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भाईजीकहिन Bhaijikahin

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एक बार फिर पाठकों व जागरण ब्‍लॉगर्स के विचार आमंत्रित हैं

Posted On: 10 Jun, 2010 Others में

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मैं बहुत खुश था । बल्लियों उछल रहा था । देखते ही भाईजी ने पुछा, ‘क्‍यों भाई ऐसी क्‍या बात है आप बडे़ खुश नजर आ रहे हैं ? क्‍या कोई लॉटरी-वॉटरी लगी है ?’

 

‘बस लॉटरी ही समझिये । अरे भाईजी आपको पता है जागरणजंक्‍शन.कॉम ने मेरे ब्‍लॉग ‘भाईजी कहिन’ को टॉप 20 ब्‍लॉगों की सूची में शामिल किया है ।’ मैंनें उत्‍साह से भरे भाव से जबाव दिया । लेकिन जैसे भाईजी पर तो इस बात का कोई असर ही नहीं हुआ । उन्‍होंनें शांत भाव से लेकिन गब्‍बर वाला प्रश्‍न मेरी और उछाल दिया, ‘कुल कितने ब्‍लॉग थे ?’ मैं हतप्रभ था ।

 

मैं जागरणजंक्‍शन.कॉम पर कभी-कभार ब्‍लॉग देखने वाला उन्‍हें क्‍या जबाव देता । अब मन ही मन खिसिया रहा था कि व्‍यर्थ ही भाईजी को यह जानकारी दी । होना क्‍या है ? अब मेरी असलियत तो खुल ही जाएगी । दूसरों को पढ़ने के लिए कहने वाला मैं स्‍वयं कितना पढ़ाकू हूँ । न इंटरनेट क्‍नेक्‍शन, न कम्‍प्‍यूटर की सुविधा । जैसे-तैसे जुगाड़ कर कहीं पर एमएस वर्ड में टाईप कर किसी साईबर कैफे में जाकर कैसे में अपनी पोस्‍ट ‘भाईजीकहिन.जागरण जंक्‍शन.कॉम’ पर पोस्‍ट करता हूँ ? यह तो मैं ही जानता हूँ । ऐसे में पोस्‍ट करते-करते और टिप्‍पणियों का जबाब देते-देते कब एक घंटा खत्‍म हो जाता है, पता ही नहीं चलता । पढ़ने का समय कैसे निकालुँ ? जागरण वालों ने तो कहीं कोई ऐसी लिस्‍ट भी तो नहीं निकाली है, जिससे पता चलें कि जागरणजंक्‍शन.कॉम पर कुल कितने ब्‍लॉग है ?

 

मेरे सोच की गाड़ी को अचानक ब्रेक लगाना पड़ गया । भाईजी कह रहे थे, ‘चुप क्‍यों हैं ? सांप क्‍यों सूंघ गया ? क्‍या केवल 20 ही ब्‍लॉग थे ?’

 

‘नहीं, नहीं बीस तो नहीं कुछ ज्‍यादा ही होंगें, लेकिन भाईजी क्षमा चाहूँगा । मैंनें कभी इस पर गौर नहीं किया कि कितने ब्‍लॉग हैं ? दरअसल बात ये है कि मैं…..’ मैं अपनी दास्‍तां बयान करना चाहता था लेकिन बात पूरी भी नहीं कर पाया था कि भाईजी ने मुझे रोकते हुए लेकिन मेरे उत्तर को भॉंपते हुए कहा, ‘मैं आपके बारे में नहीं जानना चाहता । मुझे तो यह जानना था कि जागरण वालों ने आपकी कैसी मिट्टी पलीत की है ? आपकों और आपके साथ उन्‍नीस और साथियों को कितनी आसानी से आम और खास में विभक्‍त कर दिया है । आपको तो पता ही है कि यह हमारे समाज की रीति रही है कि जो खास होता है उसे आम लोग हिकारत की नजर से देखते हैं और जो आम होता है उसे खास लोग हिकारत की नजर से देखते हैं । अब आप क्‍या सोचते हैं, आपकी किसी पोस्‍ट पर कोई टिप्‍पणी मिलेगी ? आप जागरणब्‍लॉग का पर्दाफाश पहले ही कर चुके हैं और अब अछूतों की श्रेणी में और आ जाएंगें ।’

