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भाईजीकहिन Bhaijikahin

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पाकिस्तान में शिक्षा बेज़ार

Posted On: 26 Sep, 2010 Others,न्यूज़ बर्थ में

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भाई जी  बोले, ‘जब अचानक हमें कुछ धनराशि की आवश्‍यकता हो तो हम क्‍या करते हैं ? या तो कोई ऐसा काम तलाशतें हैं जहां से तत्‍काल कुछ अर्जित किया जा सके अथवा ऐसे खर्चो पर विराम लगाते हैं जिन्‍हें हम अपनी नजरों में विलासिता समझतें हैं । यदि फिर भी आवश्‍यकता की पूर्ति न हो तो हम किसी परिचित, किसी दोस्‍त या रिश्‍तेदार के आगे हाथ फैला देते हैं । लेकिन क्‍या कभी आपनें ऐसा किया है कि ऐसी आपातकालीन अवस्‍था में जब कुछ धनराशि की आवश्‍यकता हो तो आपनें अपनी उस आवश्‍यकता पर विराम लगाया हो जो आपका भविष्‍य बना सकती है । नहीं ना । लेकिन ऐसा हुआ है, और वह भी हमारे पड़ोस में ।’

 

‘आखिर कहां ?’

  

‘और कहां पाकिस्‍तान में भी हमारे देश की तरह अभूतपुर्व बाढ़ आई हैं । इस विनाशकारी बाढ़ के चलते पाकिस्‍तान की केन्‍द्र सरकार ने वित्तीय संकट का सामना करने के लिए विकास कोष में कटौती करने का फैसला लिया है । इस फैसले का परिणाम यह हुआ है कि उच्‍च शिक्षा आयोग को पिछले साल जहां 22.5 अरब रूपये का बजट मिला था वहीं अब इसे घटा कर 15.7 अरब रूपये कर दिया गया है । यानि विनाशकारी बाढ़ के चलते पाकिस्‍तान में शिक्षा का विनाश भी होना तय है । यह भी गौरतलब है कि स्‍वीकृत बजट में से केवल 1.5 अरब रूपये ही जारी किए गए हैं ।’

 

‘अच्‍छा आपको यह जानकारी किसनें दी ?’ मैंनें भाईजी से पूछा ।

 

‘अरे और कौन देगा, यह जानकारी सभी समाचारपत्र व अन्‍य मीडिया के साधन दे रहे हैं ।’  

 

‘भाईजी, यहां सोचने वाली बात यह है कि पाकिस्‍तान के हुक्‍मरानों को विनाशकारी बाढ़ के चलते यदि सरकारी खर्च में कटौती करनी ही थी तो क्‍यों नहीं मंत्रियों के विदेशी दौरों, शाही पार्टियों, व्‍यर्थ में बर्बाद किए जा रहे हथियार खरीद के सौदों व आंतकवादियों को दी जा रही सहायता पर रोक लगाई गई । संभवत: पाकिस्‍तान में भारत को सभी समस्‍याओं की जड़ के रूप में देखनें वाले चश्‍में पहनें बैठी सरकार को पाकिस्‍तान की ज्‍यादातर समस्‍याओं की जड़ शिक्षा की कमी दिखाई नहीं देती । इसका कारण संभवत: यह भी हो सकता हैं कि शिक्षित पाकिस्‍तान भारत विरोध के लिए एकजुट नहीं होगा । ऐसे में आंतकवादी व अलगाववादी ताकतें और एक इलीट पाकिस्‍तान कैसे अपनी रोटियां सेंक पाएगा ।’

 

‘ आप ठीक कह रहे है पारीक जी,  लेकिन यह कटौती की कार्रवाई पाकिस्‍तान की मानसिकता को भी दर्शाती है । भारत में सरकार मदरसों से आगे निकल कर बच्‍चें शिक्षित हो पाएं व दुनिया से लोहा ले सकें की सोच रखती है लेकिन पाकिस्‍तान सरकार न केवल सरकारी शिक्षा प्रणाली को नष्‍ट करनें पर उतारू है बल्कि‍ विकास कार्यो को भी ठप्‍प कर देना चाहती है ।’ इतना कह भाईजी तो आगे बढ़ गए और मैं फिर अकेला रह गया अपना सवाल लिए ।

 

क्‍या हम अपनें पड़ोस में धारावी जैसी एक अबुझ झुग्‍गी बस्‍ती को झेल पाएंगें, जिसकी अंधेरी गलियों में पनप रही अलगाववाद व आतंकवाद की आग हमें ही लीलनें को आगें न बढ़ जाएं ?

