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भाईजीकहिन Bhaijikahin

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बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना

Posted On: 23 Jun, 2010 Others,sports mail में

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आज स्‍टेशन पहुँचा तो लगा कि दक्षिण अफ्रीका पहुँच गया हूँ । जहां विश्‍व कप फुटबॉल 2010 खेला जा रहा है । कारण, इस भारी भीड़ में विभिन्‍न टीमों की जर्सियां पहने जाने कितने लोग खड़े थे । समाचार पत्रों व पत्रिकाओं के प्रथम पृष्‍ठ या कवर पेज भी विश्‍व कप फुटबॉल की खबरों से भरे पड़े थे । लोग आपस में चर्चा कर रहे थे तो बस फुटबॉल की । भाईजी पर नजर गई तो देखा कि वे इस माहौल का लुत्‍फ नहीं उठा रहे हैं । तभी गाड़ी आ गई । जनरल डब्‍बें की ओर मेरे कदम खिंचे चले जा रहे थे । जबकि भीड़ को देखकर मैं अगली गाड़ी की प्रतीक्षा करना चाहता था । लेकिन भाईजी जनरल डब्‍बे में घुस चुके थे । ऐसे में स्‍टेशन पर रूकने को मन मान नहीं रहा था ।

 

डब्‍बे में आया तो लगा कि फुटबॉल खिलाडि़यों के बीच आ गया हूँ । कोई इटली के अंक खोने की बात कर रहा था तो कोई फ्रांस के बाहर होने का रोना रो रहा था । पुर्तगाल ने उत्तर कोरिया को सात गोलों से पीटा था तो ब्राजील, आइवरी कोस्‍ट पर केवल तीन ही गोल क्‍यों कर सका, कोई इसका विश्‍लेषण कर रहा था । अर्थात कुल मिलाकर सब तरफ चर्चा थी तो सिर्फ और सिर्फ फुटबॉल की ।

 

मैं भाईजी के पास पहुँच गया था । दुआ-सलॉम के बाद, माहौल फुटबॉल का है यह सोचकर मैं पूछ बैठा, ‘भाईजी आपको क्‍या लगता है, इस बार कौन-सी टीम विश्‍व कप ले जाएगी ?’

 

‘भारत !’ भाईजी ने तपाक से जबाब दिया । आवाज इतनी तेज थी कि डब्‍बे के इस शोर में भी सभी ने सुन लिया होगा । मैं कुछ कहता उससे पहले ही मेरे साथ ही झूल रहे सज्‍जन ने जो ब्राजील की जर्सी पहने थे, कहा, ‘अरे भाईजी, आप शायद नहीं जानते भारत तो इसमें भाग ही नहीं ले रहा है ।’

 

‘मैं सब जानता हूँ, जब भारत इसके लिए क्‍वालिफाई ही नहीं कर पाया तो भाग कैसे लेगा ?’ भाईजी ने फिर ऊँची आवाज में ही जबाव दिया ।

 

मैं आश्‍चर्यचकित-सा भाईजी को देख रहा था । तभी फ्रांस की जर्सी पहने सज्‍जन ने कहा, ‘अरे भाईजी, आप यह जानते भी हैं तो फिर ऐसी बेसिर-पैर की बात क्‍यों कर रहे हैं ?’ अर्जेंटीना वाले सज्‍जन बोले, ‘लगता है भाईजी भी भांग खाने लगे हैं ?’ पुर्तगाली सज्‍जन ने तो भाईजी की ज्ञान-क्षमता पर ही प्रश्‍नचिह्न लगा दिया, ‘लगता है भाईजी इसे विश्‍व कप क्रिकेट समझ रहे हैं ?’