 

मैं कहता हूँ, ‘भाईजी, आप गलत हैं ना तो हम आम और खास में विभक्‍त हुए है और ना ही मेरी सोच में कोई फर्क आया है । मैं आज भी वही हूँ जो कल था । अगर आपकी बात सच होती तो भाई राजकमल जी सभी टॉप-20 ब्‍लॉगर को बधाई क्‍यों देते ? भाईजी ब्‍लॉगर की एक अलग ही जाति होती है और एक अलग ही दिमाग । उसे जो दिखता है, जो सुनता है और वह जो पढ़ता है उस पर अपनी तीखी नजर का वार कर देता है या फिर उस पर अपनी करूणा उड़ेल देता है । अगर कुछ बॉंटने को होता है तो वह सहर्ष ही सबके साथ बॉंट लेता है । आपको पता होना चाहिए कि मुझे तो यह टॉप-20 की लिस्‍ट कब आई इसका भी पता नहीं था । राजकमल जी के बाद दिवाकर जी ने जब इसकी जानकारी दी तो पता चला । अब जागरण द्वारा मेरे ईमेल खाते में भेजी गई मेल से तो मैं इस बात की पुष्टि भर कर पाया हूँ । इसलिए मैं तो यही कहूँगा कि भले ही जागरण कितनी ही लिस्‍ट बना लें जागरण के सभी ब्‍लॉगरर्स एक ही जाति के हैं और एक ही रहेंगें ।’  

 

‘अरे मेरे भाई, मैं जो कहना चाहा रहा हूँ आप उसको समझना ही नहीं चाह रहे हैं । लिस्‍ट टॉप-20 की ही क्‍यों बनाई गई ? क्‍यों नहीं सभी ब्‍लॉग की यूआरएल की लिस्‍ट बना कर डाल दी जाती और फिर नीचे टिप्‍पणी दे दी जाती कि इनमें से कुछ ब्‍लॉग ऐसे हैं जिन्‍हें जागरण की नजर में ज्‍यादा पसंद किया जा रहा हैं अथवा जिनकी सामग्री हमें अधिक रूचिकर लगी है । अब हम आप से जानना चाहते हैं कि आपकी नजर में ऐसे कौन से ब्‍लॉग है, जिन्‍हें आप टॉप 50 की या 100 की लिस्‍ट में शामिल करना चाहेंगें । सभी को चयन दो तरह से करना है- एक सामग्री के आधार पर व दूसरा वोट प्रस्‍तुतीकरण या रोचकता के आधार पर देना है । इस तरह वोट देने वालों को अपने दोनों वोट उस ब्‍लॉग के नाम के सामनें वरीयता क्रम का नंबर लिख कर देंनें होंगें यथा 25-5 या 1-1 या 3-10 और इन प्राप्‍त वोटों के आधार पर औसत निकाल कर प्रत्‍येक ब्‍लॉग की दोनों रेटिंग की एक अन्‍य लिस्‍ट जारी कर दी जाए तथा यदि जागरण पुरस्‍कृत करना चाहता है तो पाठकों की पसंद’ के नाम से भी इस रेटिंग के आधार पर पुरस्‍कार प्रदान करें और इस बहानें ‘स्‍टार परिवार’ आदि पुरस्‍कारों की तर्ज पर एक समारोह ही कर डालें । जहां न केवल सभी ब्‍लॉगर्स आपस में मिल पाएंगें बल्कि जागरणजंक्‍शन.कॉम का प्रचार भी हो जाएगा । इस तरह कोई भी ब्‍लॉगर अपने को अलग-थलग महसूस नहीं करेगा । यूआरएल की लिस्‍ट से बहुत से नए ब्‍लॉगों का भी पता चलेगा और आपके जैसे लोग जो यदा-कदा ब्‍लॉग पढ़ पाते हैं व यदा-कदा टिप्‍पणियां लिखते हैं वे भी नए-नए ब्‍लॉगों से परिचित हो पाएंगें और पहले की पोस्‍टों को पढ़ेंगें व टिप्‍पणियां लिख पाएंगें ।’ भाईजी इतना कहकर शांत भाव से आगे बढ़ गए।

 

और मैं आदतन सोचनें लगा कि बात तो भाईजी ने बहुत पते की कही है । लेकिन इसे सुनेगा कौन ?