 

 

निस्‍:संदेह पाकिस्‍तान सरकार शिक्षा पर खर्च को बढ़ा कर ही पाकिस्‍तान को पाक-साफ बना सकती हैं व भारत के सानिध्‍य का लाभ उठाकर लोकतंत्र की जड़ें मजबूत कर सकती है । बस इसके लिए सोच को बदलना होगा ।

 

 

- अरविन्‍द पारीक



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27 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

atharvavedamanoj के द्वारा
01/10/2010

आदरणीय पारिक जी वन्देमातरम आपके भाई जी और शाही जी के ज्ञानी जी लाजबाब हैं…अपने पडोसी की क्या चर्चा करूं वह तो है ही पडोसी और एक आदर्श कालोनी वासी पडोसी…जी कारे नहीं समझ पाया..राजपुताना का तो कहना ही क्या?जय भारत,जय भारती

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    04/10/2010

    प्रिय श्री मनोज जी, सराहना व प्रशंसा के लिए आभार व प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद । जी कारे का अर्थ यही है कि आदर दर्शाना । अर्थात आप दूश्‍मन को भी आदर देकर लिखें व बोलें । जय भारत,जय भारती । अरविन्‍द पारीक

Ritesh के द्वारा
28/09/2010

भाईजी, इस पड़ोसी की चिंता करने से क्‍या लाभ । हॉं हमारा घर ही कहीं इसके लपेटे में ना आ जाए । यह डर वास्‍तव में ज्‍यादा बड़ा है । आपनें ठीक लिखा है कि क्‍या हम अपनें पड़ोस में धारावी जैसी एक अबुझ झुग्‍गी बस्‍ती को झेल पाएंगें, जिसकी अंधेरी गलियों में पनप रही अलगाववाद व आतंकवाद की आग हमें ही लीलनें को आगें न बढ़ जाएं ? निस्‍:संदेह पाकिस्‍तान सरकार शिक्षा पर खर्च को बढ़ा कर ही पाकिस्‍तान को पाक-साफ बना सकती हैं व भारत के सानिध्‍य का लाभ उठाकर लोकतंत्र की जड़ें मजबूत कर सकती है । बस इसके लिए सोच को बदलना होगा । लेकिन पाकिस्‍तानी हुक्‍मरानों को ये बातें बताऐगा कौन । वैसे हमारे देश में भी मुस्लिम बस्तियों को देखकर ऐसा लगता है जैसे शिक्षा के प्रति उनकी सोच भी यही है । बहुत कम मुस्लिम परिवार उच्‍च शिक्षा की बात सोचते हैं । रितेश

    Arvind Pareek के द्वारा
    30/09/2010

    प्रिय श्री रितेश जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार व धन्‍यवाद । मैं आपकी इस बात से सहमत नहीं हूँ कि हमारे देश में भी मुस्लिम यही सोच रखते हैं । क्‍या उच्‍च पदों पर आसीन हमारे मुसलमान भाई किसी अन्‍य देश से शिक्षा प्राप्‍त कर आए हैं । अरविन्‍द पारीक

R K KHURANA के द्वारा
27/09/2010

प्रिय अरविन्द जी, क्षमा चाहता हूं कुछ कारन से मैं मंच पर न आ सका और आपकी इतनी अच्छी रचनायो को न पढ़ सका ! पाकिस्तान को आईना दिखने के लिए आपको बधाई ! अपने ठीक कहा है ! जब पडौसी के घर में आग लगती है तो उसका कुछ न कुछ सेक अगल बगल वालों को भी पहुँचता है ! अच्छी रचना के लिए बधाई ! राम कृष्ण खुराना

