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सफेद और काले कौओं की कहानी

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आज काले कौओं ने सभा बुलाई थी । कार्यसूची में बस एक ही विषय था – किसी देश में सफेद कौओं में से धनी-मानी दो कौओं द्वारा यह निश्‍चय किया जाना कि वे अपनी आधी संपति दान करेंगें । उन्‍होंनें अपने निश्‍चय में उस देश के कुछ अन्‍य कौओं को भी शामिल कर लिया था कि वे भी अपनी आधी संपति दान करें । इस तरह लगभग 13 सफेद कौए यह निश्‍चय कर चुके थे ।

 

अब उन दोनों कौओं को लगा कि यदि हमारी संपति आधी हो जाएगी तो संपूर्ण विश्‍व में हम बहुत पीछे हो जाएंगें । वे जानते थे कि अनेकों काले कौओं के पास भी अथाह संपति है । इसलिए उन्‍होंनें काले कौओं को भी अपनी संपति दान करने का न्‍यौता भेज दिया ।

 

यह काले कौओं के प्राचीन संस्‍कार थे कि वे सफेद कौओं को सदैव अपने से श्रेष्‍ठ मानते थे । वे उनकी बात कभी नहीं टालते थे या फिर टाल नहीं पाते थे, क्‍योंकि डरते थे । यह डर भी पिछली पीढ़ी से सुना डर था जिसनें सदैव सफेद कौओं की प्रशंसा ही की थी व उनकी क्रूरता की एक से बढ़कर एक कहानियां भी सुनाई थी । लेकिन इस तरह की उनकी वह क्रुरता काले कौओं के लिए एक आवश्‍यकता नजर आती थी ।

 

वे सफेद कौओं की भाषा व बोली को भी श्रेष्‍ठ मानते थे । इसलिए जब भी किसी गंभीर विषय पर चर्चा करते थे तो केवल सफेद कौओं की भाषा में । उस समय उनकी बात को समझ पाना सबके बस की बात नहीं होती थी ।

 

खैर, जब सफेद कौओं का न्‍यौता काले कौओं को मिला तो वे असमंजस में पड़ गए । क्‍या करें, क्‍या न करें ? काले कौए पहले ही अपने कई धर्मार्थ ट्रस्‍ट चलाते थे । उन्‍होंनें तो कभी सफेद कौओं को ऐसा करने के लिए नहीं न्‍यौता था । फिर सफेद कौए ऐसा क्‍यों कर रहे हैं ? सभी को आश्‍चर्य था । हां, कभी-कभी सफेद कौए अपने किसी फाउंडेशन के नाम से काले कौओं के देश में कुछ धन दे दिया करते थे । लेकिन इसके बदले में काले कौओं ने भी कोई कसर ना रखी थी । वे अपने यहां के सबसे समझदार, चतुर, विद्वान व सर्वाधिक पढ़े-लिखें काले कौओं को बिना किसी रोक-टोक के सफेद कौओं की सेवा में जाने देते थे । भले ही काले कौओं ने उनकी विद्वता व ज्ञान की संवृद्धि पर कितना ही खर्च किया हो ।

 

सफेद कौए इन्‍हीं के दम पर फल-फूल रहे थे । फिर भी बार-बार अपने देश में ऐसी व्‍यवस्‍था करने का ढिढ़ोरा पीटा करते थे कि वे काले कौओं को इतनी आसानी से अपने देश में नहीं आने देंगें । बेचारे काले कौए इतना सूनते ही डर जाते थे । फिर सफेद कौए उन्‍हें जिस कीमत पर चाहते थे उस कीमत पर पा लेते थे । क्‍योंकि वे जानते थे कि जो सबसे समझदार, चतुर, विद्वान व सर्वाधिक पढ़े-लिखें काले कौए हैं वे किसी भी कीमत पर सफेद कौओं के देश में काम करने को तैयार थे ।

 

इसी पर सभा विचार कर रही थी । सभा में बातचीत सफेद कौओं की बोली में हो रही थी । इसलिए कुछ काले कौए बहुत परेशान थे । बात उनकी समझ में नहीं आ रही थी । उनमें से एक कौए ने अंतत: हिम्‍मत की और चिल्‍लाया कि यदि बातचीत इसी तरह सफेद कौओं की बोली में होगी तो वह सभा का बहिष्‍कार कर देगा । बस इतना सुनना था कि वह सभा सब्‍जी बाजार बन गई और ना जाने किन-किन भाषाओं और बोलियों में सभी काले कौए चिल्‍लानें लगे थे । ऐसे में सभा में कुछ निर्णय ले पाना संभव ही ना था । सभापति ने सभा समाप्‍त कर दी । किसी ने इस घोषणा को भी नहीं सुना । लेकिन सभी काले कौए अपनी मर्जी से एक-एक कर सभा से खिसक लिए ।

