपकी माता जी के स्वस्थ्य के बारे में जानकर तसल्ली हुई ही भगवान् ने रक्षा की ! मैंने सुना था की आपकी पत्नी और बच्चों को भी बुखार आदि ने घेर लिया था ! अब उनकी हालत कैसी है ! इश्वर से प्रार्थना है के वे भी स्वस्थ हों ! परमात्मा उन्हें लम्बी आयु दे ! बहुत दिनों बाद आपकी रचना देखकर हर्ष हुआ ! आपने आजकल के अस्पतालों का चिठ्ठा खोला है ! अभी परसों लुधियाना में प्रतिष्ठित अस्पताल CMC में एक लड़की के आपरेशन में डाक्टरों ने उसके पेट में कैंची छोड़ दी थी ! समाचार पत्रों में इसका बहुत हंगामा हुआ है ! पञ्च डाक्टर व नर्सों को सस्पेंड कर दिया गया है ! खुराना

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    29/10/2010

    आदरणीय श्री खुराना जी, नमस्‍कार, आपकी प्रार्थना का असर हुआ हैं व अब पत्‍नी व बच्‍चें काफी हद तक स्‍वस्‍थ है । वायरल बुखार के बाद के प्रभावों को तो भुगतना ही पड़ेगा । आशा है आपके दोनों दामाद अब स्‍वस्‍थ एवं प्रसन्‍न होंगें । मैं तो बस पोजिटिव सोच व नेगेटिव सोच और उनके प्रभाव के बीच उलझ गया था । अस्‍पताल जो कर रहे हैं अब वह ना तो कल्‍याणार्थ है और ना ही धर्मार्थ है । ये अस्‍पताल अब केवल और केवल अर्थोपार्जन के लिए ही कार्य कर रहे हैं । अरविन्‍द पारीक

Ramesh bajpai के द्वारा
28/10/2010

आदरणीय श्री पारीख जी माता जी अब स्वथ्य है यह हमारे लिए सकून भरी बात है .इश्वर से प्रार्थना है की वे इसी तरह हँसती मुस्कराती रहे . बाकि जिस अनुभव से आप गुजर चुके है वह तो पीड़ा दायक है ही .आपके परिवार के लिए हार्दिक मंगल कामनाओ सहित

    rajkamal के द्वारा
    28/10/2010

    आदरणीय श्री अरविन्द पारिक जी आप आदरणीय श्री वाजपाई जी कि दुआओं को और शुभकामनाओ को या तो दो से गुना कर दीजिए या फिर उसमे उतनी ही जोड़ लीजिए क्योंकि उसमे मैं भी शामिल हूँ ….. और रही बात आपकी शंकायो का जवाब देने कि तो मैं इस नाज़ुक मामले में अँधेरे में कोई तीर या तुक्का नहीं मारना चाहता … जो भी दूसरे गुणी और विद्वान जन कहेंगे उस पे मेरी नज़र रहेंगीं कुछ सिखने के लिए

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    29/10/2010

    आदरणीय श्री वाजपेयी जी, मंगलकामनाओं व शुभकामनाओं के लिए आभारी हूँ । प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    29/10/2010

    प्रिय श्री राजकमल जी, आपकी दुगनी मंगलकामनाओं और शुभकामनाओं के कारण ही न केवल मेरी माताजी अब स्‍वस्‍थ एवं प्रसन्‍न हैं अपितू पूरा परिवार स्‍वस्‍थ है । इसके लिये मैं बार-बार आभार व्‍यक्‍त करता हूँ । यदि आप अंधेरें में भी तीर चलातें तो वह निशानें पर ही लगता क्‍योंकि मैं आपकी लेखनी में निरंतर निखार ही देख रहा हूँ । प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

nishamittal के द्वारा
28/10/2010

पारीक जी ,आपके परिवार के लिए शुभकामनाएँ.श्रद्धेय माताजी के स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रभु से कामना. डाक्टर्स के हाथ में हमारा जीवन होता है धरती पर परन्तु नियंता को जो स्वीकार्य है वही होता है,हम अपने या डाक्टर के फैसले का परिणाम के अनुसार विश्लेषण कर लेते हैं.परन्तु चिकत्सकीय क्षेत्र में चाहे कितनी ही विकृतियों का समावेश हो गया हो हमारे पास उसके अनुसार चलने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं होता.परन्तु ये निश्चित है कि आम आदमी के पास तो इतनी सामर्थ्य होती ही नहीं कि वह महंगे अस्पतालों का व्यय भर उठा सके.पुनः शुभकामनाएँ.

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    29/10/2010

    सुश्री निशा मित्तल जी, आपकी शुभकामनाओं के लिए तहे दिल से आभारी हूँ । आपने सही कहा कि डाक्टर्स के हाथ में हमारा जीवन होता है धरती पर परन्तु नियंता को जो स्वीकार्य है वही होता है । बस हम अपने या डाक्टर के फैसले का परिणाम के अनुसार विश्लेषण कर लेते हैं । आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

abodhbaalak के द्वारा
28/10/2010

पारीक जी, सर्वप्रथम तो आपकी माता जी के सफल ओपरेशन के लिए आपको बधाई हो, आपकी कमी मंच पर काफी महसूस की जा रही थी, आपने जो प्रशन इस रचना के द्वारा उठाये हैं वो विचारणीय है, मुझे भी अपने बड़े भाई की बाई पास सुर्जरी करवानी पड़ी थी और कुछ ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा था, इश्वर की धन्यवाद है की वो भी अब स्वस्थ्य है. http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    29/10/2010

    प्रिय श्री अबोधबालक जी, शुभकामनाओं के लिए आपका तहेदिल से आभारी हूँ । आपके बड़े भाई अब स्‍वस्‍थ है जानकार प्रसन्‍नता हुई । ईश्‍वर उनको दीर्घ आयु प्रदान करें व आपके लिए वे सदैव आशीर्वाद की बौछार करते रहें । प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक


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