    ARVIND PAREEK के द्वारा
    28/09/2010

    आदरणीय श्री खुराना जी, आप क्षमा मांग कर मुझे लज्जित ना करें । आपकी व्‍यस्‍तता से मैं परिचित हूँ । बस यही कामना है कि आप शीघ्र इस मंच पर अपनी रचनाओं के साथ उपस्थित हों । आपने सच ही लिखा है कि आग आगे-पीछे अड़ोस-पड़ोस कुछ नहीं सोचती हवा के झोंकें से जो संपर्क में आया सब लील जाती है । पाकिस्‍तान के सुलगनें पर हमारा नुकसान भी हो सकता है । बधाई के लिए आभार व प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

आर.एन. शाही के द्वारा
27/09/2010

श्रद्धेय पारीक जी, प्रणाम! पाकिस्तान के संदर्भ में दोनों ही बातें सत्य के क़रीब हैं । यह सोच कि शिक्षा से आने वाली जागरूकता कहीं वर्तमान शासकीय ट्रेंड चाहे फ़ौजी हो या गैर फ़ौजी, उसकी धारा को मोड़कर कठमुल्लों और इस्लामिक आतंकवाद की आत्मा जहालत को चुनौती देकर इनके अस्तित्व को ही नेस्तनाबूद न कर दे, और दूसरा यह भी, कि इस प्रकार की पीढ़ी को लम्बे समय तक भारत का डर दिखाकर उसके विरोध के नाम पर सत्ता में नहीं रहा जा सकता । लेकिन इस्लामिक आतंकवाद का बनाया हुआ गढ़ पाकिस्तान अब उसके भस्मासुर बन जाने के बाद वैसे भी लम्बे समय तक अपना अस्तित्व बरक़रार रख पाएगा, इसमें भी संदेह ही है । अच्छी पोस्ट के लिये बधाई ।

    ARVIND PAREEK के द्वारा
    27/09/2010

    आदरणीय शाही जी, प्रणाम । पोस्‍ट की प्रशंसा व सराहना के लिए आपका आभारी हूँ । टिप्‍पणी के लिए धन्‍यवाद । पाकिस्‍तान के अस्तित्‍व का संकट भविष्‍य में भारत के लिए भी कष्‍टप्रद हो सकता है । क्‍योंकि यदि आतंकवाद उसे लीलता है तो भारत के लिए खतरा और बढ़ेगा । अरविन्‍द पारीक

kmmishra के द्वारा
26/09/2010

पारीक जी प्रणाम । पड़ोसी के किस्से निराले हैं । बाढ़ ने न सिर्फ उनके घर, खेत खलिहान, गांव और शहर ही नहीं उजाड़े हैं बल्कि उनकी बुद्धि भी इस बाढ़ के पानी में बह गयी है । शिक्षा के दिया से तेल निकाल कर ये अपने घर में उजाला करना चाहते हैं फिर चाहे अशिक्षा का अंधेरा ही क्यों न छा जाये । इस तरह की नीतियों से पाकिस्तान का भला नहीं होगा । हम तो बैठ कर बस पाकिस्तान आवाम के लिये दुआ ही कर सकते हैं । पड़ोसी का दर्द महसूस कराती पोस्ट के लिये आभारी हूं ।