 

 

मीडिया वाले काले कौओं में भी दो जमात बन गई थी । एक सफेद कौओं की प्रशंसा में कसीदे पढ़ रही थी और दूसरी उस काले कौए का गुणगान कर रही थी जिसने सफेद कौओं की बोली में बातचीत को नकारा था । लेकिन रोचक बात ये थे कि अब चर्चा का विषय सफेद कौओं द्वारा आधी संपति दान करने का निश्‍चय नहीं था । बल्कि चर्चा इस बात पर हो रही थी कि उस आधी संपति से क्‍या-क्‍या किया जा सकता हैं । चर्चा दोनों ही पक्ष कर रहे थे । इसमें कभी-कभी धनी काले कौओं की संपति की चर्चा भी हो जाती थी । पिछले एक सप्‍ताह से बस यही कार्यक्रम, यही समाचार प्रस्‍तुत किए जा रहे थे । बेचारें मनोरंजन के लिए तरस रहे काले कौओं को ना चाहते हुए भी निरंतर इस चर्चा का रसपान करना पड़ रहा था और उधर नई-नई उपलब्धियां हासिल करने वाले कौए परेशान थे कि मीडिया को कैसे अपनी उपलब्धि की जानकारी दें ।

 

 

सफेद कौओं को जब काले कौओं की सभा का समाचार मिला । तो वे समझ गए कि घी टेढ़ी उंगली से निकालना पड़ेगा । उन्‍होंनें तत्‍काल अपना विशेष दूत एक अदना-सा सफेद कौआ काले कौओं के देश में भेज दिया । पलक-पॉंवड़े बिछाए काले कौओं ने उसे इतना सम्‍मान दिया कि वह जब अपने देश लौटा तो स्‍वयं को शेष विश्‍व का राष्‍ट्राध्‍यक्ष समझनें लगा और बोल उठा कि काले कौए अपनी आधी संपति दान करना मान गए हैं ।

 

 

यह बयान काले कौओं के देश में सुनामी से भी बड़ा कहर बन कर आया । काले कौओं की सरकार नें विपक्ष के देश को बेच देने के आरोपों से घबरा कर अपनी सफेद कौवी नेत्री से सलाह मॉंगी और फिर सभा में घोषणा कर दी कि काले कौए अपनी आधी संपति अभी दान नहीं करेंगें क्‍योंकि इस देश में अब गरीब कौओं की संख्‍या धनी-मानी कौओं से कम हैं । इसलिए जब तक यह सरकार इस संख्‍या को धनी-मानी कौओं की संख्‍या से ज्‍यादा नहीं कर लेगी तब तक चैन से नहीं बैठेगी ।

 

इस घोषणा से बहुसंख्‍यक मध्‍यमवर्गीय कौओं में से अनेक कौओं की सांस रूक गई । क्‍योंकि अब जो होना था वह सिर्फ और सिर्फ इन कौओं के विरूद्ध ही होना था ।

 

-          अरविन्‍द पारीक



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29 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Ramesh bajpai के द्वारा
08/12/2010

आदरणीय श्री अरविन्द जी हाल ऑफ़  फेम के लिए बधाई |आप का लेखन निरंतर प्रखर हो ,इसी मंगल कामना व् विलम्ब के लिए क्षमा सहित

    Arvind Pareek के द्वारा
    09/12/2010

    आदरणीय श्री वाजपेयी जी, सादर नमस्‍कार, शुभकामनाओं के लिए आभारी हूँ । शुभकामनाएं कभी भी विलम्‍ब से नहीं होती । अच्‍छा है प्रतिदिन इसी तरह शुभकामनाएं मिलती रहें और मेरी लेखनी निखरती रहे । अरविन्‍द पारीक

26/11/2010

आदरणीय अरविन्द जी सबसे पहले तो क्षमा चाहूँगा की समयाभाव के कारण आपको हाल आफ फेम में चुने जाने की बधाई कुछ देर से दे रहा हूँ और दूसरे आप ने जिस विनम्रता से इस सम्मान का विश्लेषण किया है, मैं आपका मुरीद हो गया हूँ. कृपया इसी विनम्रता के साथ लिखते रहें.