 

लेकिन भाईजी न कभी हारे थे न हार मानने वाले थे । इसलिए तुरंत बोले, ‘अच्‍छा, यदि भारत इसमें भाग नहीं ले रहा है तो फिर इस बेगानी शादी में इतने अब्‍दुल्‍ला दीवानें क्‍यों है ? भाई मेरे इस कप को कोई भी जीते ना तो वह भारत को कोई लाभ पहुँचायेगा और ना ही भारत का नुकसान करेगा । ये तो हमारी पुरानी आदत है कि हम विदेशियों और उनकी प्रत्‍येक गतिविधि को अपने सर-माथे पर बैठाते हैं । ब्राजील, पुर्तगाल, अर्जेंटीना, स्‍पेन, इटली आदि देशों में जब कभी विश्‍व कप क्रिकेट होता है और सचिन बेटिंग करता है, तो क्‍या यही दीवानापन दिखता है ? तब क्‍या इन देशों के नागरिक इसी तरह भारत, पाकिस्‍तान या श्रीलंका की टीमों की जर्सियां पहनकर दीवानें बने घूमते है ? या विश्‍व कप कब्‍बडी टूर्नामेंट के किसी खिलाड़ी का नाम कोई यूरोपीय या अमेरिकी देश का नागरिक बता सकता है ? हॉकी खेलने वाले देशों को छोड़कर क्‍या किसी ऐसे देश का नागरिक हाकी के जादूगर ध्‍यानचंद, रूपसिंह, अजीतपाल सिंह, असलमशेर खान या धनराज पिल्‍लै के बारे में बता सकता है ? या आपकी तरह बेगानी शादी में अब्‍दुल्‍ला-सा दीवाना बना घूम सकता है ?’ भाईजी की बात पर जैसे सभी को साँप सूँघ गया था ।

 

स्‍टेशन भी आ गया था । मैं भाईजी से विदा लेकर बाहर आया तो सोचने लगा कि वास्‍तव में बात तो भाईजी सही कह रहे थे कि जिस खेल में भारत कहीं नहीं हैं उसके लिए पूरा देश पागल हुआ जा रहा हैं । रात-रात भर जाग कर मैच देखे जा रहे हैं । अब इस कप को ब्राजील जीते या अर्जेंटीना या कैमरून और आईवरी कोस्‍ट में से कोई भी जीते, उससे इस देश का कितना भला होगा । हाँ, कार्यालयों में नींद की झपकी लेते अधिकारियों के कारण काम में आ रहे व्‍यवधान से व आउटपुट में कमी से जरूर हमारे जीडीपी का स्‍तर कुछ कम हो जाएगा । अरबों के इस देश से क्‍यों नहीं हम एक बार भी विश्‍व कप फुटबॉल में अपनी टीम भेज पाएं हैं ? जहां फुटबॉल के इतने दीवानें हैं वहां सिर्फ सोलह विश्‍व स्‍तरीय फुटबॉल खिलाड़ी क्‍यों नहीं हैं ?

 

शायद आप इन सवालों के जबाव दे पाएं ।

अरविन्‍द पारीक



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36 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nand Kishore के द्वारा
05/07/2010

जी हां आपने उचित लिखा है कि इस विश्‍व कप फुटबाल के कारण हमारा जीडीपी कम हो जाएगा । अच्‍छा व्‍यंगय है ।

    Arvind Pareek के द्वारा
    15/07/2010

    धन्‍यवाद नंद किशोर जी आपने व्‍यंग्‍य पसंद किया ।

kailash के द्वारा
02/07/2010

Nice thought presented with style. Congratulations for prize. kailash

    Arvind Pareek के द्वारा
    04/07/2010

    Dear Kailashji, Thanks for appreciation and wishes. arvind pareek

Asha Rani Sharma के द्वारा
02/07/2010

तृतीय पुरस्‍कार की बधाई । लेकिन आप न.1 है । सदैव की तरह बेहतरीन लिखा है । इससे बेहतर क्‍या होगा ?

    Arvind Pareek के द्वारा
    04/07/2010

    सुश्री आशा रानी शर्मा जी, आपका धन्यवाद. अरविन्द पारीक

saday के द्वारा
01/07/2010

very very Good….