 

आप इस बारे में क्‍या सोचते हैं ? आपके विचारों का स्‍वागत है ।

Listtop20

अरविन्‍द पारीक



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11 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

http://jarjspjava.jagranjunction.com के द्वारा
20/07/2010

Hello arvind ji!! Firstly thanks for your encouragements (posted on Next blog), i will try to make my best efforts to make true your words. :) (however I hardly get time to log-in here but i will…). However for the suggestions of Bhai ji, i want to award 9/10.. one point left for jagran staff because they are the big boss of this platform :) Well!! You always encourage me like a big brother, this thing make me too much glad, and this serene support always stimulate me to write the best one blog or article of mine, and this is satisfactory that I do too… Once again so many thanks and congratulations Arvind bhai sahab!! -your younger brother and fellow blogger Nikhil Singh

Nikhil के द्वारा
20/06/2010

मैं तो भेजी के विचारों से बिलकुल सहमत हूँ. मैंने आपका पहला ही ब्लॉग पढ़ा है. अन्य ब्लॉग पढ़ कर, अपने विचार रखने की कोशिश करूँगा. वैसे तो मैं त२० की लिस्ट से बहार हूँ, लेकिन जागरण के मंच का अनुभव बहुत सुखद रहा है. आभार, निखिल झा

Rahul Saini के द्वारा
15/06/2010

आपका यह ब्‍लॉग पोस्‍ट पढ़ी तो लगा कि भाईजी सही कह रहे हैं कि – ‘मुझे तो यह जानना था कि जागरण वालों ने आपकी कैसी मिट्टी पलीत की है ? आपकों और आपके साथ उन्‍नीस और साथियों को कितनी आसानी से आम और खास में विभक्‍त कर दिया है । आपको तो पता ही है कि यह हमारे समाज की रीति रही है कि जो खास होता है उसे आम लोग हिकारत की नजर से देखते हैं और जो आम होता है उसे खास लोग हिकारत की नजर से देखते हैं । अब आप क्‍या सोचते हैं, आपकी किसी पोस्‍ट पर कोई टिप्‍पणी मिलेगी ? आप जागरणब्‍लॉग का पर्दाफाश पहले ही कर चुके हैं और अब अछूतों की श्रेणी में और आ जाएंगें ।’ इसलिए मैं देख रहा हूँ कि टॉप-20 की लिस्‍ट में आए सभी ब्‍लॉगरर्स की पोस्‍ट पर ये टॉप-20 ब्‍लागरर्स ही आपस में टिप्‍पणियां कर रहे हैं । इनमें से जो टिप्‍पणी नहीं करते उनके ब्‍लॉग को भी कोई टिप्‍पणी नहीं दे रहा हैं । वास्‍तव में आम और खास का विभाजन हो गया है । पुरस्‍कारों के बारे में भाईजी का सुझाव अच्‍छा है । पाठकों की पसंद के अनुसार ही ब्‍लॉग पुरस्‍कृत किए जाएं । भले ही इसके लिए पाठक दैनिक जागरण व जागरण टीवी पर इसका प्रचार कर जुटाये जाएं । आपकी सभी पोस्‍ट अच्‍छी लगी । मेरी रेटिंग तो 1-1 होगी । राहुल

    अरविन्‍द पारीक के द्वारा
    16/06/2010

    प्रिय श्री राहूल जी, लगता है आप जागरण जंक्‍शन के सभी ब्‍लॉग देखते व पढ़तें हैं । मैं आपसे सहमत हूँ । यदि मुझे यह 1-1 की रेटिंग दी है तो आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद । लेकिन मेरे विचार में अन्‍य अनेक ब्‍लॉगरर्स ऐसे है जो अपनी कई पोस्‍ट के लिए इस रेटिंग के हकदार है । आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