    Arvind Pareek के द्वारा
    30/11/2010

    आदरणीय श्री राजेंद्र रतूड़ी जी, बधाई के तहे दिल से आभारी हूँ, आप तो फिर भी समय पर हैं, मैं ही जबाव देने में देर कर रहा हूँ इसलिए देरी से आने की क्षमा। हॉं मैं और आप टिप्‍पणी नियमित रूप से नहीं दे पाते तो उसमें भी आपका कोई दोष नहीं है, ब्‍लॉग विशेष का पता याद रखना भी कठिन होता है । मैं तो यदा-कदा ही लिख पाता हूँ। साइबर कैफे में बैठकर किसी ब्‍लॉग विशेष को ढूँढ़ना बड़ा ही दूष्‍कर कार्य है। इसलिए जब समय मिलें तब टिप्‍पणी लिखिये । बस यह नियम बनाइये कि टिप्‍पणी लिखुँगा जरूर । अरविन्‍द पारीक

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
23/11/2010

अरविन्द जी,,,,,,,,,,,,,,,हाल आफ फेम में चुने जाने की बधाई|

    Arvind Pareek के द्वारा
    24/11/2010

    प्रिय श्री पियुष पंत जी, बधाई के लिए तहे दिल से आभारी हूँ । आपका धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

allrounder के द्वारा
23/11/2010

अरविन्द जी बहुत – बहुत बधाई ! आपको JJ के इस विशेष सम्मान के लिए, हार्दिक शुभकामनायें ! आशा है आपसे इसी प्रकार के लेख पढने को आगे भी मिलते रहेंगे !

    Arvind Pareek के द्वारा
    24/11/2010

    प्रिय श्री आलराउंडर सचिन देव जी, बधाई के लिए तहे दिल से आभारी हूँ । आप लोगों का प्‍यार व स्‍नेह ही मुझे और लिखनें की प्रेरणा देता है बस आप इसे इसी तरह बरसाते रहिए  तो मैं भी इसी प्रकार लिखता रहूँगा । अरविन्‍द पारीक

Tufail A. Siddequi के द्वारा
23/11/2010

अरविंद पारीक जी अभिवादन, हॉल ऑफ फेम का सम्मान पाने के लिए आपको मेरी ओर से हार्दिक बधाई.

    Arvind Pareek के द्वारा
    24/11/2010

    प्रिय श्री सिद्दकी साहब, सादर अभिवादन, बधाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया । अरविन्‍द पारीक

Alka Gupta के द्वारा
22/11/2010

श्री अरविंदजी, हॉल ऑफ द फेम का सम्मान पाने के लिए आपको मेरी हार्दिक बधाइयाँ । .इस लेख तक मै जागरण मंच पर नहीं आई थी आपके इस व्यंग्य को आज मुझे भी पढ़ने का सुअवसर प्राप्त हुआ ।

    Arvind Pareek के द्वारा
    23/11/2010

    सुश्री अलका गुप्‍ता जी आपकी हार्दिक बधाईयों के लिए आभार हूँ । चलिए इस बहानें इस पुरानी पोस्‍ट को कुछ पाठक और मिलें । तथापि आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

chaatak के द्वारा
22/11/2010

स्नेही श्री पारिक जी सादर नमस्कार, सर्वप्रथम तो आपको हाल आफ फेम में चुने जाने की बधाई| मुझे बेहद खेद है की पहले मैं इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया नहीं कर पाया था लेकिन जागरण ने इस ब्लॉग को मंच पर रखकर इसे पढने का अवसर सहज ही प्रदान कर दिया| काले कौवों की नेत्री सफ़ेद कौवी की हालत इन दिनों और भी ज्यादा पतली हो चली है क्योंकि इस कौवी के पर कतरने को एक दक्षिणभारतीय जटिल कौवा कांय-कांय कर रहा है और उसके पास इस कौवी के कुछ बड़े ही बेहतरीन कारनामो की लिस्ट भी है इस कौवे को कांय-कांय करते हुए खुद देखने के लिए इस लिंक को फालो करें-

    Arvind Pareek के द्वारा
    23/11/2010

    प्रिय श्री चातक जी, बधाई के लिए तहे दिल से आभारी हूँ । हाल आफ फेम में इस पोस्‍ट को शामिल करने पर मैं जागरण का भी आभारी हूँ । जिसने इसे आपके मूल्‍यवान कमेंट के लिए इस मंच पर रख दिया । इस काले कौवे की कांव कांव वाकई काबिले तारीफ है । लिंक देने का शुक्रिया व प्रतिक्रिया देने के लिए धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

roshni के द्वारा
22/11/2010

पारीक जी हॉल ऑफ़ फमे बनने पर बहुत बहुत बधाई ,

    Arvind Pareek के द्वारा
    23/11/2010

    सुश्री रोशनी जी, बधाई के लिए तहे दिल से आभारी हूँ । अरविन्‍द पारीक

आर.एन. शाही के द्वारा
22/11/2010

श्रद्धेय पारीक जी, इस सम्मान के लिये आपको हार्दिक बधाइयां । मैं जब ब्लाँगर्स में नया था, उसी समय आपकी यह रचना पढ़ी थी, और बहुत पसन्द आई थी । तब टिप्पणियां लिखने का अभ्यस्त नहीं हुआ था । आज वह मौक़ा भी मिल गया । साधुवाद ।