    Arvind Pareek के द्वारा
    04/07/2010

    Dear Saday, Thankyou for the comments.

Hari Kishore के द्वारा
01/07/2010

CONGRATULATIONS BHAIJIKAHIN (ARVIND PAREEK JI). However in my opinion You are the No.1 here. There may be some confusion how the prize has been decided. On the basis of comments then it should be seen in comparison to the post. On the basis of material then no one can beat you. However congratulations once again.

    Arvind Pareek के द्वारा
    04/07/2010

    धन्यवाद हरी किशोर जी अरविन्द पारीक

Vikas के द्वारा
01/07/2010

बधाई आपको तीसरा पुरस्‍कार मिला है ।

    Arvind Pareek के द्वारा
    04/07/2010

    धन्यवाद विकास जी अरविन्द पारीक

ashutosh के द्वारा
30/06/2010

arvind ji top 10 me aane ke liye bahut- bahut badhaiyan …..

    Arvind Pareek के द्वारा
    04/07/2010

    धन्यवाद आशुतोष जी अरविन्द पारीक

http://jarjspjava.jagranjunction.com के द्वारा
29/06/2010

नमस्कार अरविन्द जी, Your narration for football fever is absolutely right.. it reminds me that all these words are speaking by my father in heavy voice.. who used to speak like this in gathering of accompanying people while travelling ..way to office and back to home in trains. … and also for cricket as well as cricketer. We are getting nothing by supporting these sports; nobody is getting bread & butter except loosing money and performance. I got huge irritation whenever I listen worthless discussion of these sports during work time.. but get involve boisterously while doing nothing. :) Anyway, It s absolutely adequate for only those who are attached to them in any way, whether commercially or play them. many many congrats being top ten bloggers of biggest bilingual platform :) Nikhil Singh, http://jarjspjava.jagranjunction.com

    Arvind Pareek के द्वारा
    01/07/2010

    तो ये आप है निखिल सिंह । धन्‍यवाद निखिल जी । मेरी कामना है कि अगली बार आप विजेता बनें । Thanks for your valuable comments. To love and cheers any game is not bad but on the cost of your work is not forgiveable. It also shameful for our country that a 2nd largest population does not have 16 players of world standard.

Vikas के द्वारा
29/06/2010

सोलह विश्‍व स्‍तरीय फुटबाल खिलाड़ी न होने का क्‍या गम है । जब दस ब्‍लॉग स्‍टार यहां मौजूद है । जब इस लिस्‍ट में आपका नाम देखा तो मजबूर हो गया कि कुछ टिप्‍पणी दूँ । क्‍योंकि मैं आपकी लिखी सारी पोस्‍ट पढ़ता आया हूँ । सभी में आपके मौलिक विचारों से अवगत हुआ हूँ । अत: इस तरह अच्‍छी सामग्री हमें मिलती रहें । यही कामना है । आप ही ब्‍लॉग स्‍टार बनें इसके लिए मेरी शुभकामनाएं । विकास

    Arvind Pareek के द्वारा
    01/07/2010

    आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद विकास जी ।

nikhil के द्वारा
28/06/2010

टॉप टेन में चयन होने के लिए आपको हार्दिक बधाई और शुभकामनाये…

    Arvind Pareek के द्वारा
    01/07/2010

    धन्‍यवाद निखिल जी । आप कौन से निखिल जी है, यदि टॉप-10 वाले तो मेरी बधाई स्‍वीकारें और यदि वे नहीं है तो मेरी कामना है कि अगली बार आप विजेता बनें ।