    ARVIND PAREEK के द्वारा
    27/09/2010

    आदरणीय श्री मिश्रा जी, प्रणाम । आपकी तो टिप्‍पणी ही मुझे आपका लिखा व्‍यंग पढ़नें का रस दे देती है । क्‍या खुब लिखा है आपनें कि शिक्षा के दीपक से तेल निकाल कर ये अपने घर में उजाला करना चाहते हैं फिर चाहे अशिक्षा का अंधेरा ही क्यों न छा जाये । अब पड़ोस में यदि अंधेरा है तो मन तो विचलित होता ही है । आपकी अमुल्‍य प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ । धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

rajkamal के द्वारा
26/09/2010

आदरणीय भाई जी …नमस्कार … पहली तारीख पास आ रही है …(री पोस्ट ) खबरे तो यह भी आ रही है की पकिस्तान का रक्षा बजट पहले से कहीं ज्यादा है …उसमे कोई कमी नहीं दिखती है … और हमारे खुद के भारतवर्ष में कुल बजट का कितने प्रतिशत शिक्षा और खेलो पर खर्च किया जाता है ..यह भी जगजाहिर है …. अगर कल को पकिस्तान ने हमारे भारत का ही हिस्सा बन जाना है तो फिर हमको बराबर उसकी भी चिंता करनी ही चाहिए …. क्योंकि एक न दिन तो दुनिया के नक़्शे से पकिस्तान का नाम मिटना ही है … आप से गुजारिश है की कभी बंगलादेश के नागरिकी बदतर जिंदगी पर भी लिखे …. धन्यावाद

    ARVIND PAREEK के द्वारा
    27/09/2010

    प्रिय श्री राजकमल जी, नमस्‍कार । आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद । पाकिस्‍तान के रक्षा बजट में बढ़ोत्तरी तो होनी ही है, क्‍योंकि वहां केवल भारत विरोध पर ही विदेश से पैसा आता है । आपकी यह बात भी सही है कि कभी ना कभी तो भारत-पाकिस्‍तान व बांग्‍लादेश एक होकर भारतवर्ष बन जाएंगें । लोग तो कहते हैं कि नास्‍त्रेदमस ने ऐसी भविष्‍यवाणी भी की है । बांग्‍लादेश के नागरिकों की जिंदगी पर भी लिखनें का प्रयास करूँगा । अरविन्‍द पारीक

daniel के द्वारा
26/09/2010

पकिस्तान की जनता और सरकार दोनों ही एक ऐसे दुष्चक्र में फसे हुए है ,जिससे बाहर आना अब उनके लिए संभव नहीं रह गया है पकिस्तान की सरकार एक वास्तविक सरकार नहीं है वह तो एक उलझे हुए समीकरण अस्थाई परिणाम है जो सेना ,अलगाव वादियों , कट्टरपंथियों और अशिक्षित समाज की भेद चाल से लगातार प्रभावित होता रहेगा …………………………………………………………………………….

    daniel के द्वारा
    26/09/2010

    कृपया भेद को भेड़ पढ़े

    ARVIND PAREEK के द्वारा
    27/09/2010

    प्रिय श्री डेनियल जी, आपनें जो लिखा वह भी उतना ही सच है जितना यह सच है कि पाकिस्‍तान यदि विश्‍व मानचित्र पर टिका है तो केवल भारत विरोध के बुते पर । और यह विरोध भी इसलिए कायम है क्‍योंकि अशिक्षा आज वहां एक सबसे बड़ी समस्‍या है । लेकिन फिर भी सरकार के लिए यह एक प्रमूख समस्‍या नहीं हैं । आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
26/09/2010

आदरणीय पारीक जी, चाहे कोई भी हो, व्यक्ति, राष्ट्र, समुदाय या प्रजाति अगर वो अपने आगे बढ़ने के प्रयास छोड़कर अपने पडोसी को पीछे धकेलने की सोचने लगता है, तो पडोसी पर अधि असर हो न हो लेकिन उसपर उसकी दुर्भावना स्वयं आघात कराती है | बिलकुल यही हो रहा है पाकिस्तान के साथ .. अच्छे लेख के लिए बधाई