R K Khurana के द्वारा
10/06/2010

प्रिय अरविन्द जी, टॉप 20 में आपका नाम देख कर प्रसनता हुई ! आपको बधाई ! आपके ;सुझाव अच्छे है यदि इस पर अमल किया जाय तो अच्छा है ! मेरी और से शुभ्कमनार्यें खुराना

    Arvind Pareek के द्वारा
    11/06/2010

    प्रिय श्री खुराना जी, आपका दिल से आभारी हूँ । क्‍योकि प्रारंभ से ही स्‍नेह पाता रहा हूँ । भाईजी का सुझाव पसंद आया धन्‍यवाद । अरविन्‍द पारीक

रामेश्‍वर के द्वारा
10/06/2010

अरविन्द जी,टॉप-20 में आने की आपको बधाई रामेश्‍वर

    Arvind Pareek के द्वारा
    11/06/2010

    प्रिय श्री रामेश्‍वर जी, आपका धन्‍यवाद । आपने हिन्‍दी में टिप्‍पणी दी उसके लिए मैं आपका आभारी हूँ । अन्‍य पोस्‍ट भी पढ़ें व अन्‍य रीडर्स के ब्‍लॉग भी पढ़ें । अनेक बहुत अच्‍छे ब्‍लॉग हैं । उन पर भी प्रतिक्रिया दें । अरविन्‍द पारीक

aditi kailash के द्वारा
10/06/2010

अरविन्द जी, आपका धन्यवाद्…..टॉप-20 में आने की आपको भी बधाई………वैसे ये एक औपचारिकता भर है…….आपने इतने बड़े व्यक्ति का उदाहरण यहाँ मेरे लिए दिया, मैं तो उस बड़े चमकते सूरज के सामने एक छोटा सी चिंगारी भी नहीं हूँ……वैसे हम आपके भी शुक्रगुजार हैं……..हम पहले सिर्फ कवितायेँ ही लिखते थे……आपके लेख में आई प्रतिक्रियाओं ने ही हमें लेख लिखने प्रेरित किया…… मेरी प्रोफाइल फोटो देखकर तो आपको अंदाज़ा हो गया होगा मैं कितनी बड़ी हूँ…….मैं हमेशा उतना बड़ा ही रहना चाहती हूँ……. बिलकुल मासूम, चुलबुली, बिना किसी चिंता के…….. समय के बारे में तो मै बस यहीं कहूँगी की दिन में २-३ बार जब भी थोड़ी देर नेट पर बैठती हूँ तो जो भी पढ़ती हूँ, अच्छा लगता है तो उसी समय प्रतिक्रिया दे देती हूँ……… और अपने ब्लॉग पर भी आये प्रतिक्रियाओं का जवाब दे देती हूँ………अब सामने वाले ने मेहनत की है तो उसे कुछ तो प्रशंसा मिलनी ही चाहिए…… परिवार का प्यार तो हमेशा साथ है और रहेगा, पर परिवार में किसी को भी नहीं पता है कि मै ब्लॉग और कवितायेँ लिखती हूँ और न ही मेरे मित्रों को……. बस मैं और मेरा लैपटॉप…….अक्सर ये बातें लिखते हैं…….

aditi kailash के द्वारा
10/06/2010

बहुत अच्छा लिखा है आपने……..समय की कमी के कारण ज्यादा नहीं लिख पाएंगे……आपको बधाई ……

    Arvind Pareek के द्वारा
    11/06/2010

    सुश्री अदिति जी, टिप्‍पणी के लिए धन्‍यवाद । लेकिन ब्‍लॉग पोस्‍ट में भाईजी के विचारों से आप सहमत हैं या असहमत, आपकी प्रतिक्रिया से स्‍पष्‍ट नहीं हैं । अरविन्‍द पारीक


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