    Arvind Pareek के द्वारा
    23/11/2010

    आदरणीय शाही जी, बधाई के लिए तहे दिल से आभारी हूँ । चलिए हॉल आफ फेम के कारण ही सही कम से कम इस पोस्‍ट को आपकी टिप्‍पणी तो मिली । आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

नरेश कुमार के द्वारा
17/08/2010

वाह, वाह क्‍या बात है । हमारी दास्‍तां कौओं की कहानी के रूप में आपका श्रेष्‍ठतम व्‍यंग हैं ये । बस इसी तरह लिखते रहिए । नरेश

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    24/08/2010

    प्रिय श्री नरेश कुमार जी, आपका धन्‍यवाद, आप इसी तरह उत्‍साह बढ़ातें रहेंगें तो मैं इसी तरह लिखता रहूँगा । अरविन्‍द पारीक

R K KHURANA के द्वारा
14/08/2010

प्रिय अरविन्द जी, आपको डिज़िटल कैमरा मिलने की आपको बधाई ! मुझे भी डेल का लैपटॉप लुधियाना स्थित जागरण के कार्यालय से पंजाब के वरिष्ठ महाप्रबंधक श्री सतीश मिश्र जी के कर कमलों से प्रदान किया गया ! जैसा की आप फोटो में भी देख सकते है साथ में श्री विजय गुप्ता, न्यूज़ एडिटर हैं तथा इधर मेरा नाती है ! श्री मनीष चतुर्वेदी जी (Manager Admin ) ने पूरा सहयोग दिया ! धन्यवाद राम कृष्ण खुराना

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    24/08/2010

    प्रिय श्री खुराना जी, धन्‍यवाद व आपकों भी बधाई । अरविन्‍द पारीक

kmmishra के द्वारा
13/08/2010

कौवों में भी इंसानों जैसे लक्षण प्रकट हो रहे हैं । बढ़िया लपेटा आपने कौवों के मार्फत कौवागीरी करते इंसानों को । सटीक और लाजवाब व्यंग । आभार ।

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    14/08/2010

    प्रिय श्री मिश्रा जी, एक स्‍थापित व्‍यंगकार से प्राप्‍त प्रशंसा मेरे लिए बहुत मायने रखती हैं । बस इसी तरह उत्‍साह बढ़ाते रहें । आपका धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

Ramesh bajpai के द्वारा
13/08/2010

अरविद जी बहुत बहुत अच्छा प्रहार बहुत अच्छी बात ” मीडिया वाले काले कौओं में भी दो जमात बन गई थी । एक सफेद कौओं की प्रशंसा में कसीदे पढ़ रही थी और दूसरी उस काले कौए का गुणगान कर रही थी जिसने सफेद कौओं की बोली में बातचीत को न”……..बधाई ‘

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    14/08/2010

    प्रिय श्री वाजपेयी जी, प्रशंसा के लिए धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

R K KHURANA के द्वारा
13/08/2010

प्रिय अरविन्द जी, कोवों के माध्यम से अच्छा व्यंग किया है ! बहुत सुंदर लेख ! जब तक यह काले कोवे सफ़ेद कोवों की नक़ल करते रहेंगे तब तक देश का भला होने वाला नहीं है ! राम कृष्ण खुराना

    bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
    14/08/2010

    प्रिय श्री खुराना जी, प्रशंसा के लिए धन्‍यवाद । मुझे भी पुरस्‍कार में मिलनें वाला डिजीटल कैमरा सोनी डब्‍ल्‍यू 310 मिल गया है । यह मेरा सौभाग्‍य रहा है कि मुझे यह पुरस्‍कार जागरण जंक्‍शन के कार्यालय में सीईओं सुश्री सु‍कीर्ति गुप्‍ता जी के कर कमलों से प्रदान किया गया हैं । आपकों प्रथम पुरस्‍कार का लैपटॉप घर बैठे ही पहूँचा दिया गया है । यह जानकारी भी वहीं मिल गई थी । अरविन्‍द पारीक


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