razia mirza के द्वारा
28/06/2010

भाईजी टोप 10 में स्थान बनाने के लिये बधाई।

    Arvind Pareek के द्वारा
    01/07/2010

    सुश्री रजिया मिर्जा जी, बधाई के लिए धन्‍यवाद । आपको भी टॉप-10 में आने की बधाई ।

kmmishra के द्वारा
25/06/2010

भाईजी satya कहिन

    Arvind Pareek के द्वारा
    28/06/2010

    प्रिय श्री के.एम. मिश्रा जी, भाईजी की बात का समर्थन करने के लिए धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

niteshjha के द्वारा
25/06/2010

पारीक जी सवालो का जबाब तो हमारे प्रधानमंत्री जी के पास भी नही है तो हम कैसे दे सकते है. उत्तम! बहुत खूब. बेगानी शादी में अब्दुल्लाह दीवाना, ऐसे मनमौजी को मुश्किल है समझाना. है ना

    Arvind Pareek के द्वारा
    28/06/2010

    प्रिय श्री नितेश झा जी, तारीफ के लिए शुक्रिया व आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

subodh kant misra के द्वारा
24/06/2010

एक अरब बीस करोड़ की आबादी और सिर्फ सोलह खिलाड़ी नहीं है हमारे पास, जो इस महा कुम्भ में तिरंगा लहरा सके, सुन्दर व्यंग, बधाई !

    Arvind Pareek के द्वारा
    28/06/2010

    प्रिय श्री सुबोधकान्ती मिश्रा जी, यह व्यंग्य नहीं सच्चाई है कि एक अरब बीस करोड़ की आबादी और इस फुटबॉल महाकुंभ में खेलने लायक सिर्फ सोलह खिलाड़ी नहीं है हमारे पास । इसका कारण सिर्फ एक ही है कि यह खेल हमारे देश में पेशेवर नहीं हुआ है । अरविन्द पारीक

Nikhil के द्वारा
24/06/2010

भेजी बहुत दिनों बाद आये, लेकिन आये क्या आप तो छा ही गए. बढ़िया व्यंग्य. कल के मौसम के मिजाज़ को थधा करता जागरण पे हास्य की फुहार लाता आपका ये व्यंग्य पढ़ कर मज़ा आ गया.

    Arvind Pareek के द्वारा
    28/06/2010

    प्रिय श्री निखिल जी, आपको यह व्यंग्‍य पसंद आया । इसके लिए धन्यवाद । अरविन्द पारीक

aditi kailash के द्वारा
24/06/2010

बहुत ही अच्छा व्यंग्य….

    Arvind Pareek के द्वारा
    28/06/2010

    सुश्री अदीति जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद । अरविन्द पारीक

chaatak के द्वारा
24/06/2010

वाह भाई जी आपने तो एक ही बार में सभी की बोलती ही बंद कर दी | अच्छा व्यंग पूरी सच्चाई | मज़ा आ गया भाई |

    Arvind Pareek के द्वारा
    28/06/2010

    प्रिय श्री चातक जी, उत्साहवर्धन व आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद । अरविन्द पारीक

R K KHURANA के द्वारा
23/06/2010

प्रिय अरविन्द जी, बात तो आपने उठाई है परन्तु यह तो खेल भावना की बात है ! लोग बाग तो फ़ुटबाल का खेल देखते है फिर उसमें हिस्सा लेने वाली टीमो के प्रति उत्साह होना स्वाभाविक है ! सचिन के कई दीवाने विदेशी हैं ! यदि इसे खेल भावना से देखें तो कोइ बुराई नहीं है ! राम कृष्ण खुराना

    Arvind Pareek के द्वारा
    28/06/2010

    प्रिय श्री खुराना जी, बात आपकी सही है । मैं भी सभी खेलों को पसंद करता हूँ । लेकिन जो भाईजी का चरित्र है उसे यह विदेशी खिलाडि़यों के प्रति भारतीयों का लगाव पसंद नहीं हैं । यदि हम इतना लगाव अपने खिलाडि़यों के प्रति दर्शाए तो क्या पता वे अगले विश्व कप में हमारी टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे हों । अरविन्द पारीक


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