    ARVIND PAREEK के द्वारा
    27/09/2010

    प्रिय श्री शैलेश कुमार पांडेय जी, सही लिखा है आपनें । जब भी कोई दूसरे का बुरा सोचता है तब स्‍वयं का बुरा करता है । यही सत्‍य है । यही पाकिस्‍तान के साथ हो रहा है । प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

abodhbaalak के द्वारा
26/09/2010

पारीक जी, पाकिस्तान एक विफल देश है और उसकी पुष्टि सयुंक्त राष्ट्र ने भी की है. वहां पर विकास के नाम पर अमेरिका से कितना पैसा आता है पर जाता कहाँ है, हथियारों की खरीद पर, वहां पर जीवन का क्या मूल है, सबको पता ही है. जिस धर्म का नाम पर उसका निर्माण हुआ था,उसी धर्म को लेकर आज वहां क्या हो रहा है, सबको पता है. बहरहाल अगर वो शिक्षित हो जाएँ तो संभवतः, दुनिया में जो आज आतंकवाद फल फूल रहा है उस पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है.

    Arvind Pareek के द्वारा
    26/09/2010

    प्रिय श्री अबोध जी, आपका नाम पढ़ता हूँ तो आपकी टिप्‍पणी में कहीं बातें उसे सार्थक नहीं करती । आप जो भी लिख रहे हैं वह किसी अबोध के विचार नहीं हो सकते । आपनें मेरी बात का समर्थन किया । आपका बहुत बहुत धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

Ramesh bajpai के द्वारा
26/09/2010

भारत में सरकार मदरसों से आगे निकल कर बच्‍चें शिक्षित हो पाएं व दुनिया से लोहा ले सकें की सोच रखती है लेकिन पाकिस्‍तान सरकार न केवल सरकारी शिक्षा प्रणाली को नष्‍ट करनें पर उतारू है बल्कि‍ विकास कार्यो को भी ठप्‍प कर देना चाहती है आदरणीय श्री पारीक जी . हमारे पडोसी राष्ट्र के आकाओ की सारी सोच तो भारत को अशांत करने में लगी रहती है . शिक्षा जैसी बेकार बातो के लए समय कहा उनके पास बहुत अच्छी पोस्ट …

    Arvind Pareek के द्वारा
    26/09/2010

    आदरणीय श्री वाजपेयी जी, आपकी सराहना व प्रशंसा के लिए आभार व प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

nishamittal के द्वारा
26/09/2010

पाकिस्तान ये कैसे समझेगा क्योंकि शिक्षा पर व्यय करने यदि जनता शिक्षित हो गयी तो धर्मान्धता की आड़ में किये जाने वाले काम कैसे होंगें

    Arvind Pareek के द्वारा
    26/09/2010

    सुश्री निशा मित्तल जी, आपनें सही कहा कि धर्मान्‍धता की आड़ में किए जाने वाले कार्य कहीं समाप्‍त न हो जाएं यही डर पाकिस्‍तान को शिक्षा की मद को गंभीरता से नहीं लेने देता । प्रतिक्रिया के लिए आभार व धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

chaatak के द्वारा
26/09/2010

स्नेह श्री अरविन्द जी, आपने जो एक पंक्ति का सुझाव पाकिस्तान को दिया है अगर पाकिस्तान के नापाक आकाओं को ये बात समझ में आ जाये तो वे न सिर्फ अपनी जाहिलियत से मुक्ति पायेंगे बल्कि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा आतंवाद नामक नासूर से भी निजात पा जायेगा | अच्छी पोस्ट पर हार्दिक बधाई!

    Arvind Pareek के द्वारा
    26/09/2010

    प्रिय श्री चातक जी, पाकिस्‍तान भारत विरोध पर ही अपने देश को कायम रखे हुए है साथ में अशिक्षा उसे और हानि पहूँचा रही है । पोस्‍ट की सराहना के लिए व प्रतिक्रिया के लिए आपका आभारी हूँ, धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
26/09/2010

बहुत अच्छा लेख अरविन्‍द पारीक जी………… बेहतरीन विषय को ख़ूबसूरती से प्रस्तुत करने के लिए बधाई……………

    Arvind Pareek के द्वारा
    26/09/2010

    प्रिय श्री पीयुष पंत जी, लेख की सराहना व टिप्‍पणी के लिए धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक


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